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जामताड़ा : साहब! ये सड़क है या भ्रष्टाचार का गवाह? जहां एंबुलेंस भी बदल लेती है रास्ता; ग्रामीणों के लिए बनी 'जंजाल

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जामताड़ा 
अगर आप सरकारी धन के दुरुपयोग और विभागीय लापरवाही का जीता-जागता नमूना देखना चाहते हैं, तो जामताड़ा जिला इसके लिए "सटीक" उदाहरण पेश कर रहा है। मामला जामताड़ा सदर प्रखंड के दक्षिण बहाल पंचायत अंतर्गत संथालपीपला टोला का है, जहां विकास के नाम पर बिछाई गई सड़क आज ग्रामीणों के लिए मुसीबत का सबब बन चुकी है। ग्रामीणों के अनुसार, ग्रामीण विकास विभाग (MREP) द्वारा इस टोले में 2000 फीट लंबी पीसीसी सड़क का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। आश्चर्य की बात यह है कि बोर्ड पर अंकित विवरण और किलोमीटर के दावों के विपरीत, जमीन पर महज 1500 फीट सड़क का ही निर्माण हो पाया है। शेष सड़क आज भी अधूरी है, जो बारिश के मौसम में किसी तालाब से कम नजर नहीं आती।गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
सिर्फ अधूरा निर्माण ही समस्या नहीं है, बल्कि जो 1500 फीट सड़क बनी है, उसकी गुणवत्ता इतनी निम्न है कि निर्माण के चंद दिनों बाद ही वह टूटने लगी थी। ग्रामीणों का आरोप है कि संवेदक (ठेकेदार) और संबंधित विभाग की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर खानापूर्ति की गई है। "सड़क बनते ही दरकने लगी थी," ग्रामीण ने कहा, "हमने कई बार संवेदक और विभाग को इसकी शिकायत की, लेकिन हमारी आवाज अनसुनी कर दी गई। ठेकेदार ने मनमाने ढंग से काम किया और आज स्थिति भयावह है।
एंबुलेंस तक पहुंचना हुआ दूभर
आज हालात यह हैं कि यह सड़क विकास नहीं, बल्कि 'जंजाल' बन गई है। सड़क के बीचों-बीच बने गहरे गड्ढों और उभरे हुए पत्थरों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि गांव में आपातकालीन स्थिति होने पर न तो बड़ी गाड़ियां घुस पाती हैं और न ही एम्बुलेंस पहुंच पाती है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने, दोषी संवेदक पर कार्रवाई करने और सड़क का पुनर्निर्माण कार्य पूर्ण कराने की मांग की है। देखना यह होगा कि प्रशासन इस भ्रष्टाचार पर कब तक संज्ञान लेता है।

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