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आनंद मोहन की रिहाई का मामला SC पहुंचा, जी कृष्णैया की पत्नी ने दायर की याचिका

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द फॉलोअप डेस्क
डीएम जी कृष्णैया के हत्या केस में उम्रकैद की सजा काट रहे आनंद मोहन को जेल से रिहाई हो गई है। उनकी रिहाई को लेकर सियासत गर्मा गई है। वहीं डीएम जी कृष्णैया का परिवार से सरकार के इस फैसले से बेहद दुखी है। जी कृष्णैया के परिवार की रिहाई मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने SC में याचिका दाखिल कर बिहार सरकार के इस फैसले को रद्द करने की मांग की है।


आजीवन कारावास को 14 साल के सजा रूप में नहीं देखा जा सकता
उमा देवी ने दायर याचिका में कहा है कि कानूनी रूप में यह स्पष्ट है कि आजीवन कारावास का मतलब यह है कि दोषी को पूरी जीवन जेल में रहना होगा। इसे 14 साल के सजा रूप में नहीं देखा जा सकता। अगर किसी के हत्या के आरोप में यह सजा दी गई हो उसे अलग तरीके से देखा जाए। वह सामान्य आजीवन कारावास से अलग होनी चाहिए। उसे सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। न की किसी भी तरह की छूट देनी चाहिए।


DM को भीड़ ने पीटा था, फिर गोली मारकर हत्या की थी
गोपालगंज के जिलाधिकारी जी कृष्णैया 5 दिसंबर 1994 को हाजीपुर से गोपालगंज लौट रहे थे। इसी दौरान मुजफ्फरपुर में आनंद मोहन के समर्थक DM की गाड़ी को देखते ही उन पर टूट पड़े। पहले उन्हें पीटा गया, फिर गोली मारकर हत्या कर दी थी। आरोप लगा कि भीड़ को आनंद मोहन ने ही उकसाया था। घटना के 12 साल बाद 2007 में लोअर कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई। आजाद भारत में यह पहला मामला था, जिसमें एक राजनेता को मौत की सजा दी गई थी। 2008 में हाईकोर्ट ने इस सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। साल 2012 में आनंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट में सजा कम करने की अपील की। कोर्ट ने उनकी इस मांग को खारिज कर दिया था।
 
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