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बिहार में 11 गुना बढ़ी बिजली की खपत, टॉप टेन जिलों में ये है शामिल; आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट

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द फॉलोअप डेस्क

बिहार में बिजली की खपत और उत्पादन में पिछले दो दशकों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। 2005 में राज्य में केवल 700 मेगावाट बिजली की खपत होती थी, जो अब बढ़कर 8005 मेगावाट तक पहुंच गई है। इसी तरह, बिहार में पहले बिजली उत्पादन शून्य था, अब राज्य में लगभग 11 हजार मेगावाट बिजली उत्पादित हो रही है। इस साल के अंत तक राज्य में 12 हजार 58 मेगावाट बिजली उत्पादन होने का लक्ष्य है।
बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2024-24 के अनुसार, 2005 में राज्य में केवल 17 लाख बिजली उपभोक्ता थे, जो अब बढ़कर दो करोड़ 12 लाख हो गए हैं। राज्य में ग्रिड उपकेंद्रों की संख्या भी 45 से बढ़कर 170 हो गई है। वर्ष 2005 में राज्य में केवल 1000 मेगावाट तक बिजली आपूर्ति हो सकती थी, जबकि अब 15 हजार मेगावाट तक बिजली आपूर्ति की क्षमता है।
संचरण लाइनों की लंबाई 2005 में केवल 5000 सर्किट किलोमीटर थी, जो अब बढ़कर 20,393 सर्किट किलोमीटर हो गई है। इसके अलावा, बिजली कंपनी ने अपने नुकसान में भी कमी की है। 2012-13 में तकनीकी और व्यावसायिक नुकसान 45.41 फीसदी था, जो अब 2023-24 में घटकर 19.94 फीसदी हो गया है।
ग्रामीण इलाकों में औसतन 22 घंटे बिजली आपूर्ति हो रही है, जबकि शहरी इलाकों में यह लगभग 24 घंटे हो चुकी है। 2017-18 से लेकर 2023-24 तक बिजली की चरम मांग में 1.4 गुना वृद्धि हुई है। 2005 में 70 यूनिट बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या अब 2024 में बढ़कर 363 यूनिट हो गई है, जो केवल 12 वर्षों में 229 किलोवाट आवर की वृद्धि दर्शाता है।
बिजली की बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने कई प्रयास किए हैं। एक अप्रैल से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष में सरकार ने 1112 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था कर ली है। बक्सर के चौसा में 660 मेगावाट की दो इकाइयों का काम शुरू है, जिसमें से एक यूनिट इस साल शुरू होगी।
जिलावार बिजली खपत:
•    पटना: 647.6 करोड़ यूनिट
•    अन्य जिलों में भी बिजली की खपत में वृद्धि देखी गई है, खासकर घरेलू उपभोक्ताओं के बीच।
बिजली की बढ़ी हुई खपत को देखते हुए सरकार ने राज्य में आवश्यक बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई योजनाओं पर काम किया है।
 

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