द फॉलोअप, रांची
झारखंड सचिवालय सेवा के लिए बनी कैडर रिव्यू कमेटी और सचिवालय सेवा संघ के बीच का तकरार बढ़ता जा रहा है। 5 मई को कैडर रिव्यू कमेटी की सदस्य राजस्व पर्षद मस्त राम मीणा की अध्यक्षता में बैठक हुई। इस बैठक में संघ के अध्यक्ष रितेश कुमार और महासचिव राजेश कुमार सिंह शामिल नहीं हुए। पूरा घटनाक्रम कुछ इस प्रकार रहा। पिछले दिनों झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने प्रोजेक्ट भवन परिसर में कैडर रिव्यू कमेटी के गठन का विरोध किया था। उस दिन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और इरफान अंसारी ने संघ के दोनों पदाधिकारियों को बुलाया था। इस बैठक में कार्मिक सचिव प्रवीण टोप्पो भी उपस्थित थे। टोप्पो ने उस दिन रिव्यू कमेटी को भंग करने से साफ साफ इंकार कर दिया। लेकिन बीच का एक रास्ता भी निकाला गया। सहमति बनी कि रिव्यू कमेटी में सचिवालय सेवा के प्रतिनिधि के रूप में संघ के अध्यक्ष और महासचिव रहेंगे। कमेटी तीन माह के भीतर अपनी अनुशंसा दोनों मंत्रियों को करेगी। फिर मंत्री अपने सुझाव के साथ कमेटी की अनुशंसा को मुख्यमंत्री को अग्रसारित करेंगे। अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री लेंगे। यहां मालूम हो कि झारखंड सचिवालय सेवा संघ सचिवालय सेवा के पदों में कटौती का विरोध कर रहा है। उसे आशंका है कि रिव्यू कमेटी उनके पदों की संख्या में कटौती कर सकता है।

जानकारी के अनुसार सहमति बनने के बाद भी कार्मिक द्वारा संघ के पदाधिकारियों को कमेटी में शामिल किए जाने का आदेश जारी नहीं किया गया। साथ ही कमेटी की विचारणीय बिंदुओं में भी कोई बदलाव नहीं किया गया। जबकि संघ केंद्रीय सचिवालय के अनुसार रिव्यू कमेटी के टर्म ऑफ रेफरेंस में भी बदलाव चाहता है। आनन फानन में 5 मई की बैठक से एक दिन पूर्व कार्मिक ने टर्म ऑफ रेफरेंस में कोई बदलाव किए बगैर केवल संघ के दोनों पदाधिकारियों को कमेटी में शामिल करने का आदेश जारी कर दिया। पांच मई को जब बैठक होनी थी, उससे पहले संघ के अध्यक्ष रितेश कुमार और महासचिव राजेश कुमार सिंह मस्त राम मीणा से मिल कर अपनी बात कहना चाह रहे थे। लेकिन उन्हें मिलने की अनुमति नहीं मिली। बाद में जब बैठक शुरू हुई तो विरोध स्वरूप संघ के दोनों पदाधिकारी उसमें शामिल हुए बगैर वहां से चल दिए। हालांकि कल की बैठक में तीन ही पदाधिकारी उपस्थित थे। मस्त राम मीणा, वित्त सचिव प्रशांत कुमार और कार्मिक सचिव प्रवीण टोप्पो। भू-राजस्व सचिव चंद्रशेखर उपस्थित नहीं हो सके। जानकारी के अनुसार रिव्यू कमेटी की बैठक में कोई ठोस चर्चा या निर्णय नहीं लिया गया। बैठक में अधिकतर चर्चा पश्चिम बंगाल चुनाव पर ही हुई।
