द फॉलोअप रांची
रांची-कोरोना संकट से उत्पन्न हुई रोजगार की समस्या को ध्यान में रख कर ग्रामीण विकास विभाग मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है। ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम का कहना है कि सरकार ने ‘’मिशन सक्षम एप’’ के जरिये वापस आये प्रवासी मजदूरी का डाटा तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि विभाग की कोशिश है कि प्रवासी मजदूरों की उनके स्किल के अनुसार रोजगार मुहैय्या कराया जाय।
करीब 8 लाख मजदूर झारखंड लौटे
लॉकडाउन के दौरान दूसरे राज्यों में फंसे झारखंड के करीब आठ लाख मजदूर वापस लौटे हैं। इनमें से ज्यादातर मजदूर सरकारी मदद के जरिए रेलवे, सड़क और हवाई मार्ग के रास्ते आए तो कुछ मजदूर ऐसे भी हैं जो एनजीओ की मदद और अपने सामर्थ्य से घर लौटे हैं।
5 लाख मजदूरों का डाटा तैयार
लॉकडाउन के कारण लाखों की संख्या में प्रवासी मजदूर राज्य में वापस लौटे हैं। सरकार चाहती है कि इन मजदूरों को इनके हुनर के हिसाब से रोजगार दिया जाये। ग्रामीण विकास विभाग ने मिशन सक्षम मोबाइल एप के जरिये इनके हुनर का सर्वे करवाया। इसके अंतर्गत 5 लाख मजदूरों का डाटा तैयार हुआ है। इसके जरिये सरकार उनकी पसंद का रोजगार उन्हें देगी।
स्किल्ड एंड अनस्किल्ड लेबर का अलग-अलग उपयोग
ग्रामीण विकास विभाग लगातार प्रवासी मजदूरों के लिए रोजगार उपलब्ध करवा रहा है। इस बीच कुशल और अकुशल समेत अन्य केटेगरी के मजदूरों को उनके हुनर के अनुसार रोजगार देने की योजना पर काम हो रहा है। अनस्किल्ड मजदूरों को मनरेगा के तहत कार्य उपल्ब्ध कराया जा रहा है।
सखी मंडल के जरिये आयेगी आर्थिक मजबूती
सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना आपदा से राहत के लिए राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत सीधे सखी मंडलों को भी आर्थिक मदद पहुंचा रही है। इसी कड़ी में अब तक 80 हजार सखी मंडलों को 120 करोड़ की राशि दी जा चुकी है। विभाग का दावा है कि इस राशि से 10 लाख परिवारों को लाभ मिला है।