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प्रहार : झूठ,लूट और भ्रष्टाचार के 3 साल, भाजपा ने जारी किया आरोप पत्र

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रांची:
झारखंड सरकार  ने आज अपने 3 साल पूरे (3 Years of Jharkhand Government) कर लिए है। इसी क्रम में जहां एक तरफ सरकार अपनी उपलब्धियां गिनवाने में लगी है तो वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल BJP ने सरकार के खिलाफ आरोप पत्र जारी किया है। जिसमें लिखा गया है कि JMM, कांग्रेस एवं RJD के बेमेल गठजोड़ से बनी अवसरवादी और सत्तालोलुप हेमंत सरकार के कुशासन ने राज्य को आकट भ्रष्टाचार की गर्त में धकेल दिया है। राज्य की आधारभूत संरचना को जर्जर स्थिति में ला दिया है। झारखंड को बदहाली के कगार पर पहुंचा दिया है। राज्य में सर्वत्र अराजकता का माहौल है। महिलाओं का उत्पीड़न व बलात्कार की लगातार बढ़ती घटनाओं ने सरकार की अकर्मण्यता को उजागर किया 5000 से अधिक बलात्कार के मामले 5258 हत्या, 28234 चोरी, 1978 डकैती, 4485 अपहरण के मामले सरकार के प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलती है। इसके साथ राज्य सरकार ने विधान सभा में पिछले तीन सालों में मात्र 357 लोगों को नौकरी देने की बात स्वीकार कर बेरोजगार नौजवानों के साथ किए गए विश्वासघात को निर्लज्जता से स्वीकार किया है। इस सरकार में नियुक्ति की बात कौन कहे सरकार युवाओं को बेरोजगारी भत्ता तक नहीं दे पाई। दिशाहीन डेमंत सोरेन सरकार के निकम्मेपन के कारण लोगों को बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही है।


हेमंत सरकार केंद्रीय योजनाओं को लटकाने, भटकाने और अटकाने में लगी
राज्य में पानी, सडक, स्वास्थ्य एवं शिक्षा की स्थिति अत्यंत दयनीय है। भाजपा सरकार द्वारा प्रारंभ की गई कृषि आशीर्वाद योजना के बंद होने एवं अकाल और सूखा की मार से किसान परेशान हैं। यहीं राज्य के मुख्यमंत्री मंत्री अपनी सुख-सुविधा के लिए लग्जरी गाड़ियों का काफिला खड़ी करने एवं विलासितापूर्ण आवास बनाने में जुटे हैं। केंद्र सरकार मुक्त हस्त से राज्य सरकार को मदद कर रही है लेकिन हेमंत सरकार केंद्रीय योजनाओं को लटकाने, भटकाने और अटकाने में लगी हुई है। आयुष्मान योजना में गरीबों का ईलाज तक बंद है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के लाभुकों को महीनों से राशन नहीं मिल रहा है। अबतक सरकार बजट का 35 प्रतिशत राशि भी खर्च नहीं कर पायी है। ऐसे में इस भ्रष्ट और निकम्मी सरकार से राज्य की जनता शीघ्र निजात पाना चाहती है। भाजपा द्वारा लगातार जन भावनाओं के अनुरूप सड़क से सदन तक संघर्ष जारी है। साढ़े तीन करोड़ जनता की भावनाओं के अनुरूप यह आरोप-पत्र जनता को समर्पित है।
राज्य संपोषित भ्रष्टाचार

पूरे झारखंड में भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा है। राज्य भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुका है। राज्य में व्याप्त इस प्रचंड भ्रष्टाचार को जेएमएम, कांग्रेस, राजद की संयुक्त सरकार का खुला संरक्षण प्राप्त है पूरे राज्य में वर्तमान हेमंत सरकार द्वारा भ्रष्टाचार का अनिट काला अध्याय लिखने का काम किया गया। मुख्यमंत्री के निर्वाचन जिले में तो भ्रष्टाचार का एक इतिहास ही रच दिया गया।

• भ्रष्टाचार में मुख्यमंत्री मंत्री, विधायक से लेकर अधिकारी तक संलिप्त है।

• राज्य के सीएम पर ही सीधा भ्रष्टाचार का आरोप है। आजाद भारत के इतिहास में पहली घटना है जब किसी प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अपने हस्ताक्षर से खनन पट्टा लिया हो।

• मुख्यमंत्री के भाई बसंत सोरेन, पत्नी कल्पना सोरेन, प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद पिंटु विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा, विधायक सुदीव्य कुमार, मंत्री मिथिलेश ठाकुर, विधायक दीपक बिरूआ और शिक्षा एवं मद्य-निषेध मंत्री जगरनाथ महतो भी जांच के दायरे में हैं।

• राज्य में परिवारवाद का नया चेहरा उजागर हुआ है। केवल राजनीतिक भागीदारी में ही नहीं बल्कि लूट में भी परिवारवाद शामिल है।

• लूट में सत्ताधारी नेता ही नहीं बल्कि अधिकारियों ने भी भ्रष्टाचार की नई ईवारत लिखी। पलामू डीसी ने सास सरहज के नाम पर पत्थर खनन की लीज ली।
 • खान सचिव पूजा सिंघल एवं उनके करीबी के यहां लगभग नगद 20 करोड़ बरामद हुए। पूजा सिंघल, उनके सीए, सीएम के विधायक प्रतिनिधि सीएम के खासमखास गिरफ्तार हुए हैं। इन भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए राज्य सरकार वकीलों पर करोड़ो रुपए खर्च कर जनता की गाढ़ी कमाई लूटा रही है।

• मुख्यमंत्री के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा, प्रेम प्रकाश, अमित अग्रवाल, पूजा सिंघल, दाहू यादव सहित कइयों के काले कारनामों की ईडी के द्वारा पर्दाफाश के बावजूद सरकार चुप्पी साधे हुई है। राज्य सरकार के इशारे पर इन सभी आरोपियों को जेल और अस्पताल में वीवीआईपी सुविधा उपलब्ध कराया जा रहा है।

• पंकज मिश्रा पर कस्टडी में रहने के बाद भी अफसरों को आदेश देने जैसा गंभीर अपराध में शामिल होने के बावजूद मुख्यमंत्री द्वारा विधायक प्रतिनिधि के पद से नहीं हटाना उनके संरक्षण को उजागर करता है।

• ईडी के अफसरों की जासूसी मामले में महाधिवक्ता सीएम के प्रेस सलाहकार जेल में बंद विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा की करतूतों ने राज्य को शर्मसार किया है।

• साहिबगंज मनिहारी फेरी जहाज वाली दुर्घटना राज्य सरकार के माथे पर एक बड़ा कलंक है। राज्य सरकार इसकी लीपापोती में प्रारंभ से लगी है।
• रांची में सेना की जमीन को औने-पौने दाम में हड़पा गया। 100 करोड़ की जमीन की रजिस्ट्री मात्र 7 करोड में हुई।

