द फॉलोअप डेस्क
लैंड फॉर जॉब घोटाला मामले में अब लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ गई है। राउज एवेन्यू की विशेष सीबीआई कोर्ट ने अहम आदेश जारी किया है। अदालत ने राजद सुप्रीमो और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके पुत्र तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव, पुत्री मीसा भारती सहित अन्य के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। वहीं, मामले में कोर्ट ने 52 आरोपियों को बरी भी किया। चार्जशीट के मुताबिक इनके खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं मिले। कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के साथ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में मुकदमा चलाने के निर्देश दिए हैं। राउज़ एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोग्ने ने कहा- लालू यादव और उनका परिवार एक आपराधिक गिरोह की तरह काम कर रहे थे और उनकी ओर से एक व्यापक साजिश रची गई थी।
अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट होता है कि आरोपियों के खिलाफ सुनवाई योग्य मामला बनता है। कोर्ट की टिप्पणी के अनुसार यह पूरा मामला सिर्फ एक गलती नहीं, बल्कि ऐसा लगता है जैसे सबने मिलकर एक गिरोह की तरह इस अपराध की प्लानिंग की थी। आदेश में यह भी कहा गया कि सभी आरोपियों की भूमिकाएं आपस में जुड़ी हुई प्रतीत होती हैं और ऐसा लग रहा है कि सभी आरोपियों ने आपस में मिलकर एक ही मकसद के लिए काम किया।.jpeg)
वहीं सीबीआई ने अदालत को बताया कि रेलवे में नियुक्तियों के बदले अभ्यर्थियों या उनके परिजनों से जमीन ली गई। यह जमीन कथित तौर पर लालू परिवार के सदस्यों या उनसे संबंधित संस्थाओं के नाम ट्रांसफर कराई गई। जांच एजेंसी के मुताबिक नौकरी, जमीन और संपत्ति के लेनदेन को एक सुनियोजित ढांचे के तहत जोड़ा गया था। आदेश के बाद अब मामले में नियमित ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें गवाहों की पेशी और साक्ष्यों की जांच की जाएगी। 
दरअसल यह पूरा मामला उस समय का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। सीबीआइ के अनुसार, रेलवे के ग्रुप-डी समेत विभिन्न पदों पर नियुक्तियों के बदले कुछ अभ्यर्थियों या उनके परिजनों से जमीने ली गई। ये जमीनें कथित तौर पर बेहद कम कीमत पर या बिना समुचित भुगतान के लालू परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों या उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम दर्ज कराई गईं। जांच में यह भी सामने आया कि यह तरीका किसी एक-दो नियुक्तियों तक सीमित नहीं था, बल्कि एक पैटर्न के रूप में अपनाया गया। इस पूरे प्रकरण में सीबीआइ ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किया था। और अब लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने इन सभी पर आरोप तय कर दिए हैं।