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स्थापना दिवस पर खास :  5 जुलाई 1997 का दिन, एक डिनर, एक फोन कॉल और RJD का जन्म

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व्यंकटेश पांडेय 

देश की राजनीति में 90 का दशक खासा उथल।पुथल भरा रहा। लड़ाई मंडल बनाम कमंडल की हो चली थी। हिन्दी पट्टी से कांग्रेस का दबदबा कम होने लगा था। हालांकि साल 1996।98 के दौरान ही तीन प्रधानमंत्री बदल गए। देश में उदारीकरण लाने वाले पीवी नरसिम्हा राव की सरकार के बाद 13 दिन के लिए अटल बिहारी वाजपेयी भी देश के प्रधानमंत्री बने। 

इसी दौरान पहली बार चारा घोटाला सुर्खियों में आया। जिसने बिहार समेत देश भर की सियासत में हलफा मचा दिया। उस दौरान लालू प्रसाद बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष थे। वहीं संयुक्त मोर्चा की सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे एस।आर बोम्मई पर लगे हवाला के आरोपों के बाद लालू प्रसाद राष्ट्रीय स्तर पर भी खासे सक्रिय हो गए थे।

देश की सियासत करवट ले रही थी और कांग्रेस के अचानक केंद्र की एच डी देवगौड़ा सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद ,राजनीतिक समीकरण को नए सिरे से बिठाने की कोशिशें जारी थीं। इधर बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद की लोकप्रियता अपने शिखर पर थी, जिसका गवाह साल 1995 का विधानसभा चुनाव भी है। इस चुनाव में जनता दल को 324 में से 167 सीटों पर जीत मिली थी। जिसे लालू प्रसाद के राजनीतिक करियर का हाई प्वाइंट कहना अतिशयोक्ति न होगा। 

साल 1995 के चुनाव में मिली जीत की खुमारी अभी उतरी भी न थी कि चारा घोटाले का मामला पेंचीदा होता जा रहा  था। ऐसे में लालू प्रसाद भी चाहते थे कि पटना के बाद अब दिल्ली में भी अपनी धमक हो लेकिन सबकुछ इतना आसान नहीं था। उस दौर के पीएम रहे देवेगौड़ा ने लालू प्रसाद का साथ नहीं दिया और देखते ही देखते पीएम बदल गए। अगले पीएम बने इंद्र कुमार गुजराल। 

इंद्र कुमार गुजराल के पीएम बनने से लालू प्रसाद को थोड़ी राहत तो जरूर मिली, लेकिन परेशानियां भी बढ़ती जा रही थीं। दरअसल, ये 1997 का साल था, जनता दल में बदलाव की कोशिशें होने लगीं थीं। लालू प्रसाद पर लगातार इस बात का दबाव बन रहा था कि वो पार्टी की कमान और मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ दें, लेकिन प्रसाद पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ने को तैयार नहीं थे, लिहाजा उन्होंने पार्टी अध्यक्ष का चुनाव लड़ने के लिए पर्चा भर दिया, लेकिन सामने अपने प्रतिद्वंद्वी का नाम देख कर वे चौंक गए, क्योंकि वो कोई और नहीं बल्कि शरद यादव थे। 


बिहार के जानेमाने पत्रकार 'संकर्षण ठाकुर' ने अपनी किताब बंधु बिहारी में भी इस वाकये का विस्तार से जिक्र किया है। वो लिखते हैं कि चार जुलाई को तत्कालीन प्रधानमंत्री आईके गुजराल ने अपने घर पर सभी सहयोगी दलों के नेताओं को खाने पर बुलाया था।लालू प्रसाद भी इस पार्टी में शामिल हुए थे। पार्टी में ही लालू प्रसाद ने पीएम गुजराल से कहा कि वे शरद यादव से कहें कि वे अध्यक्षी का चुनाव न लड़ें। लांकि गुजराल ने अपनी ओर से ऐसी कोई बात आगे नहीं बढ़ाई। 

लालू प्रसाद अब तक समझ चुके थे कि माहौल उनके पक्ष में नहीं है, लिहाजा वो अगली सुबह यानी 5 जुलाई को जनता दल को दो धड़े में बांट देते हैं।जनता दल चूंकि स्थापित नाम और दल था तो लालू प्रसाद के सामने नाम और पहचान का भी संकट आन पड़ा था। सबकुछ जल्दी में होना था और हो भी रहा था। तभी लालू प्रसाद फोन करते हैं एक ऐसे शख्स को जिन्हें समाजवादी धड़े के धुरंधर के तौर पर जाना जाता था। जिन्हें वे ही कभी देवेगौड़ा के कहने पर दल से बाहर का रास्ता दिखा चुके थे। उस शख्स का नाम था रामकृष्ण हेगड़े। कर्नाटक के रामकृष्ण हेगड़े। तो समझिए कि बिहार और हिन्दी पट्टी में आज एक सक्रिय दल को नाम और पहचान कर्नाटक के एक राजनेता ने दी। तो वही दल आज 28 साल का हो चुका है। 

1997 के मध्य तक चारा घोटाले का मामला तूल पकड़ने लगता है।  लालू प्रसाद को मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ता है। प्रदेश की कमान राबड़ी देवी के हाथों सौंपकर वे कोर्ट।कचहरी के चक्कर काटने लगते हैं। अगले विधानसभा चुनाव (यानी कि साल 2000) में राजद फिर से सरकार बनाने में कामयाब हो जाती है, लेकिन गठबंधन में।  धीरे।धीरे लालू की पकड़ ढीली होने लगती है। साल 2005 जब दो बार चुनाव हुए। तब भी लालू प्रसाद और राजद का प्रभाव और सीटें बढ़ने के बजाय घटीं। हालांकि इस दौरान वे रेल मंत्री भी रहे। 

चारा घोटाले से लालू प्रसाद की इमेज पर लगी डेंट ने उन्हें खासा नुकसान पहुंचाया। साल 2005 में नीतीश कुमार BJP के साथ मिलकर प्रदेश में सरकार बनाते हैं और यहां से बिहार में नीतीश युग की शुरुआत होती है। जो अब तक बरकरार है।  RJD लगभग दो दशक से प्रदेश की सत्ता से दूर है, हालांकि साल 2015 का चुनाव हो या 2020 का, RJD प्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी। ऐसे में चुनावी साल में राजद के के सामने सबसे बड़ा चैलेंज यह होगा कि वे अपने ही पिछले प्रदर्शन को और बेहतर कर पाते हैं या नहीं। आज राजद का खुला अधिवेशन है। पूरे प्रदेश और देश से राजद के कार्यकर्ता पटना में हैं।


 

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