logo

Rajasthan election : CM की दौड़ में शामिल नहीं होने के बावजूद योगी क्यों बन सकते हैं BJP की पसंद   

rajasthan11.jpg

द फॉलोअप डेस्क 

राजस्थान में बीजेपी की सरकार बनना लगभग तय है। अभी तक आये परिणामों के रुझान यही बता रहे हैं। इसी के साथ राज्य में सीएम पद के दावेदारों को लेकर चर्चा तेज हो गयी है। इसमें एक नाम बार-बार सामने आ रहा है, वो है योगी बालकनाथ का। हालांकि वे पूरे चुनाव के दौरान कभी भी सीएम पद का फेस नहीं माने गये। बीजेपी की ओर से अधिकारिक घोषणा नहीं होने के बावजूद सीएम पद के लिए सबसे प्रभावी चेहरा वसुंधरा राजे को ही माना जाता रहा है। राजे के साथ इस रेस में जो दूसरे बीजेपी नेता सीएम पद के दावेदार हो सकते हैं वे हैं, गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल, सतीश पुनिया और सीपी जोशी। लेकिन इन सबके उपर एक नाम अब हावी हो गया है, वो है योगी बालकनाथ का। बीजेपी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि वे सीएम पद के लिए बीजेपी की पसंद बन सकते हैं या बने हुए हैं। औपचारिक घोषणा भर की देरी है। 

कौन हैं योगी बालकनाथ 

योगी बालकनाथ बीजेपी के टिकट पर सांसद हैं। लेकिन पार्टी ने उनको तिजारा सीट से टिकट देकर विधायक के चुनाव में भी मैदान में उतार दिया। वे जीते भी हैं। योगी यादव जाति से हैं। ऐसे में बीजेपी अगर उनको सीएम बनाती है तो पार्टी को एक साथ तीन स्तर पर लाभ मिल सकता है। हिंदूवादी चेहरा होने का लाभ, पिछड़े जमात की हमदर्दी और नया चेहरा। बीजेपी य़े प्रयोग उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ को सीएम बनाकर कर चुकी है। आज की तारीख में योगी बीजेपी के सफलतम सीएम के रूप में पहचाने जाते हैं। यही फार्मूला बीजेपी राजस्थान में भी लागू कर सकती है। बता दें कि योगी बालकनाथ हरियाणा के नाथ समुदाय के मठ के महंत भी हैं। इसी के साथ उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के करीबी भी माने जाते हैं। उनके नामांकन के समय खुद सीएम योगी राजस्थान में मौजूद थे। इस तरह से बीजेपी के हिंदुत्व वाले चेहरे के मानक को भी योगी बालकनाथ पूरा करते हैं। 

बिहार में ये पड़ सकता है असर 
राजनीतिक जानकारों की मानें तो योगी बालकनाथ को सीएम बनाने का सीधा फायदा बीजेपी को बिहार में मिल सकता है। यहां जदयू औऱ राजद की अगुवाई वाली सरकार जातिगत सर्वे कराकर वाहवाही लूट रही है। इससे पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को गोलबंद करने में मदद मिली है। बीजेपी को लगता है कि योगी बालकनाथ को सीएम बनाकर वो नीतीश सरकार को ठोस जवाब दे सकती है। बिहार में पिछड़े वर्ग के वोटरों का रुझान इससे बीजेपी की ओर होगा।