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जामताड़ा : सुनसान इलाके में 8 घंटे में बन गया अंडरपास, भीड़भाड़ वाले इलाकों से सौतेला व्यवहार क्यों?

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दीपक झा/जामताड़ा
जामताड़ा में भारतीय रेलवे ने रिकॉर्ड समय में अंडरपास निर्माण कर अपनी इंजीनियरिंग क्षमता का प्रदर्शन तो किया, लेकिन इस उपलब्धि के साथ विकास की दिशा को लेकर नई बहस भी छिड़ गई है। बेवा बाईपास स्थित लेवल क्रॉसिंग गेट संख्या 8/SPL/E पर रेलवे ने महज 7 घंटे में सीमित ऊंचाई वाले अंडरपास (सबवे) का निर्माण कर दिया। रविवार सुबह 7:40 बजे शुरू हुआ कार्य दोपहर 3 बजे तक पूरा कर लिया गया। रेलवे अधिकारियों ने इसे तकनीकी उपलब्धि बताया, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास की यह रफ्तार उन इलाकों में दिखाई जा रही है जहां ट्रैफिक का दबाव बेहद कम है।


शहर में जाम से जूझ रही जनता, सुनसान इलाकों में बन रहे सबवे
स्थानीय नागरिकों और बुद्धिजीवियों का आरोप है कि रेलवे की प्राथमिकताएं जमीनी जरूरतों से मेल नहीं खा रहीं। मिहिजाम और शहर के घनी आबादी वाले इलाकों में कई रेलवे फाटक ऐसे हैं, जहां हर दिन एम्बुलेंस, स्कूली बसें और आम लोग घंटों जाम में फंसे रहते हैं। कई जगहों पर भौगोलिक स्थिति के कारण फ्लाईओवर बनाना संभव नहीं है, ऐसे में छोटे अंडरपास ही सबसे कारगर विकल्प माने जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि रेलवे को उन स्थानों पर इस तरह की परियोजनाएं शुरू करनी चाहिए जहां जनता को सीधा लाभ मिले, न कि ऐसे सुनसान इलाकों में जहां ट्रैफिक का दबाव लगभग नहीं के बराबर है।


अधिकारियों की मौजूदगी में चला रिकॉर्ड निर्माण अभियान
इस निर्माण कार्य को रेलवे ने मिशन मोड में पूरा किया। आसनसोल मंडल के वरिष्ठ मंडल अभियंता राजीव रंजन, विनित भगत, पिंटू दास और जे राज की निगरानी में भारी क्रेनों की मदद से सबवे का पहला हिस्सा स्थापित किया गया। रेलवे के अनुसार शेष कार्य अगले रविवार, 17 मई 2026 को पूरा किया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए आरपीएफ सब-इंस्पेक्टर रंजीत पांडेय के नेतृत्व में रेलवे सुरक्षा बल और स्थानीय पुलिस की तैनाती की गई थी।


विकास मॉडल पर उठे कई बड़े सवाल
रेलवे की इस उपलब्धि के बावजूद स्थानीय स्तर पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि क्या रेलवे केवल उन्हीं जगहों का चयन करता है जहां निर्माण कार्य आसान हो। व्यस्त और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में तकनीकी बाधाओं का हवाला देकर परियोजनाओं को लंबित क्यों रखा जाता है। शहरवासियों का आरोप है कि प्रशासनिक तंत्र आम जनता की सुविधा से ज्यादा परियोजनाओं की संख्या और रिकॉर्ड निर्माण के आंकड़ों पर ध्यान दे रहा है।


तकनीकी सफलता के साथ जनसुविधा की भी जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि रिकॉर्ड समय में अंडरपास का निर्माण निश्चित रूप से रेलवे की तकनीकी दक्षता को दर्शाता है, लेकिन विकास का वास्तविक अर्थ तब होगा जब यही तकनीक और तत्परता उन इलाकों तक पहुंचेगी जहां लोग रोजाना रेल फाटकों पर जाम और परेशानी का सामना करते हैं। जब तक मिहिजाम और शहर के व्यस्त हिस्सों में ऐसी योजनाएं लागू नहीं होतीं, तब तक बेवा बाईपास जैसे स्थानों पर बने अंडरपास लोगों के लिए केवल आंकड़ों की उपलब्धि बनकर रह जाएंगे।

 

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