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Followup Special News

देश की बिंदी-5: मात्र सरकारी औपचारिकता बनकर क्‍यों रह जाता है हिंदी दिवस

हिंदी दिवस की खास पेशकश की पांचवीं कड़ी

​​​​​​​विवेक का स्‍वामी-2: शिकागो धर्म संसद में जिरह के दो तयशुदा दुनियावी नतीजे निकले

'स्‍वामी विवेकानन्द के अहम जानकार वरिष्‍ठ लेखक कनक तिवारी का लेख

साबरमती का संत-12: महात्‍मा गांधी को मौलवी इब्राहिम ने बताया रामधुन से उन्‍हें कोई एतराज़ नहीं

गांधी जी के आखिरी दिनों में हर शाम एक प्रार्थना सभा होती थी। अच्छी खासी भीड़ उमड़ती। उन सभाओं में कई धर्मों की प्रार्थना होती

देश की बिंदी-3: संविधान लागू होने के 3 साल बाद 1953 के 14 सितम्बर को पहला हिन्दी दिवस मना

हिंदी दिवस 14 सितंबर पर पढ़िये समाजवादी लेखक प्रेम कुमार मणि का चिंतनपरक लेख

देश की बिंदी-2: विश्व का तोरण द्वार है हिंदी-राष्ट्रभाषा बनाम राजभाषा

संविधान की अष्टम् अनुसूची में स्वीकृत सभी 22 भाषाएँ राष्ट्र भाषाएँ हैं और व्यापक अर्थ में भारतवर्ष में जितनी भाषाएँ बोली, समझी और लिखी  जाती हैं, वे सब राष्ट्रभाषा की गरिमा से युक्त हैं।

उग्र राष्ट्रवाद की प्रयोगशाला बने एक देश में स्‍त्री की त्रासद कथा

'बोस्निया हर्जे़गोबिना पर प्रोफ़ेसर गरिमा श्रीवास्तव की पुस्तक, 'देह ही देश'

देश की बिंदी-1: माँ और गाँव की तरह हिन्दी को लेकर होना भावुक

समाजवादी लेखक प्रेमकुमार मणि के मार्फत जानिये हिंदी के राजभाषा बनने की कहानी

विवेक का स्‍वामी-1:  विवेकानंद की दुनिया और हिन्दुत्व

महात्मा गांधी का आत्मस्वीकार है कि विवेकानन्द की किताबों को पढ़कर उनकी देशभक्ति में इज़ाफा हुआ।

साबरमती का संत-11: महात्‍मा गांधी और वामपंथ कितने पास, कितने दूर

 जितना भगतसिंह ईमानदार थे ठीक उतने ही गाँधी भी ईमानदार थे।

अपने ही वादे से पलटा तालिबान विश्व-जनमत की कर रहा अनदेखी

प्रधानमंत्री सहित कई ऐसे मंत्री हैं, जिन्हें संयुक्तराष्ट्र संघ ने आतंकवादी घोषित कर रखा है।

सब के उदय के पक्षधर रहे सर्वोदय के नायक संत विनोबा भावे

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी कहे जाने वाले आचार्य विनोबा भावे मूलत: एक सामाजिक विचारक थे

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