बिहार :
नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने रविवार को जदयू पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है इसके साथ ही औपचारिक रूप से सक्रिय राजनीति में कदम रख दिया है। निशांत की इस एंट्री ने बिहार की भावी राजनीति की तस्वीर साफ कर दी है। प्रदेश की राजनीति में यह चर्चाएं होने लगी हैं कि निशांत को डिप्टी सीएम जैसी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। पिता के मार्गदर्शन और गहन अध्ययन के बाद, वे अब बिहार की 'राजनीतिक यात्रा' पर निकलने की तैयारी में हैं। दरअसल, निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री अचानक नहीं हुई है, बल्कि इसकी तैयारी कई साल पहले से ही हो रही थी। जानकारी के मुताबिक, निशांत ने राजनीति की बारीकियों को समझने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 200 से अधिक महत्वपूर्ण भाषणों का गहराई से अध्ययन किया है। इतना ही नहीं, उन्होंने समाजवादी विचारधारा को आत्मसात करने के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया और जननायक कर्पूरी ठाकुर के जीवन पर आधारित 10 से अधिक पुस्तकों को भी पढ़ा है।

हालांकि अब वे अपने पिता के मार्गदर्शन में 20 दिनों की विशेष 'पॉलिटिकल ट्रेनिंग' लेंगे, जहां वे प्रशासनिक और संगठन से जुड़े कार्यों को नजदीक से देखेंगे। बता दें कि निशांत कुमार ने खुद इसकी जानकारी दी है कि वे जल्द ही बिहार की एक व्यापक यात्रा पर निकलेंगे। दिलचस्प बात यह है कि जहां नीतीश कुमार अपनी लंबी राजनीतिक पारी का समापन यात्राओं पर हैं वहीं निशांत अपनी नई पारी का आगाज भी करने जा रहे हैं। निशांत कुमार का राजनीति में आना जदयू के लिए एक पीढ़ी परिवर्तन माना जा रहा है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर रहे निशांत का लोहिया और कर्पूरी ठाकुर के साहित्य की ओर झुकाव, यह संकेत देता है कि वे पार्टी की मूल समाजवादी विचारधारा को आगे बढ़ाना चाहते हैं। जदयू के नेताओं का मानना है कि निशांत के आने से पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार होगा और नीतीश कुमार के विकास कार्यों को आगे ले जाने में मदद मिलेगी।