द फॉलोअप, रांची
केशव महतो कमलेश की नई कमेटी की घोषणा के बाद कांग्रेस में घमासान जारी है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के पुत्र प्रशांत किशोर के बाद वरिष्ठ नेता और रांची विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे सुरेंद्र सिंह ने कोऑर्डिनेटर का पद दिए जाने को ठुकराते हुए इस्तीफा दे दिया है। प्रदेश अध्यक्ष को तीन पन्ने का पत्र लिखकर उन्होंने अपनी पीड़ा का बयान किया है। उसमें उन्होंने अब पार्टी का साधारण कार्यकर्ता की तरह काम करते रहने की बात कही है। इसके साथ ही उन्होंने अपने पत्र में प्रदेश अध्यक्ष और संगठन पर कई गंभीर सवाल भी खड़ा किया है। उन्होंने कहा है कि पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं के साथ जारी अन्याय को नहीं सुधारा गया तो प्रदेश अध्यक्ष और संगठन को झारखंड के कार्यकर्ताओं के सामूहिक आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।

सुरेंद्र सिंह ने अपने पत्र में कहा है कि कांग्रेस के खिलाफ लड़ने और बोलने वालों को उंचे पद दे दिए गए। उन्हें समन्वयक जैसे औपचारिक पद पर धकेल दिया गया, जो 40-42 वर्षों से कांग्रेस के लिए संघर्ष करते रहे हैं। संगठन में जमीनी और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की जगह चापलूसों का बोलवाला हो गया है। उन्होंने न कभी टिकट के लिए सौदेबाजी की और पद के लिए चापलूसी। अनुशासन कांग्रेस की आत्मा है, जिस पर नयी कमेटी के गठन से चोट पहुंची है। उन्होंने डरो मत का नारा देते हुए उम्मीद की है कि पार्टी नेतृत्व कांग्रेस के निष्ठावान कार्यकर्ताओं के साथ हुए अन्याय को संज्ञान लेगा।
