रांची
राजधानी रांची में रंगदारी मांगने के दो अलग-अलग मामलों में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। उग्रवादी संगठन TSPC और नीरज साहू गैंग के नाम पर लेवी मांगने वाले चार आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनके पास से कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड, नगद रकम और धमकी भरे पर्चे बरामद किए गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान उमेश मुंडा उर्फ दिनेश मुंडा, नितेश मुंडा, राम विजय लोहरा और पवन लोहरा के रूप में हुई है।

पहला मामला: ओरमांझी में TSPC के नाम पर धमकी
ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर ने बताया कि 22 अक्टूबर को ओरमांझी थाना क्षेत्र के एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 16 अक्टूबर की शाम उसे एक अज्ञात नंबर से कॉल आया था। कॉल करने वाले ने खुद को प्रतिबंधित संगठन TSPC का सदस्य बताया और कहा – “धुमकुड़िया भवन बनवा रहे हो, मैनेज करके चलो, नहीं तो जान से मार देंगे।” इसके साथ ही 40 हजार रुपये दो दिन के भीतर देने की मांग की गई थी।
पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन के निर्देश पर ग्रामीण एसपी के नेतृत्व में छापेमारी टीम बनाई गई। सिल्ली डीएसपी अनुज उरांव की देखरेख में टीम ने तकनीकी जांच और गुप्त सूचना के आधार पर उमेश मुंडा और नितेश मुंडा को गिरफ्तार किया।
दोनों आरोपी बुढ़मू थाना क्षेत्र के टोंगरीटोला चकमे के निवासी हैं। इनके पास से धमकी में प्रयुक्त मोबाइल, दो अतिरिक्त फोन, दो सिम कार्ड और ₹17,500 नगद जब्त किए गए। पुलिस के मुताबिक, ये दोनों आरोपी TSPC के नाम पर लोगों से वसूली करते थे।

दूसरा मामला: खलारी में नीरज साहू गैंग की करतूत
खलारी थाना क्षेत्र में भी रंगदारी मांगने का एक मामला सामने आया। 2 नवंबर को एक व्यक्ति ने पुलिस को बताया कि व्हाट्सएप कॉल और मैसेज के जरिए खुद को “नीरज साहू गैंग” का सरगना बताकर ₹5 लाख की मांग की गई थी। रकम नहीं देने पर जान से मारने की धमकी दी गई और गैंग के नाम से एक पर्चा भी घर पर चिपकाया गया।
शिकायत पर रांची एसएसपी राकेश रंजन के आदेश पर ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर और खलारी डीएसपी रामनारायण चौधरी के नेतृत्व में टीम गठित की गई। छापेमारी के दौरान राम विजय लोहरा और पवन लोहरा को गिरफ्तार किया गया। राम विजय लोहरा लातेहार के बालूमाथ, जबकि पवन लोहरा खलारी का रहने वाला है। इनके पास से धमकी देने में प्रयुक्त मोबाइल और पर्चा बरामद हुआ।
पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि वे पहले उग्रवादी संगठन JJMP (झारखंड जनमुक्ति परिषद) से जुड़े थे। पुलिस की सख्त कार्रवाई के बाद जब JJMP कमजोर पड़ा, तो दोनों ने अपने साथियों के साथ मिलकर “नीरज साहू गैंग” बनाया और कोयला कारोबारियों व भट्ठा मालिकों से रंगदारी वसूलने लगे।
