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गुजरात : जिंदगी के सारे सुख-सुविधा त्याग कर अरबपति परिवार की 9 साल की बेटी बनी संन्यासी

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डेस्क:
9 साल की उम्र में बच्चों को अच्छे से सही गलती की भी पहचान नहीं होती। इसी उम्र में गुजरात की एक बच्ची ने संन्यास ग्रहण किया है। यह बच्ची कोई मामूली परिवार से नहीं आती। यह सूरत के  हीरा व्यापारी संघवी मोहन भाई की पोती और धनेश-अमी बेन की 9 साल की बेटी है। बच्ची का नाम देवांशी है। देवांसी जैनाचार्य कीर्तियशसूरीश्वर महाराज से दीक्षा प्राप्त की है। देवांशी का दीक्षा महोत्सव शनिवार (14 जनवरी 2023) को शुरू हुआ था। आज बुधवार (18 जनवरी 2023) को पूरा हुआ। 


4 हाथी, 20 घोड़े, 11 ऊंट से निकाली गई वर्षीदान यात्रा
सूरत में ही देवांशी की वर्षीदान यात्रा निकाली गई थी। इसमें 4 हाथी, 20 घोड़े, 11 ऊंट थे। इससे पहले मुंबई और एंट्वर्प में भी देवांशी की वर्षीदान यात्रा निकली थी। देवांशी 5 भाषाओं की जानकार है। वह संगीत, स्केटिंग, मेंटल मैथ्स और भरतनाट्यम में एक्सपर्ट है। देवांशी को वैराग्य शतक और तत्वार्थ के अध्याय जैसे महाग्रंथ कंठस्थ हैं।

कभी टीवी ने देखा
देवांशी ने 8 साल की उम्र तक 357 दीक्षा दर्शन, 500 किमी पैदल विहार, तीर्थों की यात्रा व कई जैन ग्रन्थों का वाचन कर तत्व ज्ञान को समझा। देवांशी ने आज तक टीवी नहीं देखा। जैन धर्म में प्रतिबंधित चीजों को कभी इस्तेमाल नहीं किया। न ही कभी भी अक्षर लिखे हुए कपड़े पहने। देवांशी ने न केवल धार्मिक शिक्षा में, बल्कि क्विज में गोल्ड मेडल अर्जित किया। भरतनाट्यम, योगा की भी एक्सपर्ट है।


4 महीने में ही रात का भोजना त्यागा
देवांशी की मां अमी बेन धनेश भाई संघवी कहतीं हैं कि उनकी बेटी जब महज 25 दिन की थी। तब से उसने नवकारसी का पच्चखाण लेना शुरू कर दिया था। जब 4 महीने की हुई तब से ही शाम के बाद भोजन करना बंद कर दिया। जब वह 8 महीने की थी तो रोज त्रिकाल पूजन करती थी। 1 साल की हुई तब से प्रतिदिन नवकार मंत्र का जाप कर रही है। 2 साल और 1 माह की माह से गुरुओं से धार्मिक शिक्षा लेनी की शुरुआत की। देवांशी के जीवन का सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब उसने 4 साल और 3 माह की उम्र से गुरुओं के साथ रहना शुरू किया।