राजमहल के पहाड़ियों को यदि पता होता कि सिराजुद्दौला और उसके साथियों की लड़खाड़ती और थकी चाल को संभालने से उनकी आने वाली पीढ़ी की आज़ादी बहाल रहती तो संभव था कि उनका व्यवहार कुछ और होता। सत्रहवीं सदी के मध्य में देश के हालात क्या थे, उन्हें नहीं पता था।उन्हें ज