द फॉलोअप डेस्क:
सरायकेला-खरसावां के राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के दौरान सहिया विनीता बानरा और उनके नवजात शिशु की मौत पर पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने नाराजगी जाहिर की है। कथित तौर पर मोबाइल की रौशनी में सहिया का प्रसव कराने की कोशिश नर्सों द्वारा की गई थी। आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टर, दवा, जीवनरक्षक उपकरण और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव था और अत्यधिक ब्लीडिंग की वजह से विनीता बानरा और उनके नवजात शिशु की मौत हो गई। चंपाई सोरेन ने कहा कि हेल्थ सिस्टम की हालत देखकर उनका दिल टूट जाता है।
स्वास्थ्य व्यवस्था का यह हाल देख कर दिल दहल गया।
— Champai Soren (@ChampaiSoren) May 3, 2026
यह बिनीता बेटी एवं नवजात बच्चे की मौत नहीं, बल्कि संस्थागत हत्या है। मरांग बुरु दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें तथा उनके परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति दें।
जिस राज्य का स्वास्थ्य मंत्री इस व्यवस्था को सुधारने की जगह… pic.twitter.com/h68irM0QQC
यह मौत नहीं बल्कि संस्थागत हत्या
पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने कहा कि यह बिनीता और उनके नवजात शिशु की मौत नहीं, बल्कि संस्थागत हत्या है। चंपाई सोरेन ने कहा कि "जिस राज्य में हेल्थ मिनिस्टर सिस्टम सुधारने के बजाय पत्रकारों को पिटवाने में ज़्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं, जहां सरकार की प्राथमिकता हॉस्पिटल के इंतज़ाम ठीक करने के बजाय नए स्ट्रक्चर बनाना है, जहां प्रशासन बच्चों को HIV इन्फेक्टेड खून चढ़ाने या आदिवासियों पर लाठीचार्ज का आदेश देने को छोटी बात समझता है, वहां अगर मोबाइल फोन की रोशनी में किए गए ऑपरेशन में किसी गरीब परिवार के दो लोगों की जान चली जाए तो राज्य सरकार को क्या फर्क पड़ता है"?

चंपाई सोरेन ने दी आंदोलन की चेतावनी
चंपाई सोरेन ने कहा कि मेरी कोशिशों से सरायकेला में डेढ़ साल से एक नया स्टेट-ऑफ-द-आर्ट हॉस्पिटल बनकर तैयार है, लेकिन राज्य सरकार का इसे शुरू करने का कोई इरादा नहीं है। इसके पीछे उनका मकसद क्या है, यह तो वही जानते हैं, लेकिन अगर लापरवाही से ऐसी मौतें नहीं रुकीं, तो हम लोगों के साथ सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।