द फॉलोअप डेस्क
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के विशेष सचिव रमेश घोलप की गढ़वा प्रवास के दौरान टेहरी पंचायत की मुखिया बिंको टोप्पो से मुलाकात ने एक भावनात्मक मोड़ ले लिया। यह मुलाकात उनके लिए सिर्फ एक औपचारिक भेंट नहीं रही, बल्कि पुरानी यादों को ताजा करने वाली, दिल को छू लेने वाली एक यादगार क्षण बन गई।
अपने सोशल मीडिया हैंडल पर रमेश घोलप ने इस मुलाकात को साझा करते हुए लिखा, “जिंदगी में कुछ यादों को कभी भुलाया नहीं जा सकता।” उन्होंने बताया कि वह ऑफिशियल कार्य से गढ़वा जिले में थे। दो दिन पहले जब उनके गढ़वा आने की खबर बिंको टोप्पो तक पहुंची, तो उन्होंने मैसेज कर उनसे मिलने की इच्छा जाहिर की।
गढ़वा प्रवास के दौरान शाम को वह अपने पिताजी और भाई के साथ परिसदन पहुँचीं। रमेश घोलप ने बताया कि बिंको टोप्पो पढ़ी-लिखी, आदिवासी समाज की एक कर्मठ महिला जनप्रतिनिधि हैं। स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के बावजूद हाल ही में पेट का ऑपरेशन हुआ था वह दर्द में होने के बावजूद उनसे मिलने पहुँचीं।
बूढ़ा पहाड़ की कर्मठ महिला मुखिया जी के साथ तीन साल बाद मुलाक़ात
— Ramesh Gholap IAS | रमेश घोलप भा.प्र.से. (@RmeshSpeaks) August 24, 2025
जिंदगी में कुछ यादों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वीडियो में दिख रही महिला झारखंड के गढ़वा जिले के दशकों से घोर नक्सल प्रभावित रहे बूढ़ा पहाड़ क्षेत्र के टेहरी पंचायत की मुखिया श्रीमती बिंको टोप्पो जी हैं।1/n
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उनके हाथ में एक फ्रेम थी, जिसे देखकर रमेश घोलप भावुक हो उठे। बिंको टोप्पो ने कहा, “सर, तीन साल पहले ही इस तस्वीर को आपके लिए बनवाया था। आपका तबादला हो गया और उस दिन फ्रेम वाला समय पर नहीं दे पाया, इसलिए आपको नहीं दे सकी। तब से कई बार सोचा कि रांची जाकर आपको यह तस्वीर दे दूँ, लेकिन आ नहीं पाई।”
जब रमेश घोलप ने फ्रेम का कवर हटाने को कहा, तो तस्वीर देखकर वह भावनाओं में डूब गए। उन्होंने लिखा, “आज़ादी के बाद पहली बार जिलाधिकारी के रूप में उस अति नक्सल प्रभावित इलाके में पहुँचना, विभिन्न योजनाओं का उद्घाटन करना, और जिस जगह कभी नक्सलियों की अदालत लगती थी उसी स्थान पर जनता दरबार लगाकर लोगों से संवाद करना ये सारी यादें उस तस्वीर में जीवित थीं।”
उन्होंने उस समय को याद करते हुए बताया कि कैसे करीब एक घंटे जंगलों और नदियों को पार करते हुए डीसी, एसपी, कमांडेंट समेत पूरा प्रशासन बाइक से वहाँ पहुँचा था। जहाँ कभी नक्सली गतिविधियाँ आम थीं, आज वहाँ सरकार की योजनाएँ पहुँच रही हैं। वे तीन महीने बतौर जिलाधिकारी गढ़वा में रहे, और इस दौरान पंचायत कर्मियों से लेकर जिला प्रशासन तक और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से हरसंभव प्रयास किया गया कि क्षेत्र के लोगों के जीवन में बदलाव लाया जा सके।
उन्होंने बताया कि 27 जनवरी, 2022 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद पहली बार बूढ़ा पहाड़ क्षेत्र पहुँचे। सैकड़ों लोगों को योजनाओं के स्वीकृति पत्र दिए गए, कई योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया। साथ ही “बूढ़ा पहाड़ डेवलपमेंट प्रोजेक्ट” की शुरुआत भी हुई।
रमेश घोलप ने लिखा, “गढ़वा जिलाधिकारी से तबादले के उपरांत आज भी इस जिले के कई लोग फोन, मैसेज और मुलाकातों के जरिए पुरानी यादों को ताज़ा करते हैं और प्यार व आशीर्वाद देते रहते हैं।” बिंको टोप्पो द्वारा दी गई तस्वीर को उन्होंने “बहुत बड़ा सम्मान” बताया और लिखा कि वह इसे जीवन भर संजोकर रखेंगे।
बिंको टोप्पो की तारीफ करते हुए उन्होंने लिखा, “बूढ़ा पहाड़ जैसे क्षेत्र से विपरीत हालातों से लड़कर आपने जो उच्च शिक्षा प्राप्त की है और जनता के विकास के लिए जो मेहनत कर रही हैं, वह अवश्य रंग लाएगी। सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने में आप जैसी कर्मठ और जुझारू जनप्रतिनिधियों का बहुत बड़ा योगदान है। लड़ते रहिए, आप बूढ़ा पहाड़ के लोगों के लिए एक उम्मीद हैं। उस उम्मीद को बनाए रखिएगा। शुभकामनाएँ और बूढ़ा पहाड़ की तमाम जनता को मेरी तरफ से जोहार।”
