द फॉलोअप डेस्क
विपक्ष की आलोचनाओं के बाद चुनाव आयोग ने बिहार में विधानसभा चुनाव के पूर्व कराए जा रहे वोटरलिस्ट अपग्रेडेशन की प्रक्रिया में फिर से बदलाव किया है। दरअसल, उन्होंने कहा है कि अब वोटरलिस्ट अपग्रेडेशन की प्रक्रिया में दस्तावेज आवश्यक नहीं होंगे। इस बात की जानकारी मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के द्वारा जारी पोस्टर में दी गई है। पोस्टर में यह लिखा गया है कि "आवश्यक दस्तावेज और फोटो नहीं है तो भी वह गणना प्रपत्र भर कर बूथ लेवल अधिकारी को उपलब्ध कराएं"। वहीं वोटरलिस्ट अपग्रेडेशन की प्रक्रिया में लगातार हो रहे आलोचनाओं के बीच यह तीसरा बदलाव किया गया है। 
बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारियां जोरों शोरों से चल रही है। इधर चुनाव आयोग भी मन लगा कर काम कर रहा है जिसकी चर्चा लगातार हो रही है। दरअसल बिहार विधानसभा चुनाव के शुरू होने से पहले चुनाव आयोग ने वोटरलिस्ट अपग्रेडेशन की प्रक्रिया शुरू की थी जिसमें कई अनिवार्य दस्तावेज के साथ फोटो भी मांगे गए थे। और इस पहल को लेकर सभी राजनीतिक विपक्षी दल खिलाफ थे, कई दल तो इसे षड्यन्त्र बता रहे थे। अब चुनाव आयोग ने नई घोषणा की है कि वोटरलिस्ट अपग्रेडेशन के लिए दास्तावेजों का होना आवश्यक नहीं हैं। पदाधिकारी ने बताया कि मतदाता केवल गणना प्रपत्र भरकर बीएलओ के पास जमा कर दें। उसके बाद उनका नाम प्रारूप मतदाता सूची में शामिल हो जाएगा। इससे ऐसा माना जा रहा है कि अब मतदाताओं को भारी राहत मिल सकती है। 
लेकिन ऐसा लग रहा है कि मामला अब और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि जब चुनाव आयोग यह मान रहा है कि अब दस्तावेज आवश्यक नहीं होंगे तो फिर इतना परेशान क्यों किया गया था लोगों को। यह निर्णय वह पूर्व में ही क्यों नहीं लिया। क्या है यह एक राजनीतिक षड्यन्त्र नहीं है। अब देखना यह है कि चुनाव आयोग के इस बदलाव पर बिहार में क्या हलचल मचती है।