द फॉलोअप, रांची
झारखंड में मनरेगा कर्मी अपनी पांच सूत्री मांगों को लेकर पिछले सोमवार से ही अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इस वजह से राज्य में मनरेगा के तहत कराए जा रहे कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वर्तमान में मनरेगा के तहत 4 लाख 84 हजार योजनाएं पूरे राज्य में चल रही हैं। इनके हड़ताल पर जाने स छह लाख से ज्यादा मनरेगा मजदूरों का रोजगार भी प्रभावित हो गया हैं। जिससे उन्हें काफी परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा हैं। हड़ताल पर जाने के पूर्व इस माह के पहले सप्ताह में ही तीन दिवसीय आंदोलन मनरेगा के कर्मियों ने किया था, ताकि सरकार का ध्यान उनकी ओर जाए और उनकी मांगों पर सुनवाई हो। लेकिन इस दिशा में किसी भी स्तर पर ठोस पहल नहीं होने से मनरेगा कर्मी अब अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। आकड़ों के अनुसार राज्य में वर्तमान समय में करीब 5000 मनरेगा कर्मी हैं ।
मंत्री आलमगीर आलम ने रोकना चाहा था हड़ताल
कोविड-19 के संक्रमण काल को देखते हुए मनरेगा कर्मियों से हड़ताल पर नहीं जाने की अपील ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने की थी। हालांकि झारखंड प्रदेश मनरेगा कर्मचारी संघ के प्रदेश महासचिव मो. इम्तियाज ने साफ कर दिया था कि जब तक सरकार की ओर से संघ के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता पर बुलाकर उनकी मांगों पर जल्द से जल्द लिखित तौर पर विचार नहीं किया जाता है, तब तक उनकी अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी।
मनरेगा कर्मियों की मुख्य मांग
झारखंड मनरेगा कर्मी के हड़ताल पर जाने का मुख्य कारण हैं, उनका स्थाई नहीं होना । झारखंड मनरेगा कर्मियों का कहना है कि पिछले करीब 12- 13 साल से वे लगातार अपनी सेवा दे रहे हैं, लेकिन नौकरी का कोई ठौर- ठिकाना नहीं है। मनरेगा कर्मियों का कहना है कि घटना-दुर्घटना होने पर भी उनके परिजनों को कोई लाभ नहीं मिलता। यहां तक कि कोविड-19 के संक्रमण काल में भी उनकी सुरक्षा पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है। उनका ना तो स्वास्थ्य बीमा है और ना ही जीवन बीमा।
सरकार ने की काम पर लौटने की अपील
इधर ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री आलमगीर आलम ने कहा है कि मनरेगाकर्मी हड़ताल काम पर लौट जाएं। सरकार उनकी मांगों पर संवेदनशील है। हर जरूरी मांग पर सरकार विचार करेगी। उन्होंने कहा कि इस बाबत मुख्यमंत्री से भी बात हुई है। उन्होंने कमेटी को भी यह हिदायत दी है कि उनकी वाजिब मांगों पर सरकार विचार करेगी। हड़ताल से मजदूरों को काम से वंचित होना पड़ेगा।
मजदूरों को नहीं मिल रहा है काम
मनरेगा कर्मियों की हड़ताल से बोकारो के चास प्रखंड के विभिन्न गांव में मजदूरों को रोजगार का संकट सता रहा है। कर्मियों के हड़ताल से अधिकतर मनरेगा मजदूर काम पर नहीं जा रहे हैं। चास प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में 9 हजार 973 मनरेगा मजदूर कार्यरत हैं। हड़ताल पर चले जाने के कारण मनरेगा योजना प्रभावित होने के साथ-साथ मजदूरों का रोजगार भी खत्म होता नजर आ रहा है। साथी ही बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत पौधारोपण का काम भी पूरी तरह प्रभावित हो गया है। कर्मियों की हड़ताल से चास प्रखंड में 25 करोड़ रुपये की योजना भी बंद हो सकती है।