द फॉलोअप टीम, जमशेदपुर
तीरंदाजी के लिए ज़बरदस्त कौशल की दरकार होती है। एक बेहतरीन शूटर्स को लाजवाब एकाग्रता और मानसिक शक्ति के साथ बेहद कठिन परिस्थितियों में भी लक्ष्य को भेदना होता है, और एक आम इंसान के इस कौशल को निखारने और बढ़ावा देने वाला होता है कोच। वो कोच जो बताता और सिखाता है कि कैसे निशाना अचूक रखना है। मूल रूप से बिहार के सीवान के रहनेवाले टाटा आर्चरी अकादमी के मुख्य कोच धर्मेंद्र तिवारी भी उन्हीं में से एक कोच हैं। इनके कुशल मार्गदर्शन में कई खिलाड़ियों ने फर्श से अर्श तक का सफर तय किया है। यही वजह है कि अब धर्मेन्द्र तिवारी को प्रशिक्षकों के सबसे बड़े सम्मान द्रोणाचार्य अवॉर्ड से नवाजा जाएगा। राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों के लिए बनी कमिटी ने उनके नाम की घोषणा कर दी है और इसपर खेल विभाग की आधिकारिक मुहर लगने की औपचारिकता भर बाकी है।
1996 में टाटा आर्चरी अकादमी किया था ज्वाइन
एक युग था जब तीर और धनुष का इस्तेमाल शिकार और युद्ध के लिए किया जाता था, और फिर इसे इंग्लैंड में एक प्रतिस्पर्धी गतिविधि के रूप में विकसित किया गया। धर्मेंद्र मूल रूप से सीवान, बिहार के रहनेवाले हैं, लेकिन पिछले 4 दशक से भी ज्यादा वक्त से उनका परिवार लौह नगरी में रचा-बसा है। धर्मेंद्र तिवारी ने साल 1996 में टाटा आर्चरी अकादमी में बतौर कोच जॉइन किया था और वर्तमान में मुख्य कोच की भूमिका में हैं। वे टाटा स्टील में ही L5 रैंक के अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। धर्मेंद्र तिवारी 80 और 90 के दशक में राष्ट्रीय स्तर पर एक खिलाड़ी के रूप में भी रिकर्व और इंडियन स्पर्धा में अपनी पहचान दर्ज़ करा चुके हैं। धर्मेंद्र तिवारी ने 87-88 में जूनियर नेशनल गेम के दौरान 3 स्वर्ण पदक बटोरे थे।
2019 के द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए धर्मेन्द्र चयनित
प्रदेश को गौरवान्वित करने वाले धर्मेंद्र तिवारी झारखंड के तीसरे प्रशिक्षक हैं, जिन्हें द्रोणाचार्य पुरस्कार मिला है। इससे पहले के भी दोनों प्रशिक्षक टाटा आर्चरी के ही हैं। 2007 में संजीवा कुमार सिंह और 2013 में पूर्णिमा महतो को ये सम्मान मिल चुका है। अब 2019 के लिए धर्मेंद्र तिवारी का चयन हुआ है। वहीं इस पुरस्कार से हॉकी प्लेयर रह चुके झारखंड के नरेंद्र सिंह सैनी को भी 2013 में नवाजा जा चुका है। नरेंद्र सिंह सैनी वर्तमान में राज्य सरकार के सेंटर फॉर एक्सीलेंस में अपनी सेवा दे रहे हैं। इसके अलावा JSSPS में कार्यरत बॉक्सिंग कोच बीबी मोहंती को भी द्रोणाचार्य अवॉर्ड दिया जा चुका है।
धर्मेंद्र ने 8 ओलंपियन को दिलाई पहचान
धर्मेंद्र तिवारी के प्रशिक्षण में दीपिका कुमारी, डोला बनर्जी, रीना कुमारी, बी परिणीता, लक्ष्मी रानी मांझी, जयंत तालुकदार और अतानु ओलंपिक तक का सफर तय कर चुके हैं। इसके अलावा सब कुछ ठीक रहा तो उनकी शिष्या अंकिता भगत भी टोक्यो ओलंपिक में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी।