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सड़क-पुल के इंतजार में जामताड़ा का रामबारी गांव, उफनती जोरिया पार कर स्कूल जाते हैं बच्चे

सड़क-पुल के इंतजार में जामताड़ा का रामबारी गांव, उफनती जोरिया पार कर स्कूल जाते हैं बच्चे

जामताड़ा: 
झारखंड में आज भी ऐसे कई ग्रामीण इलाके हैं, जहां बुनियादी सुविधाओं की हालत बेहद खराब है। ग्रामीणों की रोजमर्रा की समस्याएं अक्सर सड़क से शुरू होती हैं और सड़क पर ही खत्म हो जाती हैं। सड़क नहीं होने का असर सिर्फ आवागमन पर नहीं पड़ता, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, मरीजों के इलाज और ग्रामीणों की पूरी जिंदगी प्रभावित होती है। जामताड़ा प्रखंड की गोपालपुर पंचायत का रामबारी गांव भी ऐसी ही बदहाल तस्वीर पेश करता है। देश को आजाद हुए सात दशक से अधिक समय बीत चुका है,

लेकिन करीब 700 की आबादी वाला यह गांव आज भी एक अदद पक्की सड़क और पुल का इंतजार कर रहा है। बरसात में गांव की स्थिति और भी बदतर हो जाती है। उफनती जोरिया और कीचड़ भरी पगडंडी के बीच स्कूली बच्चों को रोजाना जान जोखिम में डालकर स्कूल जाना पड़ता है, वहीं गंभीर मरीजों को खटिया के सहारे मुख्य सड़क तक पहुंचाने की मजबूरी है।

द फॉलोअप की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आई गांव की बदहाल तस्वीर
द फॉलोअप की टीम ने संवाददाता दीपक झा की अगुवाई में रामबारी गांव पहुंचकर जमीनी हकीकत का जायजा लिया। ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान गांव में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति बेहद चिंताजनक नजर आई। गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए न तो पर्याप्त पक्की सड़क है और न ही जोरिया पर पुलिया का निर्माण हुआ है। बारिश के दिनों में ग्रामीणों की मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं।

उफनती जोरिया पार कर स्कूल पहुंचते हैं बच्चे
रामबारी गांव से गोपालपुर स्थित हाई स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए बरसात का मौसम किसी चुनौती से कम नहीं है। स्कूल जाने के लिए उन्हें सबसे पहले उफनती जोरिया पार करनी पड़ती है। इसके बाद करीब एक किलोमीटर तक कीचड़ और पगडंडी वाले रास्ते से गुजरकर वे मुख्य सड़क तक पहुंचते हैं। मुख्य सड़क पर पहुंचने के बाद भी स्कूल करीब 3 किलोमीटर दूर है। यानी बच्चों को रोजाना कई किलोमीटर का सफर बेहद कठिन परिस्थितियों में तय करना पड़ता है। स्कूली बच्चों ने बताया कि वे पढ़ाई करना चाहते हैं, लेकिन बारिश के दिनों में स्कूल पहुंचना काफी मुश्किल हो जाता है। जोरिया में पानी का बहाव तेज होने पर उनकी परेशानी और बढ़ जाती है। कई बार भारी बारिश के कारण उन्हें स्कूल जाना छोड़ना पड़ता है।

700 की आबादी, गांव के अंदर सिर्फ 200-300 फीट पक्की सड़क
रामबारी गांव की आबादी करीब 700 है, लेकिन गांव के अंदर भी सड़क की स्थिति बेहतर नहीं है। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में महज 200 से 300 फीट तक ही पक्की सड़क बनी है। इसके बाद कच्चे और कीचड़ भरे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। सबसे बड़ी समस्या गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने वाली जोरिया है, जिस पर अब तक पुलिया का निर्माण नहीं हो सका है।

बीमार पड़ने पर खटिया ही बनती है ग्रामीणों का सहारा
गांव में सड़क और पुल की कमी का असर सिर्फ स्कूली बच्चों पर नहीं पड़ता। ग्रामीणों के मुताबिक, किसी व्यक्ति के अचानक बीमार पड़ने या किसी महिला को प्रसव पीड़ा होने की स्थिति में सबसे बड़ी चुनौती उसे अस्पताल तक पहुंचाने की होती है। गांव तक एंबुलेंस या अन्य वाहन आसानी से नहीं पहुंच पाते। ऐसे में ग्रामीण मरीज को खटिया पर लिटाकर जोरिया और कीचड़ भरे रास्ते को पार करते हुए मुख्य सड़क तक ले जाते हैं। वहां से वाहन की मदद से मरीज को अस्पताल पहुंचाया जाता है। रात के समय या जोरदार बारिश के दौरान यह परेशानी और भी गंभीर हो जाती है।

पुल और पक्की सड़क निर्माण की ग्रामीणों ने लगाई गुहार
रामबारी के ग्रामीणों और स्कूली बच्चों ने झारखंड सरकार और जामताड़ा जिला प्रशासन से उनकी समस्या पर तत्काल ध्यान देने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए पक्की सड़क और जोरिया पर पुल का निर्माण बेहद जरूरी है। इससे बच्चों को स्कूल जाने में सहूलियत मिलेगी और आपात स्थिति में मरीजों को भी समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन गांव की जमीनी स्थिति का जायजा लेकर जल्द सड़क और पुल निर्माण की दिशा में ठोस पहल करे, ताकि बरसात के दिनों में उन्हें आवागमन की इस गंभीर समस्या से निजात मिल सके।

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