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Same Sex Marriage : यौन रुझान कह खारिज नहीं कर सकते समलैंगिक रिश्ता, शादी के हक पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

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द फॉलोअप डेस्क:


मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में समलैंगिक जोड़ों को विवाह की अनुमति संबंधी याचिका पर सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस हिमा कोहली, जस्टिस एस रवींद्र भट्ट और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने मामले की सुनवाई की। जीवन साथी चुनने को अनुच्छेद-21 के तहत जीवन एवं स्वतंत्रता का अधिकार के तहत मौलिक अधिकार बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकारें, केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेश इस विषय में भेदभाव नहीं कर सकते।

जीवनसाथी का चुनाव करना जीवन का अभिन्न अंग
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही यह साफ कर दिया है कि समलैंगिक जोड़ों का विवाह स्पेशल मैरिज एक्ट-1954 के दायरे में रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जीवन साथी का चुनाव किसी भी व्यक्ति के जीवन का अभिन्न अंग हो सकता है। कई लोगों के लिए यह उनकी जिंदगी का सबसे जरूरी फैसला है। उन्होंने कहा कि यह अनुच्छेद-21 के तहत जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार के तहत हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस पर कानून नहीं बना सकता है और ना ही केंद्र सरकार पर दवाब बना सकता है। यह केंद्र के विवेक पर निर्भर है। हम निर्देश ही दे सकते हैं।

 

प्यार और जुड़ाव की भावना ही हमें इंसान बनाती है
चीफ जस्टिस ने कहा कि हम प्यार महसूस करते हैं या किसी के प्रति जुड़ाव महसूस करते हैं, यही विशेष क्षमता बताती है कि हम इंसान हैं। यह जुड़ाव किसी भी व्यक्ति के साथ हो सकता है। यह रिश्ते आगे चलकर रोमांटिक रिलेशनशिप या नेटल फैमिली का रूप ले सकती है। उन्होंने कहा कि परिवार या शादी इंसान के खुद के विकास के लिए भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऐसे जुड़ाव का कोई व्यक्ति पूरी तरह से आनंद ले सके, इसके लिए उन्हें मान्यता देनी होगी। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के साथ जुड़ाव महसूस करता है, चाहे वह किसी भी लिंग का हो तो उसे यह कहकर नहीं खारिज किया जा सकता कि वह संबंधित व्यक्ति का यौन रूझान है। उन्होंने कहा कि मान्यता नहीं देना भेदभाव और अधिकारों का उल्लंघन होगा। 

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को समिति बनाने का निर्देश दिया
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह समलैगिंक व्यक्तियों के अधिकार और हक तय करने के लिए समिति का गठन करे। यह समिति समिति समलैंगिक जोड़ों के राशन कार्ड, ज्वॉइंट बैंक अकाउंट और पेंशन आदि अधिकारों पर विचार करेगी। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट को केंद्र सरकार देखेगी और अपने विवेक के हिसाब से फैसला लेगी।