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ई-पास की अनिवार्यता ने लॉकडाउन का बनाया मजाक, हलकान हुए रांची के लोग- आशा लकड़ा

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द फॉलोअप टीम, रांची: 
झारखंड में संपूर्ण लॉकडाउन के बीच ई-पास की अनिवार्यता का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अब रांची की मेयर आशा लकड़ा ने ई-पास की अनिवार्यता सहित इसके औचित्य पर सवाल उठाया है। मेयर आशा लकड़ा ने कहा कि संपूर्ण लॉकडाउन में ई-पास की अनिवार्यता ने राज्य सरकार का मजाक बना दिया है। ई-पास की अनिवार्यता अति आवश्यक कार्यों के लिए होना चाहिए था ना कि सबके लिए। 

जरूरी सेवा के लिए क्यों हो ई-पास प्रणाली
रांची की मेयर आशा लकड़ा ने कहा कि फल, सब्जी, राशन और दवा की खरीददारी के लिए भी ई-पास की अनिवार्यता समझ से परे वाली बात है। मेयर आशा लकड़ा ने ये बातें तब कहीं जब वो राज्य सरकार द्वारा घोषित संपूर्ण लॉकडाउन के पहले दिन शहर के अलग-अलग चौक चौराहों पर ई-पास को लेकर आम लोगों को हो रही परेशानियों का जायजा ले रही थीं। मेयर आशा लकड़ा ने नाराजगी जताई। 

लोगों को ई-पास की जानकारी भी नहीं थी
मेयर आशा लकड़ा ने कहा कि संपूर्ण लॉकडाउन के पहले दिन ई-पास नहीं होने पर शहर में कई दो पहिया और चार पहिया वाहन का चालान काटा गया। ई-पास की अनिवार्यता की वजह से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कुछ लोग दवा की पर्ची लेकर मेडिकल शॉप का चक्कर लगाते रहे और पुलिस उनसे ई-पास मांगती रही। कई लोगों को ई-पास का मतलब भी नहीं पता था। बकौल आशा लकड़ा, कई लोगों ने शिकायत की है कि उनके पास स्मार्टफोन है लेकिन ई-पास से संबंधित वेबसाइट नहीं खुल रहा है। कुछ लोगों का कहना था कि सरकार की ये कैसी व्यवस्था है कि फल, सब्जी, दवा और राशन के लिए बार-बार ई-पास लेना होगा। 

ई-पास को लेकर परेशान करना ठीक नहीं
रांची की मेयर आशा लकड़ा ने कहा कि लॉकडाउन में इंटरनेट कैफे बंद है। लोगों के पास स्मार्टफोन है लेकिन उन्हें पता नहीं है कि ई-पास कैसे जनरेट होगा। कोरोना संक्रमण की आशंका से लोग पहले ही भयभीत हैं। आशा लकड़ा ने कहा कि लोग समझते हैं कि लॉकडाउन का मतलब क्या होता है। संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए लॉकडाउन लगाया गया, ये अच्छी बात है लेकिन ई-पास के लिए लोगों को परेशान करना कहीं से भी मानवीय नहीं है। ये अनुचित फैसला है।