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पटना के 67 निजी स्कूलों के अस्तित्व पर संकट, DEO ने जांच के दिए आदेश; ये बताया कारण

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पटना
जिले के 67 निजी स्कूलों का पंजीयन खतरे में पड़ गया है। शिक्षा विभाग को तय मानकों के अनुसार जानकारी उपलब्ध नहीं कराने पर इन स्कूलों को दोबारा जांच के दायरे में लाया गया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) ने स्थल निरीक्षण के दौरान खामियां सामने आने के बाद पुनः जांच का आदेश जारी किया है।
इन स्कूलों की जांच की जिम्मेदारी जिला शिक्षा कार्यालय ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को सौंपी है। सभी स्कूलों में कक्षा एक से आठवीं तक की पढ़ाई संचालित होती है। मानकों की दोबारा जांच के बाद ही इन स्कूलों की मान्यता बहाल करने पर निर्णय लिया जाएगा।


शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन निजी स्कूलों को पंजीयन की स्वीकृति दी जाएगी, उन्हें अगले शैक्षणिक सत्र में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत बच्चों का नामांकन लेना अनिवार्य होगा। इस व्यवस्था के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों का पहली कक्षा में नामांकन किया जाता है।
आरटीई के तहत प्राप्त आवेदनों के आधार पर शिक्षा विभाग लॉटरी प्रक्रिया से बच्चों को स्कूल आवंटित करता है। जिला शिक्षा कार्यालय ने चेतावनी दी है कि यदि कोई स्कूल आरटीई के तहत नामांकन लेने से इनकार करता है तो उसका पंजीयन रद्द किया जाएगा, आर्थिक दंड लगाया जाएगा और प्राथमिकी भी दर्ज की जा सकती है। वर्तमान में पटना जिले में लगभग 1200 छोटे-बड़े निजी स्कूल पंजीकृत हैं। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि पंजीयन के लिए स्कूलों को ट्रस्ट या एनजीओ से संबंधित दस्तावेज, किरायानामा, पिछले तीन वर्षों का आय-व्यय विवरण, प्रशिक्षित शिक्षकों से जुड़े प्रमाण पत्र, पर्याप्त कक्षाओं की उपलब्धता, खेल मैदान, शौचालय और पेयजल की समुचित व्यवस्था तथा बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मानकों को पूरा करना अनिवार्य है।


 

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