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झारखंड के 3 युवकों का केरल में कत्ल, क्वारंटाइन सेंटर से टहलने के लिए निकलने पर हुआ था विवाद

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द फॉलोअप टीम, पलामू
केरल में झारखंड के 3 मजदूरों की हत्या कर दी गई है। तीनों पलामू जिले के पांडू के रहनेवाले थे। बताया जा रहा है कि 20 रोज पहले ही तीनों युवक पलामू से केरल काम करने के सिलसिले में गए थे। वहां पहुंचते ही तीनों को क्वारंटाइन कर दिया गया था। तीनों क्वारंटाइन सेंटर से चोरी छिपे टहलने के निकले थे। इसी दौरान आस पड़ोस के लोगों ने उन्हें देख लिया। इसी को लेकर इनलोगों की स्थानीय लोगों के साथ बकझक होने लगी और फिर बात इतनी बढ़ गई कि इनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। 

लॉकडाउन में केरल से लौटे थे घर
लॉकडाउन के दौरान तीनों युवक केरल से वापस अपने गांव पलामू के भटवलिया आए थे। यहां कई दिन बिताने के बाद जब काम नहीं मिला तो अनलॉक होने पर तीनों अब से 20 रोज पहले वापस केरल लौट गए। दरअसल जिस फैक्ट्री में 20 साल के कन्हाई विश्वकर्मा, 22 साल के अरविंद राम और 20 साल के हरिओम काम कर रहे थे। वहां से फिर से इन्हें बुलाया जा रहा था। चूंकि गाड़ी चल नहीं रही थी लिहाजा पांडू के गुआसरई गांव का ठेकेदार अर्जुन यादव गाड़ी की व्यवस्था कर इन्हें केरल ले गया था। लेकिन काम ज्वाइन करने से पहले ही तीनों की हत्या कर दी गई। घरवालों को जैसे ही ये खबर मिली, चीख पुकार मच गई। किसी को भी यकीन नहीं आ रहा है कि अब उनके लाडले इस दुनिया में नहीं रहे। अभी तक तीनों के शवों को नहीं ला याजा सका है। प्रशासनिक स्तर पर इसकी प्रक्रिया चल रही है। 

लॉकडाउन में पलामू लौटे 50 हजार मजदूर
बताया जा रहा है कि लॉकडाउन के दौरान पलामू में 50 हजार से ज्यादा प्रवासी मजदूर वापस अपने-अपने घरों को लौटे हैं। इनमें से कई तो वापस दूसरे राज्यों में काम पर   लौचलौ ललौट चुके हैं,लेकिन अब भी कई लोग हैं जो यहीं हैं और काम की तलाश कर रहे हैं। लेकिन खबरों की माने तो ज्यादातर मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है जिससे वो परेशान हैं और घर की माली हालत भी खराब हो गई है। सरकार को जरुरत है इस पर ध्यान देने की। प्रवासीमजदूरों को रोजगार दिलाने की ताकि उन्हें फिर से शहर का रूख नहीं करना पड़े। अगर भटवलिया के ये तीन युवक भी काम की तलाश में नहीं जाते तो शायद वो अपने परिवार के बीच सही सलामत होते।