रांची:
सम्मेद शिखर मामले (Samed Pinnacle Cases) को लेकर झारखंड सरकार के पूर्व पर्यटन, कला संस्कृति मंत्री अमर बाउरी (Amar Baori) ने हेमंत सरकार को घेरा है। अमर बाउरी ने कहा है कि झारखंड की हेमंत सरकार लोगों को गुमराह करने का काम कर रही है। झारखंड सरकार का कहना है कि रघुवर दास की सरकार के दौरान पारसनाथ को पर्यटन स्थल घोषित करने का कार्य किया गया है। जबकि सच्चाई इसके उलट है। रघुवर दास सरकार ने हमेशा ही सम्मेद शिखरजी की पवित्रता को अक्षुण्ण रखने के लिए कार्य किया है।

बीजेपी ने बनाया था पूजनीय तीर्थ स्थल
अमर बाउरी ने आगे कहा कि हमारी सरकार ने इसे तीर्थ स्थल घोषित किया था। उन्होंने रघुवर सरकार के कार्यकाल में जारी पर्यटन, कला संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के लेटर नंबर 1391 के तहत कार्यलाय ज्ञापांक जारी किया था। इसमें कहा गया कि पारसनाथ सम्मेद शिखरजी पर्वत सदियों से जैन धर्मावलंबियों का विश्व प्रसिद्ध पवित्र एवं पूजनीय तीर्थ स्थल है। इसकी पवित्रता अक्षुण्ण रखने हेतु सरकार प्रतिबद्ध है।"

हेमंत सरकार ने बनाया पर्यटन स्थल
विवाद हेमंत सोरेन सरकार द्वारा 17 फरवरी 2022 को जारी झारखंड गजट (संख्या - 117) के असाधारण अंक के प्रकाशन के बाद शुरू हुआ है। इसमें पर्यटन कला संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के 28 दिसंबर 2021 के संकल्प (संख्या पर्य. / नि./यो.- 07/202005/2021) में झारखंड पर्यटन नीति, 2021 की घोषणा की थी। इसमें कहा गया कि “झारखंड राज्य में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यहां प्रकृति द्वारा कितने ही आकर्षक पर्यटन स्थल वरदानस्वरूप प्राप्त हुए हैं। यहां के मनमोहक जलप्रपात, जंगल, जलाशय व दृश्य देश-विदेश से अधिकाधिक पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। राज्य में विभिन्न जनजातियां, जिनकी अलग-अलग संस्कृति है भी ग्रामीण पर्यटन की संभावना को बढ़ाते हैं। धार्मिक दृष्टिकोण से राज्य के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल बाबा बैद्यनाथधाम मन्दिर (देवघर), पारसनाथ मंदिर (गिरिडीह), मां भद्रकाली मंदिर (ईटखोरी), रजरप्पा मां छिन्नमस्तिक मंदिर (रामगढ़), कौलेश्वरी मंदिर (चतरा), बासुकीनाथ धाम (दुमका) राज्य में धार्मिक पर्यटन की संभावना को बढ़ाते हैं। इसी प्रकार राज्य में खनन पर्यटन, साहसिक पर्यटन, स्वास्थ्य पर्यटन आदि की भी अपार संभावना है।"

पवित्रता अक्षुण्ण बनायी रखी जाये
अमर बाउरी ने कहा कि इसी संकल्प के माध्यम से हेमंत सरकार ने सम्मेद शिखरजी को धार्मिक पर्यटन स्थल घोषित किया था। सारा विवाद इसके बाद से ही शुरू हुआ है। मेरी हेमंत सरकार से अपील है कि सम्मेद शिखरजी की पवित्रता को ध्यान में रखते हुए इसे पर्यटन, कला संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के ज्ञापांक संख्या 1391, दिनांक 22.10.2018 के तहत तत्काल तीर्थ स्थल घोषित किया जाये और इसकी पवित्रता अक्षुण्ण बनायी रखी जाये।