• योजनाओं, ठीका टेंडर व विभिन्न विभागों में पूरी तरह भ्रष्टाचार का बोलबाला है। टेंडर मैनेज के मामले में मंत्री आलमगीर आलम पर हाई कोर्ट की टिप्पणी राज्य सरकार के लिए शर्म की बात है।

● राज्य में 608 बालू घाट में टेंडर 17 का ही है। झारखंड में हर माह करीब 100 करोड़ तक का बालू का अवैध कारोबार डंके की चोट पर किया जा रहा है। राज्य में विकास के सारे कार्य ठप्प हैं लेकिन धनबाद में अफसर बालू तस्कर से हर माह 1 करोड नजराना वसूल रहे हैं। मुख्यमंत्री के इलाके के थाने का हाल यह है कि पासपोर्ट वेरिफिकेशन के नाम पर 2000 तक की वसूली हो रही है।
ध्वस्त कानून व्यवस्था 

झारखंड में अपराधियों की समानातर सरकार चल रही है। अपराधी जब चाहें, जहां चाहें अपराध को अजाम दे रहे हैं। प्रदेश में कानून व्यवस्था बद से बदतर हो चुकी है। सरकार का इस पर कोई नियंत्रण नहीं दिखता। दुखद पहलू है कि विकास की पायदान की बजाय हत्या, लूट, बलात्कार, अपहरण, चोरी, डकैती, दंगा में प्रदेश अव्वल है। राजधानी के बीचों बीच दिन दहाड़े गोलियां बरसाई जा रही हैं। राज्य पूरी तरह अराजकता की राहपर है आम से लेकर खास तक कोई भी सुरक्षित नहीं है। प्र
• हत्या के मामले में 4.1 की दर से झारखंड पूरे देश अव्वल है।
• हेमंत सरकार में सरकारी आंकड़े के अनुसार 3 साल के कार्यकाल में 5258 लोगों की हत्या हो चुकी है। वहीं 4813 बहन-बेटियों के साथ बलात्कार की घटनाएं घट चुकी है जबकि 4485 अपहरण की घटी घटनाएं राज्य में व्यस्त लॉ एंड ऑर्डर का प्रमाण है।
● राज्य के 24 जिलों में से 19 जिले की पुलिस गंभीर अपराध नियंत्रण में नाकाम है। • राजधानी के व्यस्ततम इलाके में दिन के उजाले में सुषमा बड़ाईक को गोली मार दी जाती है, पुलिस लकीर पीटती रह जाती है। हाई सिक्योरिटी जोन में दिनदहाड़े गैंगवार की घटना घटती है। जहां कुछ ही दूरी पर शिबू सोरेन का आवास, बाबूलाल मरांडी का आवास, सीएम का आवास, एसएसपी आवास, राजभवन है। रांची के पॉश इलाके वर्धमान कम्पाउंड से दिन दहाड़े 30 लाख की लूट हो जाती है। दिन दहाड़े जमीन कारोबारी, थोक जेवर विक्रेता की गोली मार कर हत्या कर दी जाती है। 
• धनबाद में अपराधियों ने शहर के प्रसिद्ध डा० से 1 करोड़ की रंगदारी मांगी। इस डर से चिकित्सक घर छोड़ने को मजबूर हुए। आश्चर्य इस बात का कि जिस नंबर से डॉक्टर को धमकी उससे 556 बार अलग-अलग लोगों को फोन किया गया। बावजूद आज तक पुलिस लकीर पीट रही है।
• होटवार जेल में छापामारी के दौरान 150 मोबाईल सक्रिय मिले। • खूंटी में घुसकर ग्राम प्रधान, उनके बेटे और बहू की हत्या हो जाती है।
● कोयला चोरों ने खरखरी थाना प्रभारी को घसीट घसीट कर पीटा।
• साइबर अपराध के लिए यह प्रदेश, खासकर जामताडा कुख्यात रहा है। अपराध कहीं भी घट सकता है परंतु विडम्बना यह है कि तीन साल में मात्र तीन दोषी को सजा मिली है। 
• राज्य में दम तोडता उग्रवाद सरकार की नकामियों के कारण फिर से सर उठा रहा है। उग्रवादियों का दुःसाहस चरम पर है। साल के प्रारंभ में ही केवल गिरिडीह में 5 दिनों के अंदर 3 दिन उग्रवादियों ने तांडव मचाया। 26 जनवरी को हाई अलर्ट के बावजूद विष्णुगढ़ में मोबाइल टावर उड़ाया विशुनपुर डुमरी, मधुबन में सरकारी परिसर में काला झंडा फहराकर खुली चुनौती दी। 21 जनवरी की रात को गिरिडीह के पीरटांड प्रखंड के खुखरा और मधुबन में दो टावरों को विस्फोटक लगाकर उड़ा कर करोड़ों की संपति का नुकसान किया था। वही 22 जनवरी की रात को गिरिडीह मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बरागढ़ा के बीच बने पुल को उड़ा दिया ।

• आए दिन विभिन्न स्थानों पर कंपनियों में लगे वाहनों को जलाए जाने की घटना आम बात रही है। उग्रवादियों के डर से चतरा में 40 करोड की 4 योजनाएं बंद कर कंपनियां काम छोड़कर भाग गई।
युवा विरोधी सरकार
• झारखंड में बेराजगारी के आकडें भयावह व डरावने हैं। 19 राज्यों से ज्यादा बेरोजगारी राज्य में है जो राष्ट्रीय औसत से दोगुनी है। जनवरी में यह आंकड़ा तो 11.2 प्रतिशत से बढ़कर 27.1 प्रतिशत हो गया था। देश में तीसरे नंबर पर झारखंड था। सीएमआईए के मासिक सर्वे में देश में 82 तो झारखंड में 143 फीसदी है।
• हर साल 5 लाख नियुक्ति करने का वादा, नौकरी नहीं तो बेरोजगारी भत्ता का सब्ज बाग दिखाकर सत्ता में आनेवाली सरकार में नियुक्ति का अता पता नहीं नियुक्ति वर्ष का ढिंढोना पीटने वाली सरकार ने सदन में स्वीकार किया कि अबतक मात्र 357 नौकरी ही दे पाई है।
• बेरोजगारी भत्ता के लिए जिलों में भेजी गई राशि सरेंडर हो गई।
• 5 लाख नौकरी देने वाले अपनी वादे को पूरा करने की बजाय सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में अंडा पालने और ठेला लगाने की सलाह युवाओं को दे रही है।
• राज्य के युवाओंको नौकरी देने की बजाय उनसे शराब बिकवाने का प्रपंच तक हेमंत सरकार रच चुकी है।
• इसी वर्ष स्थापना दिवस पर लॉन्च की गई मुख्यमंत्री सारथी योजना, मुख्यमंत्री शिक्षा प्रोत्साहन योजना योजना, एकलव्य प्रशिक्षण योजना और गुरूजी क्रेडिट कार्ड योजना छलावा नहीं तो क्या है। कितनो को इस योजना का अब तक लाभ मिला, सरकार को बतानी चाहिए। 
• पंचायत सचिव मामले में हेमंत सरकार कितनी संजीदा रही है इस बात का अंदाजा सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मिलता है। पूर्व वर्ती भाजपा सरकार में नियुक्ति की सारी प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी परंतु हेमत सरकार ने तीन वर्षो तक इसे लटकाए रखा। अंतत सुप्रीमकोर्ट ने मेरिटलिस्ट बनाने का आदेश दिया है।
• 2016 नियोजन नीति के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को 3 माह में शिक्षकों की नियुक्ति का आदेश दिया है। देखना है कि सरकार कितनी तत्परता दिखाती है।यअव्यवहारिक तौर पर लागू की गई नियोजन नीति 2021 को हाईकोर्ट ने रद्दकर युवा विरोधी हेमंत सरकार को आईना दिखा दिया है। आज राज्य में कोई नियोजन नीति नहीं है।

