द फॉलोअप टीम, डेस्क:
कर्नाटक का भगीरथ कहे जाने वाले भारत रत्न सर विश्वेश्वरय्या का आज जन्मदिन है। आज यानि 15 सितंबर को इंजीनियर्स डे, सर विश्वेश्वरय्या के जन्मदिन के मौक़े पर ही मनाया जाता है। सर विश्वेश्वरय्या का पूरा नाम सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या था। वो मैसूर के 19वें दीवान थे।

भारत के महान अभियंताओं में थे शुमार
मैसूर के दीवान के तौर पर उनका कार्यकाल 1912 से 1918 तक महज़ 6 सालों का ही रहा। उन्हें न सिर्फ़ 1955 में भारत रत्न की उपाधि से सम्मानित किया गया बल्कि सार्वजनिक जीवन में योगदान के लिए किंग जॉर्ज पंचम ने उन्हें ब्रिटिश इंडियन एम्पायर के नाइट कमांडर के सम्मान से भी नवाज़ा था। भारत के सबसे महत्वपूर्ण बांधों में से एक कर्नाटक के मांड्या ज़िले में बने कृष्ण-राजसागर बांध के वो प्रमुख स्तम्भ माने जाते हैं।
छोटी उम्र में ही हो गया था पिता का निधन
सर विश्वेश्वरय्या जब 12 साल के ही थे तो उनके पिता का देहांत हो गया। उनकी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई चिकबल्लापुर में हुई जहां से आगे की पढ़ाई के लिए वे बैंगलोर चले गए और बीए की डिग्री हासिल की। इसके बाद पुणे के कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग में भी दाखिला लिया और आगे की अपनी पढ़ाई पूरी की।

दक्षिण भारत में विश्वेश्वरय्या का अद्भुत योगदान।
दक्षिण भारत में कर्णाटक के मैसूर को विकशित और समृद्धशाली बनाने में उनकी अहम भूमिका रही है। यह उनकी अथक कोशिशों का ही नतीजा है की कृष्णराज सागर बांध, भद्रावती आयरन एंड स्टील वर्क्स, मैसूर संदल ऑयल एंड सोप फ़ैक्टरी, मैसूर विश्वविद्यालय, बैंक ऑफ़ मैसूर जैसे कई संसथान आज दक्षिण भारत में मौजूद हैं और दक्षिण का लगातार शोभा बढ़ा रहे हैं।
और रेल के सफर का वो किस्सा !
उनसे जुड़ा एक और क़िस्सा काफ़ी मशहूर है। ब्रिटिश भारत में एक रेलगाड़ी चली जा रही थी जिसमें ज़्यादातर अंग्रेज़ सवार थे। एक डिब्बे में एक भारतीय मुसाफ़िर गंभीर मुद्रा में बैठा था। सांवले रंग और मंझले कद का वो मुसाफ़िर सादे कपड़ों में था और वहां बैठे अंग्रेज़ उसे मूर्ख और अनपढ़ समझकर मज़ाक उड़ा रहे थे, पर वो किसी पर ध्यान नहीं दे रहा था। अचानक उस व्यक्ति ने उठकर गाड़ी की ज़ंजीर खींच दी। तेज़ रफ्तार दौड़ती ट्रेन कुछ ही पलों में रुक गई। सभी यात्री चेन खींचने वाले को भला-बुरा कहने लगे। थोड़ी देर में गार्ड आ गया और सवाल किया कि ज़ंजीर किसने खींची।
उस व्यक्ति ने उत्तर दिया, ''मैंने''.' वजह पूछी तो उन्होंने बताया, ''मेरा अंदाज़ा है कि यहां से लगभग कुछ दूरी पर रेल की पटरी उखड़ी हुई है।''
गार्ड ने पूछा, ''आपको कैसे पता चला?'' वो बोले, ''गाड़ी की स्वाभाविक गति में अंतर आया है और आवाज़ से मुझे ख़तरे का आभास हो रहा है।''
गार्ड उन्हें लेकर जब कुछ दूर पहुंचा तो देखकर दंग रह गया कि वास्तव में एक जगह से रेल की पटरी के जोड़ खुले हुए हैं और सब नट-बोल्ट अलग बिखरे पड़े हैं।
पीएम मोदी ट्वीट कर महान विभूति को किया याद
बहरहाल, आज अभियंता दिवस पर सर विश्वेश्वरय्या को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने याद करते ट्वीट किया है। सभी मेहनती इंजीनियरों को #EngineersDay की बधाई. हमारी धरती को बेहतर और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए उन्हें धन्यवाद देने के लिए शब्द काफ़ी नहीं हैं। मैं एम. विश्वेश्वरैया को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। सर विश्वेश्वरय्या को याद करते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ट्वीट किया है।
Greetings on #EngineersDay to all hardworking engineers. No words are enough to thank them for their pivotal role in making our planet better and technologically advanced. I pay homage to the remarkable Shri M. Visvesvaraya on his birth anniversary and recall his accomplishments.
— Narendra Modi (@narendramodi) September 15, 2021