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चुनाव आयोग की निष्पक्षता और साख पर सवाल, नेता प्रतिपक्ष के साथ भेदभाव लोकतंत्र के लिए खतरनाक : कैलाश यादव

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रांची 
राजद के राष्ट्रीय महासचिव सह मीडिया प्रभारी कैलाश यादव ने आज एक प्रेस बयान में चुनाव आयोग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से आयोग की निष्पक्षता संदिग्ध रही है, जो भारत जैसे मजबूत लोकतंत्र के लिए अत्यंत चिंताजनक है।
उन्होंने 2024 के लोकसभा और हरियाणा-महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के दौरान वोटर लिस्ट संशोधन से जुड़ी गड़बड़ियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि कई राजनीतिक दलों ने इस पर आपत्ति जताई थी और लिखित रूप से प्रश्न भी उठाए थे, लेकिन आयोग ने संतोषजनक उत्तर नहीं दिया। यादव के अनुसार, इस मुद्दे पर कई याचिकाएं न्यायालय में लंबित हैं, जो दर्शाता है कि चुनाव आयोग पर भरोसे की कमी बढ़ रही है।


SIR प्रक्रिया पर उठे सवाल
कैलाश यादव ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले आयोग द्वारा लागू किए गए विशेष मतदान परीक्षण (SIR) को लेकर भी आशंका जताई। उन्होंने कहा कि इतनी कम समय सीमा में ग्रामीण इलाकों में SIR कराना अव्यावहारिक है, खासकर जब अधिकांश मजदूर मानसून के कारण राज्य से बाहर काम पर गए हुए हैं। आयोग द्वारा मांगे जा रहे जटिल दस्तावेज और प्रक्रिया की जटिलता मतदाता अधिकारों को बाधित कर सकती है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि मताधिकार को सरल और सम्मानजनक तरीके से उपलब्ध कराना चुनाव आयोग का संवैधानिक दायित्व है, न कि उसे और जटिल बनाना। SIR प्रक्रिया को लेकर उठते सवाल आयोग की निष्पक्षता पर गहरी चिंता उत्पन्न करते हैं।


नेता प्रतिपक्ष का सम्मान भी जरूरी
कैलाश यादव ने कहा कि भारतीय संविधान, जिसे बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने तैयार किया, स्पष्ट रूप से नेता सदन और नेता प्रतिपक्ष को समान अधिकार और सम्मान देने की बात करता है। लेकिन विगत वर्षों में भाजपा शासन के दौरान नेता प्रतिपक्ष की आवाज को दबाया गया है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने सत्तापक्ष से अपील की कि विपक्ष की बात सुनी जाए और लोकतांत्रिक संस्थाओं में समान व्यवहार किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि संसद और विधानसभाओं में स्पीकर और राष्ट्रपति जैसे पद केवल शोभा के लिए नहीं हैं, बल्कि उनका संवैधानिक कर्तव्य न्यायपूर्ण संतुलन बनाए रखना है।
राजद की ओर से यह स्पष्ट मांग की गई कि केंद्र और राज्य की सरकारें विपक्ष के साथ भेदभाव न करें, लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करें और चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखें।

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