द फॉलोअप टीम, रांची:
ई पास व्यवस्था के खिलाफ दायर याचिका पर गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। ये याचिका रंजन कुमार सिंह नाम के शख्स ने अपने वकील अनूप अग्रवाल के जरिए दाखिल की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि ई पास व्यवस्था लोगों की निजता का हनन है। कहा गया है कि लॉकडाउन में वैसे ही केवल जरूरी सेवा ही खुली है। कोई भी व्यक्ति बाहर निकलेगा तो जरूरी काम से ही निकलेगा। ऐसी स्थिति में ई पास व्यवस्था का औचित्य क्या रह जाता है।
बिना इंटरनेट के कैसे बनेगा ई पास
याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि लाखों लोग ग्रामीण इलाकों में रहते हैं। वहां इंटरनेट की सुविधा नहीं है। कई लोग वैसे हैं जिनके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है। साइबर कैफे में ताला लटका है। ये लोग ई पास कैसे बनवा पायेंगे। इन्हीं तर्कों को आधार बनाकर याचिकाकर्ता रंजन कुमार सिंह ने झारखंड में ई पास व्यवस्था को रद्द करने की मांग की है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की झारखंड इकाई ने भी प्रदेश में लागू ई पास व्यवस्था की तीखी आलोचना की है।
ई पास व्यवस्था काफी जनविरोधी है
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण की चेन को रोकने के लिए हेमंत सरकार द्वारा बरती कई पाबंदियां स्वागत योग्य है। ई पास की व्यवस्था को लेकर थोड़ी परेशानी है। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया का कहना है कि ई पास व्यवस्था की वजह से फल और सब्जी विक्रेता, दिहाड़ी मजदूर और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस पर विचार किया जाना चाहिए। पार्टी का कहना है कि ई पास व्यवस्था की वजह से रोजमर्या कि दिनचर्या प्रभावित हो रही है।
झारखंड में लागू है सख्त लॉकडाउन
गौरतलब है कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए राज्य की हेमंत सरकार ने स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह के तहत लॉकडाउन का एलान किया। अंतर्जिला बस सेवा पर रोक लगा दी गयी। निजी वाहन से यात्रा के लिए ई पास की व्यवस्था लागू की गयी। दो पहिया और चार पहिया वाहन इसके दायरे में आते हैं। ई पास नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई की जाती है। जुर्माना वसूला जाता है। ई पास केवल 3 घंटे के लिए ही जारी किया जाता है। इसके विरोध में आवाज उठती है।
ई पास व्यवस्था में दिखी कई खामियां
ई पास व्यवस्था में शुरुआत में कई खामियां भी दिखीं। पहले ही दिन ढाई लाख से ज्यादा ई पास निर्गत किया गया। फर्जी नाम और फोटो पर भी ई पास बन गया। कई बार सर्वर डाउन हुआ तो कई बार ई पास पोर्टल ही फेल हो गया। बीजेपी सहित तमाम विपक्षी पार्टियों ने ई पास व्यवस्था की खामियों पर सवाल उठाया। कई लोगों ने इसके औचित्य पर ही सवाल खड़ा किया।