गोड्डा
जो आप ऊपर तस्वीर में देख रहे यह किसी संपन्न व्यक्ति की घर नहीं, बल्कि एक बेहद लाचार गरीब परिवार का सहेगानी देवी का कच्चा आशियाना है। सरकार की आवास योजना की आधिकारिक सूची में नाम शामिल होने के बावजूद आज तक इस परिवार को पक्के मकान की नसीब नहीं हो सकी। कारण सिर्फ इतना है कि यह बेबस परिवार जिम्मेदार अधिकारियों और बिचौलियों की अनुचित मांग पूरी करने में असमर्थ है। झारखंड के गोड्डा जिले में यह स्थिति यह दर्शाती है कि किस तरह जरूरतमंदों के हक पर डाका डालकर कागजी प्रक्रियाओं को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया है। 
मोहनपुर मारखन पंचायत में उपेक्षा की तस्वीर
यह मामला गोड्डा जिला अंतर्गत मोहनपुर पोड़याहाट निवासी सहेगनी देवी मारखन पंचायत का है, जहां स्थानीय व्यवस्था की घोर लापरवाही उजागर हुई है। ग्राम सभा से लेकर पंचायत के जिम्मेदार प्रतिनिधियों तक, किसी का ध्यान इस परिवार की बदहाली पर नहीं गया। जनप्रतिनिधियों और पंचायत सचिव की इस अनदेखी के कारण पात्र होते हुए भी इस गरीब परिवार को बुनियादी अधिकार से वंचित रखा गया है। 
टपकती छत और डर के साए में कटती बरसाती रातें
बरसात के इस कठिन मौसम में यह परिवार जर्जर कच्चे मकान में रहने को विवश है। बारिश के दौरान छत से लगातार पानी टपकता है, जिससे घर का कोना-कोना अस्त-व्यस्त हो जाता है। रात-रात भर जागकर पानी सुखाने और खौफ के साए में वक्त बिताने के बावजूद, स्थानीय प्रशासन की तरफ से इस मानवीय संकट पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। स्थानीय स्तर पर यह गंभीर आरोप है कि योजना के तहत आवास उन लोगों को दे दिए गए जिनके पास पहले से ही पक्के मकान और रोजगार के साधन मौजूद हैं। पैसे और पहुंच के बल पर संपन्न लोग योजना का लाभ उठाने में सफल रहे, जबकि असली हकदार गरीब केवल उम्मीद लगाए टकटकी बांधे रह गए। यह स्थिति योजना के मूल उद्देश्य पर ही सवालिया निशान खड़ा करती है।
सरकारी दफ्तरों की चौखट पर दम तोड़ती गुहार
अपनी फरियाद लेकर पीड़ित कई बार प्रखंड से लेकर जिला स्तर के विभिन्न अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगा चुका है। हर बार सिर्फ आश्वासन और उपेक्षा ही हाथ लगी है। अधिकारियों के द्वार से खाली हाथ लौटने को मजबूर यह परिवार आज भी न्याय की आस में सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता को झेलने पर विवश है।