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Followup Special News

साबरमती का संत-13: आख़िर पटना के पीएमसीएच के ऑपरेशन थियेटर क्‍यों पहुंचे थे बापू

'द फॉलोअप के पाठक सिलसिलेवार गांधी और उनके विचार-व्‍यवहार से रूबरू हो रहे हैं।

विवेक का स्‍वामी-3: वेदांत और सूफी दर्शन को समाहित नए सांस्कृतिक आचरण की पैरवी

विवेकानन्द की दुनिया और हिन्दुत्व यानी हिन्दुइज़्म में सेक्युलरिज़्म

देश की बिंदी-8: मीडिया पर हिंदी का स्वरूप विकृत कर देने का आरोप कितना उचित

हिंदी हैं हम वतन हैं, हिंदुस्‍तां हमारा

देश की बिंदी हिंदी-संपादकजी कहिन: बदलती रहेगी तो बहती रहेगी हिंदी

करीब डेढ़ सौ साल पहले भारतेंदु हरिश्चंद ने लेख लिखा था, हिंदी नई चाल में ढली। उसका चलना आज भी जारी है। रहना भी चाहिए।

देश की बिंदी-5: मात्र सरकारी औपचारिकता बनकर क्‍यों रह जाता है हिंदी दिवस

हिंदी दिवस की खास पेशकश की पांचवीं कड़ी

​​​​​​​विवेक का स्‍वामी-2: शिकागो धर्म संसद में जिरह के दो तयशुदा दुनियावी नतीजे निकले

'स्‍वामी विवेकानन्द के अहम जानकार वरिष्‍ठ लेखक कनक तिवारी का लेख

साबरमती का संत-12: महात्‍मा गांधी को मौलवी इब्राहिम ने बताया रामधुन से उन्‍हें कोई एतराज़ नहीं

गांधी जी के आखिरी दिनों में हर शाम एक प्रार्थना सभा होती थी। अच्छी खासी भीड़ उमड़ती। उन सभाओं में कई धर्मों की प्रार्थना होती

देश की बिंदी-3: संविधान लागू होने के 3 साल बाद 1953 के 14 सितम्बर को पहला हिन्दी दिवस मना

हिंदी दिवस 14 सितंबर पर पढ़िये समाजवादी लेखक प्रेम कुमार मणि का चिंतनपरक लेख

देश की बिंदी-2: विश्व का तोरण द्वार है हिंदी-राष्ट्रभाषा बनाम राजभाषा

संविधान की अष्टम् अनुसूची में स्वीकृत सभी 22 भाषाएँ राष्ट्र भाषाएँ हैं और व्यापक अर्थ में भारतवर्ष में जितनी भाषाएँ बोली, समझी और लिखी  जाती हैं, वे सब राष्ट्रभाषा की गरिमा से युक्त हैं।

उग्र राष्ट्रवाद की प्रयोगशाला बने एक देश में स्‍त्री की त्रासद कथा

'बोस्निया हर्जे़गोबिना पर प्रोफ़ेसर गरिमा श्रीवास्तव की पुस्तक, 'देह ही देश'

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