• विश्वविद्यालय और कॉलेज में जनजातीय भाषा को बढ़ावा देने के लिए कोल्हान विश्वविद्यालय और उसके 14यकॉलेजों में जनजातीय भाषा के शिक्षकों के 159 पद आज तक नहीं भरे गए। पिछले साल हेमंत ने निर्णयलिया था।
• झारखंड के स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा ठप्प है। 652 कंप्यूटर शिक्षकों का अनुबंध खत्म हो चुका है। राज्य के युवा नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। केन्द्र सरकार इस मद में 75 प्रतिशत राशि वहन करने को तैयार है लेकिन राज्य मात्र 25 प्रतिशत राशि भी नहीं दे रही है।

महिला विरोधी सरकार
राज्य में हेमंत सरकार बनने के बाद अपराधियों और दुराचारियों के निशाने पर महिलाएं और बच्चियां सबसे अधिक रही है। सरकार ने महिला उत्पीडन का रिकार्ड बनाया है। प्रतिदिन राज्य के विभिन्न इलाकों से इन पर अत्याचार और उत्पीड़न की खबरें विचलित करती हैं।
• प्रदेश में एक भी दिन ऐसा नहीं जिस दिन राज्य में बहन बेटियों के साथ अनाचार नहीं होता हो। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि आदिवासी मुख्यमंत्री के रहते बड़ी संख्या में आदिवासी दलित बेटियां उत्पीड़न का शिकार हो रही है।
• 16 दिन से लंबित आवेदन पर एफआईआर नहीं होने से आहत दुष्कर्म पीडिता ने आत्महत्या का प्रयास किया। • पश्चिमी सिंहभूम के बंदगांव थाने में राजभवन से फोन जाने पर 30 घंटे के बाद दुष्कर्म की प्राथमिकी हुई। नाबालिक बच्ची के पिता को पुलिस ने 30 घंटे तक थाने में बिठाए रखा।

• साहिबगंज के तालाझारी में पहाडिया युवती से 8 युवकों ने किया रेप, हत्या की कोशिश ।
• दुमका में स्कूल से लौट रही आदिवासी छात्रा को अगवाकर चलती पैन में सामूहिक दुष्कर्म किया गया। 
• टुडी में आदिवासी बालिका से दुष्कर्म। रांची के चान्हों में सड़क से नाबालिग को अगवाकर चलती कार में गैंग रेप किया गया। 
• गुमला के गुरदरी में दो आदिवासी लड़कियों के साथ गैंगरेप किया गया।
• पेटरवार में इंटर की दलित छात्रा के साथ गैंगरेप किया गया।
● हजारीबाग में महिला को अगवाकर जंगल ले जाकर सामूहिक रेप किया गया।

