रांची
झारखंड सरकार ने राज्य में विस्थापन, पुनर्वास और भूमिहीनों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने घोषणा की है कि राज्य में विस्थापन एवं पुनर्वास नीति को प्रभावी रूप से लागू करने और इससे जुड़े सामाजिक-आर्थिक पहलुओं की समीक्षा के लिए एक विशेष विस्थापन एवं पुनर्वास आयोग का गठन किया जाएगा।
इस संबंध में जारी सरकारी वक्तव्य के अनुसार, 08 जुलाई 2024 को संपन्न हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि राज्य में विस्थापन से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और उनके अधिकारों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए यह आयोग आवश्यक होगा। आयोग का मुख्य उद्देश्य झारखंड टेनेंसी एक्ट और अन्य भूमि सुधार कानूनों के तहत विस्थापित लोगों के पुनर्वास और मुआवजा नीति को प्रभावी बनाना होगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि आयोग के गठन की प्रक्रिया 90 दिनों के भीतर पूरी कर ली जाएगी। इससे राज्य के उन नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो औद्योगिक, खनन और बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं के कारण विस्थापित हुए हैं। इससे पहले, झारखंड विधानसभा में माननीय रोशन लाल चौधरी द्वारा पूछे गए एक गैर-सरकारी प्रश्न के उत्तर में सरकार ने विस्थापन और पुनर्वास से संबंधित अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। इसके बाद सरकार ने यह निर्णय लिया कि इस विषय पर एक अधिक संगठित और स्थायी समाधान प्रदान करने के लिए आयोग का गठन किया जाए।
झारखंड सरकार के राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने इस संबंध में एक आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। राज्य सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि संबंधित विभाग और अधिकारी इस आयोग के गठन की प्रक्रिया को प्राथमिकता दें।