प्रत्येक जलमीनार के निर्माण पर लगभग 4.50 लाख रुपये की लागत आई थी। शुरुआत में ग्रामीणों को इसका लाभ मिला, लेकिन वर्तमान में कुल 435 में से करीब 350 जलमीनारें पूरी तरह खराब पड़ी हैं। जलमीनारों के बंद होने से सबसे बड़ा झटका क्षेत्र के गरीब और आदिवासी परिवार