• बरवा अड्डा में युवती से गैंगरेप, महिला पुलिस नहीं मिलने पर पीड़िता को थाने थाने घुमाया गया।
• मैथन में किशोरी से रेप, पीडित व पिता को थाने से भगाया गया।
• डायन का आरोप लगाकर महिला को गढ़वा में वार्ड सदस्य ने नंगाकर दौड़ा दौड़ा कर पीटा।
• एक तरफा प्यार में मुस्लिम युवक शाहरूख ने दुमका में हिन्दु युवती अंकिता को पेट्रोल छिड़क कर जलाया
• अरमान असारी द्वारा दुमका में आदिवासी नाबालिग लड़की के साथ रेप के बाद पेड़ से लटका कर हत्या की गई।
• दुमका में हिन्दु बता विवाहिता को कामरान ले भागा। • लोहरदगा में लव जिहाद रब्बानी अंसारी ने धर्म छिपा कर नाबालिग आदिवासी लड़की के साथ यौन शोषण कर कुएं में फेंका।
• दिलदार अंसारी ने पहाडिया आदिवासी युवती रूबिका के 50 टुकड़े किए। दरिंदगी ऐसी कि पहचान छिपाने के लिए रूबिका की खाल तक उतार दी गई। मुख्यमंत्री जी का एक बार फिर शर्मनाक बयान आता है कि घटनाएं तो होती रहती है।
• साहिबगंज के मिर्जा चौकी में पहाड़िया आदिम जनजाति युवती से सद्दाम नामक युवक ने किया दुष्कर्म • गढ़वा के मेराल के आफताब ने नाम बदलकर यूपी की लड़की से शादी की, भेद खुला तो घर से निकाला। • दुमका में किशोरी को अगवा कर दुष्कर्म की कोशिश, विरोध करने पर पैर तोड़ दिया गया।
• दुमका में डायन बता कर तीन महिलाओं को पीटा गया, मैला पिलाया, गर्म लोहे से दागा गया।
 • सोनाहातू में तीन महिलाओं को डायन बताकर ग्रामीणों ने मारा।
• सुखदेव नगर महिला थानेदार से सिसई विधायक ने किया दुर्व्यवहार कहा कि ज्यादा होशियार मत बनो, नहीं तो बंधक बना लेंगे।
• नगड़ी थाना के सिपाही ने किया महिला से दुष्कर्म ।
• ढाई साल में महिला प्रताड़ना के 2431 केस सामने आये हैं।
किसान विरोधी सरकार
• हेमंत सरकार किसानों को लेकर प्रारंभ से ही निर्दयी रही है। सरकार की प्राथमिकता में गांव, गरीब और किसान कहीं नहीं है।
• सरकार बनते ही भाजपा सरकार द्वारा चालू की गई महत्वाकांक्षी कृषि आशीर्वाद योजना बंद कर किसानों को मिलने प्रत्यक्ष वाली लाभ से वंचित किया गया।
• इस साल भी प्रदेश में भयंकर सूखा पड़ा है। सूखापीड़ित किसान मदद की बाट जोह रहे हैं।
• किसानों का दो लाख रूपये तक ऋण माफी की वादाखिलाफी की गई। अब तक कितने किसानों का ऋण सरकार ने माफ किया।
• समर्थन मूल्य पर धान खरीद में झारखंड सरकार हर बार फिसड्डी साबित हुई है। धान कय केन्द्र खोलने में लेट लतीफी के कारण बिचौलियावाद हावी है। किसान मजबूरन औने-पौने दाम में बिचौलियों को धान बेचने को मजबूर होते रहे हैं। वाजिब किसानों तक सरकार की पहुंच ही नहीं है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में कृषि और किसानों के विकास के लिए बनी दर्जनाधिक योजनाएं फाइलों में ही दबी रह गई। वित्तीय वर्ष के अंत में योजनाएं मंजूर हुई परंतु किसान लाभ से वंचित रह गए।
• गिरिडीह में एसडीएम द्वारा रैयत का कॉलर पकड़कर बर्बाद करने की धमकी दी गई।
• भ्रष्टाचार से तंग आकर किसान जब आत्महत्या करने पहुंचें तो पुलिस ने सड़क पर घसीटकर पीटा।
• झारखंड में एमएसपी पर दलहन की खरीद नहीं, किसानों को क्षति । 
• कृषि, पशुपालन एवं गव्य विकास विभाग में 76 स्कीम 53 पर खर्च शून्य है। विभाग को 1754.56 करोड़ रूपए
का आवंटन, खर्च मात्र 13.54 करोड वित्तीय वर्ष 2022-23 का मात्र चार माह ही शेष है।
आदिवासी दलित विरोधी सरकार
• नगर निकाय चुनाव में मेयर सीट को आरक्षित करने में आदिवासी और दलित को लड़ाया। • आदिवासियों के लिए आरक्षित औद्योगिक भूमि को मुख्यमंत्री ने अपनी पत्नी के नाम से आवंटित किया। 
• हेमंत सरकार ने जनजाति परामर्शदात्री समिति (टीएसी) को विवादित बना दिया।
• सीएनटी एसपीटी एक्ट का सर्वाधिक उलंघन कर शिबू सोरेन परिवार ने गरीबों के जमीन को हड़पा है।
• मुख्यमंत्री के गृह जिले साहिबगंज के तालीझारी थाने में 24 फरवरी, 2022 को पुलिस पिटाई से देबू तुरी नामक दलित व्यक्ति की मीत हुई।
• जमशेदपुर के साकची थाने की पुलिस द्वारा कार्तिक मुखी नामक एक दलित युवक की इतनी पिटाई की गई कि उसका पेट का टांका तक खुल गया।
• भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज की न्यायिक जांच की मांग को लेकर कार्य स्थगन प्रस्ताव लाने पर पार्टी के दलित विधायक अमर कुमार बाउरी को अपमानित करना लोकतंत्र के मंदिर में सरकार का यह चेहरा दलित और आदिवासी विरोधी है। 
• पलामू के मुरूमातू के महादलितों को उनकी बस्ती में पलामू जिला प्रशासन बसा नहीं सका है। प्रशासन द्वारा महादलितों को उनकी मिट्टी से अलग बसाने की साजिश की जार ही है। मुस्लिम समुदाय के आगे जिला प्रशासन पूरी तरह लाचार और बेबस है।
• बालूमाथ स्वास्थ्य केन्द्र में एक आदिवासी को मरने के बाद गिड़गिड़ाने पर भी एम्बुलेंस तक नसीब नहीं हुआ। ठेले से शव भेजा गया।
• सरायकेला थाने में तीन दिनों से बंद नाबालिग आदिवासी मोहन मुर्मू ने बालमित्र कक्ष के बाथरूम में पुलिस प्रताड़ना से तंग आकर खुदकुशी कर ली।
• धनबाद के बेलगढ़िया बस्ती में 150 परिवार जिनमें 90 प्रतिशत आदिवासी, सिर्फ दो को ही पीएम आवास मिल पाया। आपकी सरकार आपके द्वारा कार्यक्रम में भी फार्म भरवाया गया था। 
• रांची स्मार्ट सिटी के मूसाटोली में आदीवासी सुहानी सांगा का घर तोड़ा गया।
• ईचागढ़ विधायक की भूमि पर कब्जा दिलाने गए सीओ ने आदिवासी खतियानधारी का टेटुआ दबाने का काम किया।
• जामताड़ा में भरी पंचायत में आदिवासी महिला को पीटा गया।
पिछड़ा विरोधी सरकार
हेमंत सरकार का पिछड़ा विरोधी चेहरा बेनकाब हो चुका है। राज्य सरकार ने अब तक सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाबजूद पिछड़ों के आरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए ट्रिपल टेस्ट कमिटी का गठन नहीं किया है। पिछली भाजपा सरकार के प्रयासों पर भी हेमंत सरकार ने पूर्ण विराम लगा दिया और आज 27 प्रतिशत आरक्षण देने का नाटक कर रही है।
• बिना ओबीसी आरक्षण के पंचायत चुनाव कराया गया।
• विशेष सत्र बुलाकर ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण का लॉलीपॉप थमा ने वाली हेमंत सरकार का चेहरा बेनकाब हो चुका है। नगर निगम चुनाव में ओबीसी के लिए एक सीट भी आरक्षित नहीं किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
• तुष्टिकरण और धर्मांतरण को बढ़ावा देनेवाली सरकार हेमंत सरकार ने तुष्टिकरण की सारी सीमाएँ लांघ दी है जिसके कारण राज्य में धर्मांतरण का खेल धड़ल्ले से जारी है। यह सरकार गरीबों के जान-माल की क्षति और मॉबलीचिंग जैसी बारदातों को भी तुष्टिकरण के चश्में से देखती है।
● 04 जनवरी, 2022 को सिमडेगा कोलेबिरा में 25 साल के दलित युवक संजू प्रधान को पुलिस की मौजूदगी में जिंदा जला दिया गया। 
• 06 फरवरी 2022 को बरही में सरस्वती पूजा विसर्जन के दिन शांतिप्रिय समुदाय के द्वारा रूपेश पांडेय की हत्या की जाती है।
• राज्य के मंत्री हफीजुल हसन द्वारा शर्मनाक बयान दिया जाता है कि हमारा 20 प्रतिशत घर टूटेगा तो आपका 80 प्रतिशत। 
• गढ़वा के मिडिल स्कूल में 75 प्रतिशत मुस्लिम आबादी होने का हवाला देकर प्रार्थना पद्धति बदली गयी।
• जामताड़ा के 100 से अधिक विद्यालयों में रविवार की बजाय शुक्रवार को छुट्टी, कई स्कूल के नाम के आगे
उर्दू शब्द जोड़ा गया जिसे राज्य सरकार अभी तक नहीं हटा पायी।
• विधान सभा में आवंटित नमाज कक्ष पर बनी कमिटी का निर्णय लगभग दो साल बीत जाने के बाद भी लंबित है।
• झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में घुसपैठियों को निकालने की याचिका का विरोधकर अपनी मंशा को उजागर करने का काम किया। 
• राची में मेन रोड स्थित हनुमान मंदिर पर विशेष समुदाय के उपद्रवियों द्वारा हमला कर रांची को जलाने की कोशिश की गई। इस मामले में यह सरकार सच सामने नहीं आने देना चाहती है मेन रोड हिंसा की जांच रोक दी गई। हाईकोर्ट को कहना पड़ा कि क्यों ना मामले की सीबीआई जांच कराई जाए।
• रांची उपद्रव में घायल नदीम को हवाई जहाज से भेजा, अंकिता के लिए दुमका से रांची लाने तक की व्यवस्था
नहीं हो पाती है। अंकिता के पिता 12 घंटे तक पैसे का जुगाड करते रहे।
• अंकिता ने अपने बयान में उम्र 17 साल लिखवाया, लेकिन दुमका पुलिस ने छेड़छाड़ कर उसे 19 साल बना दिया।
• दबंगों ने मदरसे की जमीन बता पलामू में 50 महादलित परिवार का घर तोड़ा गया, उन्हें गांव से जबरन निकाल दिया गया। 
• सिमडेगा विधायक द्वारा एक युवक पर मतांतरण करने का दबाव डालने का मामला भी सामने आ चुका है।
 • पशु तस्करों को खुली छूट मिली हुई है। गो-तस्करों के खिलाफ शिथिलता बरतने के मुख्यमंत्री द्वारा दिए आदेश के बाद गोतस्करों के हौसले काफी बुलंद हैं। अब तो मुख्यमंत्री गो तस्करों पर कार्रवाई नहीं करने का आदेश भी दे चुके हैं यह तुष्टिकरण की पराकाष्ठा है। 
• इसी गो तस्करों की काली करतूतों की कीमत राज्य को तेजतर्रार महिला दारोगा संध्या टोपनो की हत्या के रूप में चुकानी पड़ी है। सरकार द्वारा इस धंधे पर सख्ती बरतने की बजाय नरमी दिखाना शर्मनाक है। 
● देश में सर्वाधिक दंगे का सेहरा झारखंड के सर है। 378 सांप्रदायिक दंगे में 100 केवल झारखंड में तुष्टिकरण की नीति के कारण हेमंत सोरेन सरकार ने झारखंड को दंगों की राजधानी बना दिया। राज्य में नेटवर्क मार्केटिंग की तर्ज पर अलग-अलग प्रलोभन देकर मतांतरण का खेल चला रही हैं मिशनरियांआदिवासी और दलित इनके लिए साफ्ट टारगेट बने हुए है। हाल ही में हजारीबाग में 5 बिरहोर परिवारों के 20 लोगों का मतांतरण कराया गया। 
• संथाल में तेजी से बदल रही है डेमोग्राफी। दुमका, पाकुड़, साहिबगंज समेत संथाल में मजबूत हो रही बांग्लादेशी कनेक्शन की जड़ें बांग्लादेशी कौडियों के भाव खरीद रहे जमीन, चला रहे खुले आम अनैतिक गतिविधियां । 
• धनबाद के बलियापुर के आमझर में आधा दर्जन परिवारों को प्रलोभन देकर कराया गया मतांतरण ।

