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काली पूजा पंडाल में नहीं होंगे श्रद्धालु तो छठ घाट पर कुल्ला करना वर्जित, ये रही पूरी गाइडलाईन

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द फॉलोअप टीम, रांची:

कोरोना काल चल रहा है, लेकिन दिवाली, काली पूजा और छठ भी है। पिछले साल भी लोगों ने कोरोना की वजह से पर्व ठीक से नहीं मनाया था। लोगों का रोजगार बंद था। अगर इस बार भी ऐसा ही हुआ तो लोगों की आर्थिक स्थिति बेहद ही खराब हो जाएगी। इसको ध्यान मे रखते हुए सरकार ने सावधानी के साथ त्यौहार मनाने की गाईडलाइन जारी कर दी है। आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी गाइडलाइन के तहत काली पूजा पंडाल में विशेष एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं। 

छोटा हो पंडाल 
गाइडलाइन के अनुसार काली पूजा पंडाल को छोटा बनाना है। साथ ही श्रद्धालुओं के बिना ही पूजा करने का निर्देश है। पंडालों में विशेष लाइटिंग नहीं करना है। वहीं छठ घाटों पर 18 वर्ष से कम और 65 वर्ष से ऊपर के लोगों को नहीं जाने को कहा गया है। आपदा प्रबंधन विभाग ने पानी के अंदर कूल्ला करने और थूकने से साफ मना किया है।

काली पूजा पंडाल की यह गाईडलाइन-
छोटा पंडाल हो।
पंडाल सभी दिशाओं से घिरा हो।
पंडाल किसी भी थीम पर न हो।
कोई विशेष लाइटिंग न हो।
तोरण द्वार नही बनाना है। 
पंडाल में सजावट पर रोक।
5 फीट से ऊंची मूर्ति ना हो 
लाउड स्पीकर का प्रयोग केवल पूजा के वक्त मंत्रोच्चारण के लिए होगा।
पंडाल मे गाना नही बजाना है।
किसी तरह के मेला का आयोजन नहीं होगा।

प्रसाद या भोग वितरण पर प्रतिबंध।
पूजा समिति लोगों को आमंत्रित नहीं कर सकेगी।

छठ के लिए यह गाईडलाइन

छठ पर्व को घर पर ही मनाने की करें कोशिश, लेकिन तालाब, नदी पर जाने से रोक नही
छठ घाटों पर मास्क लगाना अनिवार्य.
2 गज की दूरी का ध्यान रखना है।
जलाशयों में पानी के अंदर थूकने पर पाबंदी.
छठ घाट के किनारे किसी भी तरह का स्टॉल नही लगाना है।
सार्वजनिक स्थानों पर पटाखों को छोड़ने पर प्रतिबंध।
कोई भी सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं होगा।
18 वर्ष से कम और 65 वर्ष से ऊपर के लोगों को नहीं जाने की सलाह।