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झारखंड आदिवासी महोत्सव में दिख रही जादो पटिया और सोहराई कला

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द फॉलोअप डेस्कः

झारखंड आदिवासी महोत्सव 2024 में संथाल परगना की परंपरिक लोक चित्रकला जादो पटिया कला के साथ सोहराई कला देखने को मिल रही है। यहां संथाल परगना से आए कलाकार जादो पटिया कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। आदिवासी चित्रकला कार्यशाला सह प्रदर्शनी में संताल परगना की जादोपटिया पेंटिंग के आठ कलाकार भाग ले रहे हैं। 


समृद्ध आदिवासी जीवन दर्शन की झलक
गौरतलब है कि झारखंडी संस्कृति में सोहराई कला का महत्त्व सदियों से रहा है। प्रकृति से मनुष्य को जोड़े रखने के लिए सोहराई कला का महत्व बढ़ जाता है। इस महत्व को  झारखंड आदिवासी महोत्सव 2024 में दिखाया जा रहा है। हजारीबाग से आए कलाकार अल्का इमाम, बेलनगिनी रोबर्ट मरियम, उषा पन्ना एवं प्रमिला किरण लकड़ा द्वारा अपनी कला के प्रदर्शन से लोगो को प्रकृति से जुड़े रहने का संदेश दिया जा रहा है। प्रकृति रहेगी तो जीवन रहेगा। राज्य के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में सोहराई पर्व के दौरान देसज दुधी माटी से सजे घरों की दीवारों पर महिलाओं के हाथों का हुनर देखने को मिलता है।


इन चित्रकारों की कला है जादोपटिया कला में शामिल
जादोपटिया कला में नेशनल फेलोशिप अवॉर्डी नीलम नीरद, अर्पिता राज नीरद, निताई चित्रकार, गणपति चित्रकार, दशरथ चित्रकार, दयानंद चित्रकार, जियाराम चित्रकार आदि शामिल हैं। कार्यशाला के कलाकारों को जादोपटिया पेंटिंग के खोजकर्ता डॉ आरके नीरद द्वारा जादोपटिया और पटकर पेंटिंग के विषय में तकनीकी जानकारी दी जा रही है।