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SIR के बाद चुनाव से गिरिडीह में BJP को आस, सहानुभूति JMM का आधार

SIR के बाद चुनाव से गिरिडीह में BJP को आस, सहानुभूति JMM का आधार

द फॉलोअप, रांची
झारखंड में एसआईआर 2026 पूर्ण होने के बाद पहला चुनाव गिरिडीह में होना तय है। जेएमएम के वरिष्ठ नेता और राज्य के मंत्री सुदिव्य सोनू के निधन के बाद यह सीट खाली हुई है। माना जा रहा है कि नवंबर माह में इस सीट को लेकर चुनाव की घोषणा हो सकती है। जेएमएम की तरफ से सुदिव्य सोनू की पत्नी श्वेता शर्मा का उम्मीदवार बनना तय माना जा रहा है, वहीं बीजेपी के अंदर प्रत्याशी को लेकर अभी से खींचतान देखने को मिल रही है। अब एसआईआर के बाद चुनाव से भाजपा की आस बढ़ी है। झामुमो को सहानुभूति लहर की दरकार है।


बीजेपी का भरोसा: एसआईआर के बाद बढ़ा मतदान
गिरिडीह उपचुनाव को लेकर बीजेपी खेमे में सबसे बड़ा भरोसा यह है कि एसआईआर के बाद ज्यादातर चुनावों में मतदान प्रतिशत में इजाफा देखा गया है, और पार्टी इसे अपने पक्ष में मान रही है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण बिहार विधानसभा चुनाव 2025 है। एसआईआर के तुरंत बाद हुए इस चुनाव में अब तक का सबसे अधिक 66.91 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ, जो पिछले चुनाव से करीब नौ प्रतिशत ज्यादा था। नतीजा यह रहा कि सत्तारूढ़ एनडीए ने 243 में से 202 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया, जिसमें बीजेपी 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। बीजेपी नेताओं का तर्क है कि जिस तरह बिहार में एसआईआर के बाद "साफ" हुई मतदाता सूची और बढ़ा मतदान प्रतिशत एनडीए के पक्ष में गया, गिरिडीह में भी वैसा ही रुझान बन सकता है।


बीजेपी के भीतर उम्मीदवारी को लेकर खींचतान
पार्टी के अंदर अभी से टिकट को लेकर रस्साकशी शुरू हो गई है। एक सांसद की पसंद के तौर पर दिनेश प्रसाद यादव का नाम आगे चल रहा है, जो गिरिडीह के पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में कोडरमा लोकसभा क्षेत्र के सांसद प्रतिनिधि हैं। वहीं सुरेश साव के नाम की भी चर्चा है, लेकिन संगठन महामंत्री बदलने से इनके नाम पर मुहर लगना आसान नहीं दिख रहा। दो बार चुनाव हार चुके निर्भय शाहबादी के नाम पर भी आखिरी बार पार्टी में सहमति बनाने की कोशिश हो रही है।


जेएमएम के लिए राह इतनी आसान क्यों नहीं
2024 के विधानसभा चुनाव में जेएमएम के सुदिव्य कुमार सोनू ने भाजपा के निर्भय कुमार शाहबादी को महज 3,838 वोटों के अंतर से हराया था। जबकि उस वक्त हेमंत सोरेन के प्रति लोगों में सहानभूति थी। साथ हीं मईंया सम्मान योजना के लाभूकों की भी संख्या जेएमएम के पक्ष में थी। फिर भी यह अंतर इतना कम है कि बीजेपी इसे पाट लेने का दावा कर रही है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि मंत्री जी की बात अलग थी और उनकी पत्नी की बात अलग है। यहां के लोग मंत्री जी को अपना नेता मानते थे, जबकि उनकी पत्नी सिर्फ चुनाव में महिला मोर्चा के साथ दिखाई देती थीं, उनका उतना जमीनी एक्सपोजर नहीं है। ऐसे में जेएमएम के सामने दोहरी चुनौती है । एक तरफ बेहद कम अंतर वाली सीट को बचाए रखना, दूसरी एसआईआर के बाद बदलते चुनाव परिणाम को निर्मूल साबित करना।  झामुमो को भरोसा है कि सुदिव्य सोनू के असमय निधन से उत्पन्न सहानुभूति से वह सभी चुनौतियों का सामना कर लेगा।

Tags - SIR Giridih by-election JMM BJP