ध्वस्त बुनियादी सुविधाएं
सड़क सड़कें राज्य की जीवन रेखा होती हैं लेकिन पिछले तीन वर्षों में सड़कों की स्थिति दयनीय हो गयी है। सुदूरवर्ती गांवों की बात क्या करें यहां तो राजधानी की सड़कें भी जर्जर और गड्ढों से भरी पड़ी है। • झारखंड में पीएमजीएसवाई का हाल बुरा है। इस वित्तीय वर्ष में 6 माह से अधिक समय में मात्र 197 किलोमीटर सड़क का निर्माण हुआ है। यानि हर दिन सिर्फ 1 किमी सड़क का निर्माण रांची, गोड्डा, देवघर, जामताड़ा में तो एक किलोमीटर भी सड़क का निर्माण नहीं।
• राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में केंद्र द्वारा दिए गए लक्ष्य को 119 किलोमीटर खुद ही कम कर दिया। बिजली बिजली जनजीवन को सर्वाधिक प्रभावित करता है लेकिन राज्य की जनता घोर बिजली संकट से जूझ रही है। प्रदेश की राजधानी में भी ढिबरी युग आ गया है।
• सरकार के कुप्रबंधन ने बिजली संकट को बढ़ाने का काम किया है। स्थिति यह है कि उनकी सहयोगी पार्टी के विधायक ही ग्रिड तोड़ने की धमकी तक देते हैं। 
• सरकार द्वारा 100 यूनिट बिजली फ्री देने की घोषणा टाय-टांय फिस्स साबित हुई है पैसे से भी निर्वाध बिजली 1 दूर की कौड़ी है। 
• झारखंड में 10 प्रतिशत भी अंडरग्राउंड केबलिंग का काम नहीं हुआ।
• विभागीय सुस्ती के कारण राजधानी में कवर तार का काम आधा अधूरा है 5000 किमी तक लगाना है केबल, अब तक केवल 1800 किमी ही लग पाया। आए दिन गंभीर हादसे घटित होते रहते हैं। बिजली विभाग की लापरवाही के कारण घर की छत पर तिरंगा फहराने के क्रम में काके में तीन लोगों की मौत हो गई। 
• अघोषित बिजली कटौती से लोग हलकान, कारोबार एवं खनन कार्य प्रभावित धनबाद के व्यवसायियों ने तो दुकानें बंद कर चानी सीएम को सौपने तक का निर्णय कर लिया।
• 20 फीसदी बिजली दर बढ़ाने का अहितकारी प्रस्ताव लाया गया।
• लगातार बिजली कटौती से 18000 से अधिक लघु एवं कुटीर उद्योग पर प्रतिकूल असर पड़ा। 60000 कामगारों का चौका चूल्हा बंद होने की नौबत तक आ गई।
• जे बी वी एन एल की कटौती से परेशान आदित्यपुर क्षेत्र की 500 में से 400 से ज्यादा कंपनियों ने सरकारी बिजली कनेक्शन छोड़ दिया।
पेयजल
• झारखंड में जल जीवन मिशन के तहत हर घर में पाइप लाइन से जल पहुंचाने की योजना का हश्र काफी बुरा है। 2024 तक लगभग 60 लाख घरों में नल से जल पहुंचाना लक्ष्य है। अभी तक प्रगति कुछ जिलों में सिर्फ 17 प्रतिशत एवं कई जिलों में 7 से 10 प्रतिशत, जो राष्ट्रीय औसत से 26 प्रतिशत पीछे चल रहा है।
• हर घर नल में भी झारखंड बहुत पीछे है। 2022-23 में 22 लाख ग्रामीण घरों में नल से जल पहुंचाना था लेकिन 4.46 लाख घरों में ही जल पहुंचाने में सफलता मिली है। इसी प्रकार 24 जिले के 61.21 लाख घरों में16-16 घरों में ही जल पहुंचा है।
शिक्षा
• 3 वर्षों में कक्षा 1 से लेकर 12 तक में 5 लाख विद्यार्थी बढ़ गए जबकि 4000 शिक्षक कम हो गए। राष्ट्रीय औसत 26 विद्यार्थी पर शिक्षक का तो झारखंड में 55 विद्यार्थी पर एक शिक्षक हैं। 
• 24 अगस्त को कैबिनेट में 50000 शिक्षकों की नियुक्ति की स्वीकृति के तीन माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ नहीं हुई।
• राज्य में 90 हजार शिक्षकों के पद रिक्त हैं।
राज्यस्तरीय खेलो प्रतियोगिता में किरकिरी किसी से छुपी नहीं है। राज्य भर से बच्चे खेलने पहुंचे पर पैरों में जूते तक नहीं।
• शिक्षा को लेकर विख्यात नेतरहाट विद्यालय भी गोलमाल के कारण हुआ कलकित • 5000 से अधिक विद्यालय एक शिक्षक के भरोसे हैं। अधिकांश हाई स्कूल में पांच मुख्य विषयों के शिक्षक तक नहीं हैं। जो शिक्षक हैं वे मूल कार्य छोड़ गैर-शैक्षिणिक कार्य में व्यस्त हैं।
• झारखंड में ज्ञानोदय योजना दम तोड़ रही है। राज्य के 1000 स्कूलों में खरीदने थे आलमारी जूट बैग 5 माह में आपूर्तिकर्ता तक नहीं मिले।
• चालू वित्तीय वर्ष में खाता नहीं खुलने और आधार लिंक नहीं होने से 18 लाख बच्चे पोशाक और छात्रवृत्ति से वंचित हुए। 
• राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम का पालन नहीं शिक्षकों की भारी कमी का खामियाजा दलित और आदिवासी बच्चे भुगत रहे हैं। कई स्कूल पारा शिक्षकों के भरोसे 2 दिन अंडा भी नहीं मिल रहा है।
 • झारखंड की आठों यूनिवर्सिटी और 65 कॉलेज में उच्च शिक्षा अनुबंध पर अस्थाई शिक्षको के भरोसे है पठन पाठन अनुबंध शिक्षकों की संख्या स्थाई के मुकाबले 55 प्रतिशत। 
● राज्य के 320 प्लस टू विद्यालयों में कॉमर्स के एक भी छात्र नहीं हैं और सरकार 289 कॉमर्स के शिक्षकों की तैयारी में वहीं राजनीति विज्ञान और समाजशास्त्र पढ़ने वालों की संख्या 50000 है परंतु वहां शिक्षक के पद ही सृजित नहीं हैं। 
• शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो जी सरकारी विद्यालयों की व्यवस्था को निजी विद्यालय से टॉप करने का दावा करते नहीं अघाते हैं। जबकि हकीकत है कि राज्य तो छोड़िए वे अपने क्षेत्र के विद्यालय की ही व्यवस्था को दुरुस्त करने में असफल रहे।
 • छात्राओं की साइकिल बांटने की योजना टेंडर में फंसी हुई है।
• चालू वित्तीय वर्ष में खाता नहीं खुलने और आधार लिंक नहीं होने से 18 लाख बच्चे पोशाक और छात्रवृति से वंचित हुए।

