जामताड़ा
आधुनिक विकास और सुरक्षा मानकों की रेस में जामताड़ा रेलवे स्टेशन का एक ऐतिहासिक अध्याय हमेशा के लिए बंद हो गया। स्टेशन परिसर में स्थित करीब सौ वर्ष से भी अधिक पुराने रेलवे फुट ओवरब्रिज को आखिरकार रेलवे प्रशासन द्वारा सफलतापूर्वक जमींदोज कर दिया गया। लंबे समय से जर्जर घोषित हो चुके इस पुल से सुरक्षा कारणों के चलते काफी पहले ही आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया गया था। रविवार को आसनसोल रेल मंडल के निर्देश पर बेहद सावधानी और पुख्ता सुरक्षा इंतजामों के बीच सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया।
कभी शहर की 'लाइफ लाइन' था यह पुल
यह फुट ओवरब्रिज सिर्फ लोहे और कंक्रीट का ढांचा नहीं था, बल्कि दशकों तक जामताड़ा के लोगों के लिए 'लाइफ लाइन' बना हुआ था। इसने कई पीढ़ियों के सफर को आसान बनाया। थाना रोड क्षेत्र के निवासियों के लिए मुख्य बाजार तक पहुँचने का यह सबसे छोटा और सुविधाजनक रास्ता था। इसके अलावा, जामताड़ा महाविद्यालय, स्थानीय थाना और न्यायालय जाने वाले वकीलों, दैनिक यात्रियों, छात्रों के लिए यह पुल बेहद अहम भूमिका निभाता था। आधुनिक विकास की रफ्तार में अब यह पुरानी सुविधा इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई है।

महज 10 मिनट में पूरा हुआ ऑपरेशन
रेलवे सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे ऑपरेशन को सिग्नल डीआरआई ब्रिज विभाग की कड़ी निगरानी में पूरा किया गया। जर्जर ढांचे को हटाने के लिए रेलवे ने भारी-भरकम आधुनिक मशीनों का सहारा लिया। इनकी मदद से मुख्य ऊंचे ढांचे को महज 10 मिनट के भीतर बेहद सुरक्षित तरीके से काटकर जमीन पर उतार लिया गया। रेलवे ट्रैक के ऊपर से गुजरने वाली हाई टेंशन बिजली तारों को सुरक्षित हटाने और काम के बाद उन्हें वापस दुरुस्त करने के लिए चार टावर वैगनों को काम पर लगाया गया था।
सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम
हादसे की आशंका को देखते हुए कार्रवाई शुरू होने से पहले ही पूरे रेलवे परिसर को यात्रियों से खाली करा लिया गया था। मौके पर जामताड़ा स्टेशन प्रबंधक एस.के. पासवान, आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) के जवान, रेलवे के तकनीकी कर्मी और संबंधित विभागों के आला अधिकारी मुस्तैद रहे। पूरी प्रक्रिया को इतनी सटीक तकनीकी निगरानी में पूरा किया गया। इस पुराने ओवरब्रिज के हटने से शहरवासी थोड़े भावुक जरूर हैं, क्योंकि इसके साथ उनकी कई पुरानी यादें जुड़ी हुई थीं।
