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नियुक्ति वर्ष में नहीं मिल पाएगी झारखंडी युवाओं को नौकरी! अधूरी रह गई रोजगार की आस 

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द फॉलोअप टीम, रांची: 

झारखंड के बेरोजगार युवाओं के लिए एक बुरी खबर है।  वैसे बेरोजगार युवाओं के लिए यह दुःख भरी खबर है जो सरकार द्वारा घोषित नियुक्ति वर्ष में नौकरी की आस लगाए बैठे थे। इस इंतजार में बैठे थे कि कोरोना से उबरने के बाद शायद उन्हें मौका मिलेगा। बुरी खबर इसलिए भी है क्योंकि मौजूदा स्थिति है उसे देखकर लग रहा है कि ये नियुक्ति वर्ष भी बिना नियुक्ति के ही गुजर जाएगी।

कभी भी हो सकता है तारीखों का ऐलान
ऐसा इसलिए क्योंकि झारखंड में कभी भी पंचायत चुनाव की घोषणा हो सकती है और पंचायत चुनाव की घोषणा के साथ ही राज्य में आचार संहिता लागू हो जाएगी। ऐसे में नियुक्ति का रास्ता बंद हो जायेगा। पंचायत चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग की तैयारियां अंतिम चरण में है। सभी जिलों के एसपी और डीसी को तैयार रहने को कहा गया है क्योंकि चुनाव की घोषणा कभी भी हो सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि चुनाव होंगे तो दिसंबर तक राज्य में आचार संहिता ही लागू रहेगा ऐसा में नियुक्ति वर्ष तो पार हो जायेगा। 

हर उपचुनाव से पहले किया गया नया वादा
सरकार में शामिल मंत्री भले ही कह रहे हों कि चुनाव भी होने और युवाओं को नौकरी दी जाएगी लेकिन वो भूल रहे हैं कि हर उपचुनाव से पहले भी यही कहा गया था। बात चाहें दुमका उपचुनाव का हो या बेरमो और मधुपुर का उपचुनाव। यही वजह है कि राज्य के युवा यह कहने को मजबूर हो गए हैं कि खुद की नियुक्ति का समय आता है तो नेता चूकते नहीं और युवाओं को नौकरी का लॉलीपॉप दिखाकर बेवकूफ बनाते है।  

2019 में राज्य में बनी थी हेमंत सरकार
झारखंड में दिसंबर 2019 में हेमंत सोरेन की सरकार बनी है। सरकार बनने से पहले जब हेमंत सोरेन चुनावी मैदान में थे तब उन्होंने जुबानी तौर पर हर साल पांच लाख नौकरी की घोषणा किया था। साथ ही चुनावी घोषणा पत्र में इस बात का जिक्र था कि सभी पेंडिंग वेकेंसी को पूरा किया जायेगा और सभी अनुबंध कर्मियों को स्थायी किया जायेगा। यही वजह है कि चुनाव में पारा शिक्षक, सहायक पुलिसकर्मी, पंचायत सचिव के अभ्यर्थी, टेट पास अभ्यर्थी के साथ-साथ वैसे सभी युवा हेमंत सोरेन के साथ खड़े हो गए जिन्हे लगा कि हेमंत मुख्यमंत्री बनेंगे तो उनके मन मुताबिक इंसाफ मिलेगा। लेकिन हुआ क्या। आज सब सड़क पर हैं. कोई मोरहाबादी मैदान में आंदोलन कर रहा है. कोई ट्विटर पर सरकार तक बात पहुंचाने में लगा हुआ है तो कोई आंदोलन की रणनीति बना रहा है। 

हर साल पांच लाख नौकरी का वादा था
पहले चुनावी मैदान में कहा गया कि हर साल पांच लाख युवाओं को नौकरी दी जाएगी। उसके बाद सरकार बनने के एक साल बाद नियुक्ति वर्ष घोषित किया गया। दुमका उपचुनाव में कहा गया कि फ़रवरी 2021 तक 15 हजार युवाओं को नौकरी दी जाएगी। उसके बाद ट्विटर पर जब युवाओं ने रोजगार दो का जोर लगाया तो सभी विभागों को निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ट्वीट किया और कहा कि जल्द ही होगी नियुक्ति। 

21 अक्टूबर को मुख्यमंत्री ने छोड़ा शिगूफा
21 अक्टूबर 2021 को बैठक कर मुख्यमंत्री ने सभी विभाग के पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वो जल्द सभी विसंगतियों को दूर कर खाली पड़े पदों के लिए वेकेंसी निकालें। इसके अलावे सैकड़ों बार मुख्यमंत्री और मंत्रियों की ओर से इस साल को नियुक्ति का साल घोषित किया गया और युवाओं को आश्वासन दिया गया। सरकार में शामिल लोगों ने जितनी बार नियुक्ति वर्ष और नौकरी का जिक्र किया है अगर उतनी भी नियुक्ति हो जाती तो शायद झारखंड में कोई शिक्षित युवा बेरोजगार नहीं होगा। हालांकि इस घोर निराशा में आशा की किरण यही है कि सरकार नियुक्ति वर्ष को दिसंबर से खींचकर अप्रैल 2022 तक ले गई है। क्योंकि सरकार के मंत्री ने कहा है कि ये नियुक्ति वर्ष फाइनेंसियल ईयर के अनुसार कहा गया था।