सिंचाई
 • हेमंत सरकार को सिंचाई एवं जल संचय में कोई रूचिन हीं है और न ही इनकी प्राथमिकता में किसान एवं कृषि के लिए सिंचाई उपलब्ध कराना है। 
• राज्य सरकार ने तभी तो भाजपा सरकार के समय जो सिंचाई बजट राज्य का लगभग 25 सौ करोड़ रुपये वार्षिक था, उसे हेमंत सरकार ने घटा कर लगभग आज आधा यानि 14 सौ करोड़ रुपये कर दिया है।
• वर्तमान सरकार में कई सिंचाई परियोजनायें शिथिल पड़ी है या बंद है। भाजपा सरकार द्वारा स्वीकृत कनहरबराज योजना (पूरे पलामू जिले को सिंचाई उपलब्ध कराने वाला) को सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है। 
मनरेगा का हाल बेहाल
• चालू वित्तीय वर्ष में मनरेगा की योजना में प्रगति काफी धीमी रही। जून तक राज्य के 4391 पंचायतों में 1517 पंचायत में मनरेगा का खर्च शून्य रहा। संताल परगना के 1013 पंचायतों में से 369 पंचायतों में मनरेगा की फूटी कौड़ी भी खर्च नहीं हो पाई।
• झारखंड में मनरेगा की स्थिति दयनीय किसी भी जिले में 10 प्रतिशत लक्ष्य पूर्ण नहीं 17 जिले ऐसे जहां 3 प्रतिशत मजदूरों को भी नहीं मिला 100 दिनों का रोजगार। • लातेहार के मनिका में बिना ग्राम सभा किए 12 पंचायतों में 2522 योजनाओं की इंट्री कर पुर्जी पर 24 करोड के काम का बंदर बांटकर लिया गया अधिकारी, नेता, पंचायत प्रतिनिधि, बिचौ लिया. कंप्यूटर ऑपरेटर आदि ने लगाई भ्रष्टाचार की गंगोत्री में डुबकी। 
बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था 
• राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह बदहाल है। ना पर्याप्त अस्पताल है ना पर्याप्त डॉक्टर। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों सीएचसी में स्पेशलिस्ट डॉक्टर के 73 फीसदी पद खाली हैं स्वीकृत 684 डॉक्टर में 186 डॉक्टर रही हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और सीएचसी में फार्मासिस्ट के 51 प्रतिशत, लैब टैक्निशियन के 36 प्रतिशत, नर्सिंग स्टाफ के 61 प्रतिशत पद खाली है। 74 प्रतिशत उप स्वास्थ्य केन्द्र कम हैं।
• माननीय उच्च न्यायालय द्वारा रिम्स के बदहाल व्यवस्था पर कई अवसरों पर सख्त टिप्पणी की है। 
• भाजपा सरकार में प्रारंभ की गई 108 एम्बुलेंस सेवा हेमंत सरकार की उदासीनता के कारण बदहाल, अब बंद होने की कगार पर है।
• बोकारो सदर अस्पताल के बाथरूम में बंद कर 15 लाख की जेनरिक दवाएं सड़ा दी गई। 
• गढ़वा सदर अस्पताल में आई गर्भवती महिला को खून के लिए 6000 रूपए चुकाने पड़े। जेवर तक गिरवी रखना पड़ा।
• हाल ही में रिम्स में मानवता को शर्मसार कर दिया गया। एक ही बेड पर शव और मरीज दोनों को साथ रखा गया। एक मासूम की डायलिसिस के लिए जाते समय लिफ्ट में अटकने से मौत हो गई।
• अन्य क्षेत्रों की बात कौन कहे राज्य के सीएम के निर्वाचन क्षेत्र स्थित साहेबगंज के सदर अस्पताल में डॉक्टर के इंतजार में डेढ़ घंटे तक दर्द से कराहती रही गर्भवती महिला की समय से इलाज नहीं मिलने पर मौत हो गई।
 • जना मोड में अस्पताल से शव लाने के लिए एम्बुलेंस नहीं मिलने पर आदिवासी महिला ने घर का सामान बेचा तब पति का शव लेकर गांव पहुंची।
• बोकारो थर्मल में आदिवासी महिला ने बेटी को प्रसव के लिए भर्ती किया 32 हजार नहीं दिए तो 7 दिन बंधक
बनाकर रखा गया।
• गरीबों को सस्ती स्वास्थ्य सुविधा एवं दवाई उपलब्ध कराने की दृष्टि से केन्द्र सरकार द्वारा प्रारम्भ की गई जेनरिक दवाओं के प्रति चिकित्सकों की उदासीनता के कारण गरीबों को 10 गुणा महंगी दवा लिखी जा रही हैं।
• स्वास्थ्य व्यवस्था की हालत ये है कि रांची में प्रसुता को रांची में रात भर दौड़ाते रहे सरकारी अस्पताल की चक्कर लगाती रही, परिणाम नवजात अनाम की सिस्टम ने जान ले ली। रिम्स में बच्ची के ऑपरेशन के लिए डॉक्टर ने मागे 30 हजार नहीं देने पर लौटा दिया। एमजीएम में बेड नहीं मिलने पर मरीज के पिता फोल्डिंग लेकर पहुंचें।
• लातेहार के हेरहज अस्पताल में एएनएम ने घूस में ली कान की बाली, तब कराया प्रसव केन्द्रीय योजनाओं को अटकाना, भटकाना और लटकाना
• प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना का बहुत बुरा हाल है। सताल में 50 फीसदी पीएम आवास भी पूरा नहीं हुआ है। 
• एक तरफ केन्द्र सरकार देश की पूरी आबादी को आयुष्मान से जोड़ने को लेकर कृत संकल्प है वहीं झारखंड सरकार की उदासीनता और लापरवाही के कारण प्रदेश में इस योजना पर ग्रहण लगता जा रहा है। इसे विडम्बना नही तो क्या कहा जाए कि जिस झारखंड की बिरसा भगवान की पावन धरती से आजाद भारत की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी योजना के रूप में आयुष्मान भारत योजना की शुरूआत की, उसी राज्य में इसका बुरा हाल है। इस योजना में भ्रष्टाचार किसी से छुपा नहीं है।
• प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में झारखंड में महालूट मची है। चाहे चतरा में गोदाम से 1400 टन अनाज यानि 3.20 करोड़ के अनाज गायब होने का मामला हो या सिमरिया से 4800 क्विंटल अनाज गायब होने की बात हो या फिर धनबाद में 13000 फर्जी कार्ड बनाकर राशन बेचने का मामला हो या फिर साहिबगंज में योजना का 22.716 क्विंटल अनाज लापरवाही के कारण लैप्स होने से 5 लाख गरीबों को अनाज नहीं मिलने का मामला हो। यह तो चंद उदाहरण हैं. ऐसे मामलों की लंबी फेहरिस्त है।

