द फॉलोअप टीम, रांची
पिछले दिनों द फॉलोअप ने अपने पोर्टल पर ये खबर बनाई थी कि झारखंड कांग्रेस में ऑल इज नॉट वेल है। अब ये बातें साबित भी हो रही है। क्योंकि खबर है कि झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सह प्रभारी एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव उमंग सिंघार बुधवार को नई दिल्ली से रांची इसी विवाद को सुलझाने के लिए पहुंचे हैं। खबरों की माने तो लगातार विधायकों के नाराज होने की बात और मीडिया में मुखर होकर अपनी बात रखने को लेकर आलाकमान गंभीर है। आलाकमान ने ही उमंग सिंघार को झारखंड कांग्रेस में चल रहे कलह पर विराम के लिए भेजा है। चार दिनों के दौरे पर आए उमंग सिंघार कांग्रेस के मंत्रियों, बगावत पर उतारू विधायकों और कुछ सीनियर नेताओं से इस सिलसिले में बात करेंगे। और जो बातें निकलकर सामने आएगी उसे वो रिपोर्ट बनाकर दिल्ली में आलाकमान को सौंपेंगे।
चर्चा कर होगा परेशानी का समाधान-सिंगार
हालांकि एयरपोर्ट पर उमंग सिंघार से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पार्टी में सब कुछ ठीक ठीक चल रहा है। वैसे उन्होंने ये भी कहा कि अगर कोई परेशानी है तो संगठन के पदाधिकारियों एवं विधायकों से चर्चा कर इसे दूर कर लिया जाएगा। इस दौरान उन्होंने हेमंत सरकार की भी जमकर तारीफ की और कहा कि सीएम हेमंत कोरोना काल में बेहद अच्छा काम कर रहे हैं।
कैसे सामने आया विवाद ?
दरअसल पिछले दिनों खबर आई थी कि झारखंड कांग्रेस के 9 विधायक प्रदेश स्तर के बड़े नेता और सरकार में अपनी हिस्सेदारी नहीं लने से नाराज है। इस बात को लेकर धीरज साहू के नेतृत्व में विधायक इरफान अंसारी, उमाशंकर अकेला और राजेश कच्छप दिल्ली में आलाकमान से शिकायत करने भी गए थे। दो दिनों तक तीनों दिल्ली में रहे। इस दौरान उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता अहमद पटेल से मुलाकात भी की। उनकी कोशिश सोनिया गंधी और राहुल गांधी से मिलने की थी लेकिन समय नहीं मिलने के कारण दोनों इनसे अपनी बात रखकर लौट आए। लौटने के बाद इरफान अंसारी और बरही विधायक उमाशंकर अकेला ने मीडिया में बयान देकर ये जाहिर भी किया था कि अब पानी सिर के ऊपर निकल चुका है।
ये है नाराजगी की वजह
इन विधायकों का कहना है कि वे सरकार में शामिल हैं, लेकिन क्षेत्र में चल रहे विकास योजनाओं में उनके सुझाव की अनदेखी की जा रही है। जबकि कुछ विधायकों की इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि जिले-प्रखंडों में उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, अनुमंडल पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी समेत अन्य अधिकारियों की नियुक्ति में उनकी पैरवी भी को भी दरकिनार कर दिया जा रहा है। ऐसे विधायकों की कांग्रेस कोटे से सरकार में शामिल चारों मंत्रियों डॉ. रामेश्वर उरांव, आलमगीर आलम, बन्ना गुप्ता और बादल से भी खासी नाराजगी है। कांग्रेस विधायकों का कहना है कि कम से कम पार्टी कोटे से सरकार में शामिल मंत्रियों द्वारा उनके क्षेत्र में विशेष ध्यान देना चाहिए।कांग्रेस विधायकों की नाराजगी सरकार के कामकाज के अलावा पार्टी के प्रदेश प्रभारी आरपी सिंह से भी हैं। इन विधायकों को ऐसा महसूस हो रहा है कि कांग्रेस प्रभारी ही सरकार और मंत्रियों पर दबाव बनाने की उनकी हर कोशिश को विफल कर दे रहे हैं।
इरफान और उमाशंकर अकेला को मंत्रिपद की लालसा
जामताड़ा विधायक इरफान अंसारी और बरही विधायक उमासंकर अकेला मंत्रिपद के लिए बेकरार दिख रहे हैं। इरफान को लगता है कि उनकी पढ़ाई लिखायी अच्छी है और दूसरी बार चुनाव जीतकर आए हैं, लिहाजा उन्हें मंत्री पद मिलना चाहिए लेकिन शिकायत ये है कि उनकी जगह कम पढ़ लिखे बन्ना गुप्ता को मंत्री बनाकर तरजीह दे दी गई। ये बातें लगातार इरफान को खटक रही है। उमाशंकर अकेला कहते हैं कि झारखंड में वो यादवों के बड़े नेता हैं और सरकार में यादवों को कोई प्रतिनिधित्व नहीं है, इसलिए उन्हें सरकार में जगह मिलनी चाहिए। दरअसल इस वक्त मंत्री पद की कवायद इसलिए भी चल रही है कि क्योंकि एक मंत्री का पद खाली है और इन विधायकों को लगता है कि अगर ये आक्रामक रहेंगे तो फिर इनकी बात बन सकती है। लेकिन प्रदेश अध्यक्ष सहित दूसरे गुट के नेता इसे अनुशासनहीनता के दौर पर देख रहे हैं। ऐसे में इनपर कार्रवाई की गाज भी गिर सकती है।
सरकार की सेहत पर कितना होगा असर
झारखंड में जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी महागठबंधन की गठबंधन सरकार है। विधानसभा की मौजूदा स्थिति को देखें तो झारखंड मुक्ति मोर्चा के 30 विधायक हैं। कांग्रेस के 16 और आरजेडी के एक विधायक हैं। बीजेपी के खाते में 25 सीटें हैं। 81 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 42 है। हेमंत सोरेन के नेतृत्व में बनी महागठबंधन सरकार को फिलहाल कोई संकट नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि कांग्रेस विधायकों की नाराजगी से स्थिति बिगड़ सकती है। चूंकि ये संख्या 9 बतायी जा रही है। लिहाजा संकट और बड़ा है। ऐसे में इसपर जल्द काबू नहीं पाया गया तो बीजेपी इसका फायदा उठाने की जरुर कोशिश करेगी। बीजेपी ने ऐसा गोवा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और अब राजस्थान में कर भी चुकी है।