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निर्णय अब कागज़ों पर नहीं, ज़मीन पर दिखेंगे- रिम्स GB की बैठक में सुधार के आदेश देते  हुए बोले मंत्री इरफान अंसारी

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रांची 
राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स (RIMS) को ‘मॉडल हॉस्पिटल ऑफ झारखंड’ बनाने की दिशा में आज बड़ा कदम बढ़ा। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की अध्यक्षता में हुई गवर्निंग बॉडी (GB) की अहम बैठक में कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। बैठक में सांसद संजय सेठ, विधायक सुरेश बैठा, रिम्स निदेशक सहित वरिष्ठ सदस्य मौजूद रहे। एजेंडा था — रिम्स को आधुनिक, पारदर्शी और जनहितैषी अस्पताल के रूप में विकसित करना।
बैठक में वेंटिलेटर की कमी पर चर्चा करते हुए मंत्री ने कहा कि “अब मरीजों की जान उपकरणों की कमी से नहीं जाएगी।” निर्णय लिया गया कि रिम्स को 100 नए वेंटिलेटर तत्काल उपलब्ध कराए जाएंगे।
एक मानवीय फैसला भी हुआ — अगर किसी मरीज की मृत्यु रिम्स में होती है, तो परिजनों को अंतिम संस्कार हेतु ₹5000 की सहायता राशि दी जाएगी। यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ। डॉ. अंसारी ने कहा, “मरीजों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हर काम पारदर्शिता के साथ और नियमों के अनुरूप होगा। रिम्स निदेशक और मैं एक टीम हैं — हमारा लक्ष्य सिर्फ जनता की सेवा है।”


बैठक में पुराने निर्णयों की समीक्षा के दौरान डॉक्टरों की उपस्थिति, निजी प्रैक्टिस, ओपीडी अनुशासन और सफाई व्यवस्था पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। मंत्री ने स्पष्ट कहा — “निर्णय अब कागज़ों पर नहीं, ज़मीन पर दिखने चाहिए।” अगली जीबी बैठक में नए भवन निर्माण, डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम और Patient Facilitation Centre की योजना पर चर्चा होगी।
मंत्री ने कहा, “रिम्स सिर्फ अस्पताल नहीं, बल्कि झारखंड की उम्मीदों का केंद्र है। हम इसे देश के सर्वश्रेष्ठ अस्पतालों की श्रेणी में लाना चाहते हैं। यहां इलाज सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि सेवा और संवेदना का प्रतीक बनेगा।” सरकार ने पारदर्शिता, जवाबदेही और मानवीय दृष्टिकोण के साथ स्वास्थ्य व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव लाने का संकल्प दोहराया। “हम रिम्स को जनता की उम्मीदों का अस्पताल बनाएंगे — जहां हर मरीज को सम्मान, हर परिवार को विश्वास और हर जरूरतमंद को सहारा मिले,” डॉ. अंसारी ने कहा।


 

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