संवैधानिक संस्थाओं पर हमला
• मुख्यमंत्री द्वारा राज्यपाल के खिलाफ उच्चन्यायालय में याचिका दायर कर लोकतंत्र को कलंकित किया गया। यह देश के इतिहास का पहला मामला है जब किसी राज्य के सीएम ने ऐसा किया हो। 
• सीएम के बाद उनके दुलरु आप्रतिनिधि एक कदम आगे चलते हुए ईडी के खिलाफ ही कोर्ट पहुंच गए। चोरी और सीनाजोरी का इस से अनूठा उदाहरण शायद दूसरा नहीं होगा।
• टीएसी के नियमों और नियमावली पर सहमति के बगैर टीएसी की बैठकों पर राज्यपाल को आपत्ति राज्यपाल की सहमति और बिना परामर्श के सरकार ने जारी की है नई नियमावली ।
• राज्यपाल से बगैर अनुमति लिए उनके प्रधान सचिव को बदला गया। पूर्व में भी एडीसी का इसी प्रकार किया जा चुका है तबादला। अनुमति लेने की परंपरा को हेमंत सोरेन की सरकार ने तोड़ने का काम किया।
• राज्यपाल द्वारा निगरानी मामलों में फंसे आईपीएस के नाम मांगने पर राज्य सरकार ने दारोगा और इंस्पेक्टर का नाम भेजा।
• सदन से पास होने के बावजूद उत्पाद नीति की फाईल राज्यपाल को नहीं भेजी गई। राज्यपाल के द्वारा रिमाइंडर के बाद भेजी गई फाईल ।
• राज्य सरकार द्वारा झारखंड उत्पाद विधेयक 2022 पर राज्यपाल की आपत्ति को खारिज कर बिना संशोधन सदन में पेश करने की तैयारी है। राज्यपाल ने 8 बिन्दुओं पर आपत्ति जताते हुए विधेयक को सरकार को वापस लौटाया था।
 • चुनाव आयोग के निर्देश के बाद भी देवघर डीसी की करतूत और उन पर राज्य सरकार की मेहरबानी किसी से छिपी नहीं है।

1932 खतियान आधारित स्थानीय एवं नियोजन नीति 
• भाजपा झारखंडी भावनाओं के अनुरूप स्थानीय नीति बनाने की पक्षधर रही है। वर्तमान सरकार को यह अधिकार है कि संकल्प जारी कर स्थानीय नीति बना सकती है लेकिन इनकी मंशा साफ नहीं है। जनता को दिग्भ्रमित करने के लिए नौवीं अनुसूची का बहाना बना रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा में कहा था कि 1932 के खतियान आधारित नीति बनी तो कोर्ट खारिज कर देगा।
मद्य निषेध विभाग बना लूट का अड्डा
• उत्पाद विभाग में हेमंत सरकार द्वारा बिना नियम कानून के अपने चहेते कम्पनी को शराब के ठेके देने के लिए भारी गढ़ बड़ी की गई। जिसके कारण राज्य को राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। झारखंड शराब बिक्रेता संघ द्वारा लिखित में सलाना 2500 करोड़ रुपये का राजस्व की गारंटी देने के बाद भी स्थानीय व्यवसायियों को बेरोजगार कर बिना गारंटी लिए अपने चहेते छत्तीसगढ़ के ठेकेदार को राज्य का राजस्व नुकसान कर अपना स्वयं का राजस्व बढ़ाने के लिए काम दिया गया है।
• बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के द्वारा राजस्व की गारंटी लिए जाने के सुझाव को भी खारिज कर बिना गारंटी लिए अपनेचहेते को काम दिया। विभिन्न कम्पनियों को बिना बैंक गारंटी लिए हुए पुन ठेके का काम कई जिलों में दिया गया, जो समझ से परे है। 
• उत्पाद विभाग में भारी घोटाले के कारण नवम्बर माह तक ही लक्ष्य से लगभग 600 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान राज्य को हुआ है। 
• नई शराब नीति लागू होने के बाद से ही पूरे प्रदेश में धडल्ले से प्रिंटरेट से अधिक कीमत पर शराब की खुले आम बिकी हो रही है। प्रिंट रेट से अधिक कीमत पर शराब बेच हर महीने 70 करोड़ की अवैध कमाई की जा रही है।
• नामी ब्रांड की बोतल में भरकर खुले आम बेची जा रही है बंगाल की सस्ती शराब।

