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Followup Special News

'सौ में सत्‍तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद है.....' तो विचारिये साहब!

भारत में पहले से भी अधिक गहरी होती जा रही है अमीर-गरीब के बीच खाई

विवेक का स्‍वामी-4: धार्मिक निजी पहचान क़ायम रखते हुए भी परस्‍पर धर्मों में आपसी सहकार संभव

श्रीरामकृष्ण परमहंस और विवेकानन्द की हिन्दू धर्म संबंधी मुख्य अवधारणाएं लकीर की फकीर की तरह नहीं हैं।

देश की बिंदी-9: जब सिताबदियारा बन गया सीता-बदियारा और नोएडा को बंदर खा गया !

बोलते समय रखें एहतियात नहीं तो हो सकते हैं अर्थ के अनर्थ

धर्मांधता ने की 'बोलती' बंद, अफ़ग़ानिस्तान पर बनाए रखिये नज़र

अफ़ग़ानिस्तान के जानकार पत्रकार पुष्‍परंजन के बक़ैल-तालिबानी दमन से त्रस्त अफगानी मीडिया

चुनावी वादों वाले 'विकास' से अलग है लातेहार के इन गांवों की हकीकत, 2 दशक बाद भी नहीं बदली तस्वीर

झारखंड में इन दिनों नमाज़ के लिए आवंटित कमरे पर बहस छिड़ी हुई है। विपक्ष कमरे का विरोध कर रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी भोजपुरी और मगही पर पर बयान देकर विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्ष भी इन्हीं मुद्दों पर सरकार को घेरने में पूरी तरह मशगूल है, लेकिन झा

साबरमती का संत-13: आख़िर पटना के पीएमसीएच के ऑपरेशन थियेटर क्‍यों पहुंचे थे बापू

'द फॉलोअप के पाठक सिलसिलेवार गांधी और उनके विचार-व्‍यवहार से रूबरू हो रहे हैं।

विवेक का स्‍वामी-3: वेदांत और सूफी दर्शन को समाहित नए सांस्कृतिक आचरण की पैरवी

विवेकानन्द की दुनिया और हिन्दुत्व यानी हिन्दुइज़्म में सेक्युलरिज़्म

देश की बिंदी-8: मीडिया पर हिंदी का स्वरूप विकृत कर देने का आरोप कितना उचित

हिंदी हैं हम वतन हैं, हिंदुस्‍तां हमारा

देश की बिंदी हिंदी-संपादकजी कहिन: बदलती रहेगी तो बहती रहेगी हिंदी

करीब डेढ़ सौ साल पहले भारतेंदु हरिश्चंद ने लेख लिखा था, हिंदी नई चाल में ढली। उसका चलना आज भी जारी है। रहना भी चाहिए।

देश की बिंदी-5: मात्र सरकारी औपचारिकता बनकर क्‍यों रह जाता है हिंदी दिवस

हिंदी दिवस की खास पेशकश की पांचवीं कड़ी

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