द फॉलोअप डेस्क, रांचीः
JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका के मामले में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र दाखिल किया है। सरकार ने अपने जवाब में परीक्षा रद्द करने के फैसले को उचित ठहराते हुए कहा है कि CGL की पूरी परीक्षा प्रक्रिया ही दूषित हो चुकी थी। ऐसे में सही तरीके से परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों और गड़बड़ी के जरिए सफल होने वाले उम्मीदवारों के बीच अंतर कर पाना बेहद मुश्किल है। सरकार का कहना है कि ऐसी स्थिति में सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय दिशा-निर्देशों के आधार पर पूरी परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया। शपथ पत्र में परीक्षा रद्द करने के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों और दिशा-निर्देशों का भी हवाला दिया गया है। सरकार ने अलग-अलग राज्यों और सरकारों की ओर से पूर्व में रद्द की गई परीक्षाओं के उदाहरण भी अदालत के सामने रखे हैं।

वानशिखा मामले का भी दिया गया हवाला
सरकार ने अपने शपथ पत्र में वानशिखा बनाम केंद्र सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से परीक्षा रद्द करने को लेकर दिए गए दिशा-निर्देशों का उल्लेख किया है। इसमें कहा गया है कि यदि किसी परीक्षा की पूरी प्रक्रिया ही इस हद तक प्रभावित या दूषित हो जाए कि सही तरीके से सफल हुए अभ्यर्थियों और गलत तरीके से लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों को अलग-अलग पहचानना संभव न हो, तो ऐसी स्थिति में पूरी परीक्षा रद्द की जा सकती है। सरकार ने इसी सिद्धांत को CGL परीक्षा के मामले में लागू होने की बात कही है। शपथ पत्र के मुताबिक CID जांच से सामने आए तथ्यों के आधार पर परीक्षा की पूरी प्रक्रिया के प्रभावित होने की जानकारी मिली है। सरकार ने अदालत को बताया है कि CGL परीक्षा से जुड़ा गोपनीय काम ICN टेक्नोलॉजी को सौंपा गया था। इसमें प्रश्न पत्रों की छपाई, उन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने समेत अन्य महत्वपूर्ण कार्य शामिल थे। सरकार के अनुसार CGL परीक्षा में सामने आई गड़बड़ियों के मामले में कंपनी के CEO सोमांश प्रकाश समेत 28 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। फिलहाल इस मामले की जांच जारी है और जांच के दौरान 265 लोगों को नोटिस भी जारी किए गए हैं। सरकार ने कहा है कि परीक्षा से जुड़ी एजेंसी की भूमिका की जांच में बड़े स्तर पर अनियमितता के तथ्य सामने आए हैं।

पैसे लेकर अभ्यर्थियों को रटाए गए सवालों के जवाब
शपथ पत्र में कहा गया है कि परीक्षा में काम करने वाली एजेंसी की ओर से बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई। आरोप है कि पैसे लेकर अभ्यर्थियों को सवालों के जवाब पहले से रटाए गए। जांच में अब तक नेपाल के अलावा आसनसोल, कोलकाता, बिहार, झरिया और बोकारो के अलग-अलग केंद्रों पर अभ्यर्थियों को सवालों के जवाब रटाए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियों को कथित तौर पर उन परीक्षार्थियों और एजेंसी से जुड़े लोगों के बीच पैसों के लेन-देन के सबूत भी मिले हैं, जिन्हें इस व्यवस्था से लाभ मिला। सरकार के अनुसार नेपाल में सवालों के जवाब रटाए गए 28 अभ्यर्थियों में से 10 CGL परीक्षा में सफल हुए हैं। सरकार की ओर से दाखिल शपथ पत्र में यह भी कहा गया है कि CGL परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को नियुक्ति के समय दिए गए नियुक्ति पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि उनकी नियुक्ति CID जांच के परिणाम से प्रभावित होगी। CID की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर जब पूरी परीक्षा प्रक्रिया के दूषित होने की जानकारी मिली, तो सही और गलत तरीके से सफल अभ्यर्थियों के बीच अंतर करना मुश्किल माना गया। इसी स्थिति को देखते हुए परीक्षा रद्द करने के प्रस्ताव पर राज्य कैबिनेट में विचार किया गया। सरकार के अनुसार कैबिनेट ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया और इसके बाद इसी निर्णय के आधार पर परीक्षा रद्द करने का आधिकारिक आदेश जारी किया गया।