• नकली शराब के कारोबार के लिए सीतारामडेरा का शराब माफिया 'जमशेदपुर के अफसरों को हर माह देता था। 2.93 लाख रूपए नजराना।

ट्रांसफर पोस्टिंग बना संगठित उद्योग

• हेमंत सरकार में सारे उद्योग धंधे बंदी के कगार पर हैं लेकिन तबादला उद्योग तेजी से फल-फूल रहा है। मनचाही पोस्टिंग के लिए बिचौलिये रोज बोली लगा रहे है। तबादला करवाने एवं रोकवाने में लाखों करोड़ों की बोली लग रही है। 
● पंचायत चुनाव के दौरान भी 32 बीडीओ का तबादला किया गया। • श्रम विभाग के सहायक निदेशक को दुमका से लेकर चाईबासा तक के 18 पदों का प्रभार सौंपा गया।

• मृत अफसर का भी तबादला किया गया। सहकारिता विभाग में सप्ताह में 650 का तबादला किया गया।

वित्तीय कुप्रबंधन

• चालू वित्तीय वर्ष में झारखंड सरकार केवल 35 प्रतिशत राशि ही खर्च कर पाई है। • हेमंत सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन के कारण झारखंड का बंटाधार हो गया है। हर क्षेत्र में विकास करने में राज्य सरकार नाकाम साबित हुई है। हेमंत सरकार केन्द्र पर कर हस्तांतरण और सहायता अनुदान नहीं देने का बेबुनियाद आरोप लगाती रहती है। वास्तविकता यह है कि रघुवर सरकार के दौरान मिली केन्द्रीय सहायता से कही अधिक राशि केन्द्रीय सहायता के रूप में हेमंत सरकार के कार्य काल में मिली है। 2009 से 2014 के दौरान यूपीए सरकार ने 35.998 करोड़ कर हस्तांतरण किया और 21,069 करोड़ सहायता अनुदान के रूप में दिया। वहीं 2014 से 2019 के बीच रघुवर दास के कार्यकाल में एनडीए की सरकार ने 89,648 करोड़ कर हस्तांतरण किया जबकि 44,641 करोड़ सहायता अनुदान के रूप में दिया। 2019 से 2022 के बीच तीन साल में ही केन्द्र सरकार द्वारा झारखंड को 62,315 करोड कर हस्तांतरण किया और 45,382 करोड़ बतौर सहायता अनुदान के रूप में दिया पूर्ववर्ती सरकार से अधिक राशि हेमंत सरकार को दी गई। इस प्रकार केन्द्र सरकार पर हेमंत सोरेन सरकार का आरोप बेबुनियाद है।

• डी एम एफ टी फंड का उपयोग पारदर्शी तरीके से होने की बजाय इसमें केवल लूट-खसोट किया जा रहा है। समाज कल्याण के लिए सदुपयोग नहीं होना दुखद है।

विकास कार्य ठप्प

हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार बनते ही राज्य में विकास कार्य पूरी तरह ठप्प पड़ गया है।

● राज्य में विकास कार्यों की गति काफी धीमी है। चालू वित्तीय वर्ष में केवल 35 प्रतिशत राशि ही खर्च हो पाई। 57259 करोड़ के योजना बजट में 17120 करोड़ ही खर्च कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता, नगर विकास और उच्च तकनीकी शिक्षा विभाग में 10 प्रतिशत भी खर्च नहीं।

• कृषि, पशुपालन एवं गव्य विकास विभाग में कुल 76 स्कीम, जिसमें 53 पर खर्च शून्य विभाग को 1754.56 करोड का आवंटन, खर्च मात्र 13.54 करोड वित्तीय वर्ष का अब मात्र 4 माह ही शेष बचा है।

• बालू संकट के कारण स्मार्ट सिटी पर ब्रेक लगा। एल एंड टी द्वारा सरकार को पत्र तक लिखना पड़ा कि डेढ़ गुणा दाम पर बालू खरीदना संभव नहीं, काम बंद होना तय है।

● रांची में बालू की किल्लत से 900 करोड़ का कारोबार ठप्प हुआ। 
• बालू संकट के कारण रांची राजधानी में 37 अरब का रुका। फ्लाई ओवर स्मार्ट सिटी के बाद हटिया लाईन के दोहरीकरण का काम प्रभावित हुआ।

• बालू की कमी से पीएन आवास व पुल-पुलिया का काम बंद, 15 लाख मजदूर बेरोजगार हो गए।

• कांग्रेसी विधाय कभी आपत्ति जता चुके हैं कि ढाई साल से अधिक का वक्त बीत चुका है। राज्य में कुछ काम हो नहीं रहा, हमलोग जनता के पास कैसे जाए।

• दाखिल खारिज के 65 हजार से अधिक मामले लंबित |

• राज्य सरकार जनता दरबारों में मिले आवेदनों को सड़कों पर फेंक देती है।

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राज्य सरकार की विफल योजनाएं

• राज्य सरकार की अदूरदर्शिता के कारण पेट्रोल सब्सिडी योजना पूरी तरह फेल हो चुकी है। राज्य सरकार ने इस योजना को लेकर काफी प्रचार-प्रसार किया परंतु यह सफल नहीं हुई। क्योंकि यह योजना ही कारगर नहीं है। सरकार को बताना चाहिए कि इसके प्रचार-प्रसार पर कितनी राशि खर्च हुई और कितने इसका लाभ मिला। राज्य सरकार को जिद छोड़कर इस योजना को तत्काल बंद कर बैट कम कर आमलोगों को सीधी राहत देनी चाहिए।

• दाल-भात योजना की विफलता ने गरीबों को सस्ते भोजन से वंचित किया 40 लोगों को भोजन कराया जाता हैं जबकि 400 लोगों के लिए आवंटन मिलता है।

• आंगनबाड़ी केन्द्रों की विफलता से एनिमिया से शिकार महिलाओं और कुपोषित बच्चों के दर में झारखंड अब्बल है।

• सोना सोबरन धोती, साडी, लुंगी योजना में भ्रष्टाचार चरम पर है। 90 रुपये की साड़ी 190 रु में खरीदी गयी। 
• आयुष्मान योजना का नाम बदलने पर भी गरीबों को ईलाज से वंचित किया जा रहा है।