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अब झारखंड में भी होगी प्लाज्मा थेरेपी, रिम्स में सीएम हेमंत ने की सेंटर की शुरुआत

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द फॉलोअप टीम, रांची:
दुनिया भर में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों को बचाने के लिए डॉक्टर्स इलाज का अलग-अलग तरीका इजाद कर रहे हैं। इसी कड़ी में प्लाज्मा थेरेपी ने उम्मीद जगायी है। दिल्ली सहित कई जगह इसके तहत इलाज चल भी रहा है। अब झारखंड में भी प्लाज्मा थेरेपी की इंट्री हो गई है। रांची के रिम्स में प्लाज्मा थेरेपी सेंटर का मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उद्घाटन किया। इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता, स्वास्थ्य सचिव डॉ. नितिन मदन कुलकर्णी सहित कई अधिकारी पदाधिकारी मौजूद रहे। 

मिथिलेश ठाकुर डोनेट करेंगे प्लाज्मा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ठीक हुए संक्रमित युवाओं से बल्ड डोनेट करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अब झारखंड में भी प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना से अति संक्रमित लोगों का इलाज होगा। आज से राज्य में प्लाज्मा थेरेपी सेंटर की शुरुआत हो रही है। कोरोना की इस जंग को हम सहभागिता से ही जीत सकते हैं। आपको बता दें कि पेयजल एंव स्वच्छता विभाग के मंत्री मिथिलेश ठाकुर भी कुछ दिन पहले कोरोना पॉजिटिव पाये गए थे। स्वस्थ्य होने पर उन्होंने कहा कि कोरोना मरीज को जरुरत पड़ी तो वो अपना प्लाज्मा डोनेट करेंगे। ये पहले मंत्री हैं जिन्होंने प्लाज्मा डोनेट करने की बात कही है।   

जानिये क्या है प्लाज्मा थेरेपी ?
अब सवाल है कि आखिर क्या है ये प्लाज्मा थेरैपी? कैसे होता है इसका इस्तेमाल? कैसे लिए जाते हैं प्लाज्मा? इन सब का जवाब फॉलोअप की टीम आपको देगी। असल में जब किसी इंसान को कोरोना वायरस का संक्रमण होता है, तो उसके खून में उस बीमारी से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनता है। और यह एंटीबॉडी इस बीमारी से लड़ने में मदद करता है। अब जो मरीज कोरोना को मात देकर ठीक हो जाते हैं और वो अपना ब्लड डोनेट करते हैं तो उसके खून से प्लाज्मा में मौजूद एंटीबॉडी को दूसरे मरीज में डालने पर कोरोना को मात देने में मदद मिलती है। प्लाज्मा लेने के दो तरीके हैं। पहला जिसमें सेंट्रिफ्यूज तकनीक से 180 मिलीलीटर से 220 मिलीलीटर तक प्लाज्मा पा सकते हैं। दूसरा एफ़्रेसिस मशीन या सेल सेपरेटर मशीन का उपयोग करके एक बार में 600 मिलीलीटर प्लाज्मा लिया जा सकता है। डॉक्टर्स के मुताबिक एक इंसान से लिए प्लाज्मा की मदद से दो लोगों का इलाज किया जा सकता है।