द फॉलोअप टीम, रांची:
झारखंड में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अधिनियम (NREGA) का बुरा हाल है। सूचना मिली है कि मनरेगा योजना झारखंड में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग से आने वाले श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने में बुरी तरह से नाकाम रहा है। कोडरमा, गुमला, लोहरदगा, गढ़वा, दुमका, लातेहार और खूंटी जिला में एससी-एसटी समुदाय को मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराने का प्रतिशत माइनस में चला गया है जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
किस लिये लाई गई थी मनरेगा योजना
गौरतलब है कि ग्रामीण विकास विभाग ने मजदूरों, महिलाओं और एससी-एसटी मजदूरों को ज्यादा काम उपलब्ध कराने और नई परिसंपत्तियों का तेजी से विकास करने के लिए मनरेगा विकास अभियान की शुरुआत नवंबर में की थी। यदि एससी-एसटी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने की स्थिति पर नजर डालें तो स्थिति काफी खराब है। पूरे आंकड़े के साथ बताना सही है।

संस्था ने बीते 1 महीने का आंकड़ा पेश किया
आंकड़ों के मुताबिक बीते 1 माह में पूरे राज्य में 7 करोड़ 71 लाख 30 हजार 370 मानव दिवस का सृजन हुआ। इसमें एससी-एसटी को 2 करोड़ 45 लाख 62 हजार 02 मानव दिवस रहा जो महज 31 फीसदी के आसपास ही है। अभियान के दौरान इसका इप्रूवमेंट काफी खराब रहा। रांची, पलामू, पश्चिम सिंहभूम जिलों में भी स्थिति काफी बुरी है।
केंद्रीय ग्रामीण विकास सचिव
गौरतलब है कि हाल ही में रांची आये केंद्रीय ग्रामीण विकास सचिव एनएन सिन्हा ने इसकी समीक्षा की थी। उन्होंने मनरेगा योजना से एससी-एसटी समुदाय को कम रोजगार उपलब्ध कराये जाने पर चिंता व्यक्त की थी। केंद्रीय सचिव ने इसमें सुधार लाने का भी निर्देश दिया था। ग्रामीण विकास विभाग सभी जिलों को निर्देश दे रहा है कि योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के साथ-साथ अधिक से अधिक महिलाओं और एससी-एससी समुदाय को रोजगार उपलब्ध करवाना सुनिश्चित करें।
रोजगार के सरकारी दावों की हकीकत
बता दें कि कोरोना की पहली लहर में जब लॉकडाउन लगा तो तकरीबन 8 लाख प्रवासी श्रमिक झारखंड लौटे। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि ना केवल श्रमिकों को वापस लाया गया बल्कि रोजगार भी उपलब्ध करवाया गया। वित्त सह खाद्य मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव ने बार-बार कहा कि ग्रामीण इलाकों में लोगों को मनरेगा के तहत पर्याप्त रोजगार उपलब्ध करवाया गया है। इन दावों के बीच मनरेगा को लेकर सामने आया नया आंकड़ा हकीकत बताता है। इस पर सोचने की जरूरत है।