द फॉलोअप टीम, रांची
झारखंड में कोरोनाकाल के करीब छह महीने बीतने वाले हैं। इन छह महीनों में कोरोना मरीजों के लिए सरकार की ओर से तैयार की गई आधारभूत संरचना का हाल ये है कि राज्य में 350 करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद सिर्फ 450 आइसीयू बेड ही हैं। राजधानी के 3500 एक्टिव मरीजों के लिए मात्र 42 आईसीयू सरकारी बेड हैं।
निजी अस्पतालों में आईसीयू बेड फुल
उधर, राजधानी के निजी अस्पतालों में सभी आईसीयू बेड फुल हो चुके हैं। जानकारी के मुताबिक, आईसीयू बेड के लिए नौ हजार रु. फिक्स हैं, जिसे गरीब मरीज देने में असमर्थ हैं, जबकि इनमें आठ से 10 फीसदी को आईसीयू बेड चाहिए। टास्क फोर्स के सदस्य भी कहते हैं कि जल्द आईसीयू व आक्सीजन वाले बेड नहीं बढ़े तो संक्रमित लक्षण वाले मरीजों की बढ़ती संख्या मुसीबत खड़ी कर देगी। झारखंड में अबतक 72,673 संक्रमित पाये गए हैं। जिसमें में से 58,531 ठीक हो चुके हैं, जबकि 670 लोगों की मौत हो चुकी है। सरकार इसको लेकर चिंतित भी है।
सदन में कोरोना पर एक घंटे की बहस
इस मामले में फैसला लिया गया है कि झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को सदन में कोरोना को लेकर एक घंटे की विशेष बहस होगी। बहस के बीच सत्तापक्ष और विपक्ष मिलकर झारखंड के लोगों को कोरोना से राहत देने के रास्ते तलाशेंगे।