द फॉलोअप डेस्क
झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से राजकीय पॉलिटेक्निक निरसा में नामांकन लेने वाले करीब 25 छात्रों का भविष्य दांव पर चढ़ गया है। परीक्षा के नियमों के अनुसार, पॉलिटेक्निक प्रवेश परीक्षा में सफल सभी चयनित विद्यार्थियों को नामांकन के समय स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट लाना अनिवार्य होता है। राजकीय पॉलिटेक्निक निरसा में, राज्य के अन्य संस्थानों की तरह, नये चयनित विद्यार्थियों के नामांकन की अंतिम तिथि 11 अगस्त थी।
इसी दिन निरसा विधायक अरूप चटर्जी अपने एक परिचित विद्यार्थी के नामांकन को लेकर संस्थान पहुंचे और नामांकन प्रभारी डॉ. एस.पी. यादव पर दबाव बनाने लगे कि वह बिना स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट के ही उक्त विद्यार्थी का नामांकन स्वीकार कर लें। नियमों के अनुसार यह संभव नहीं था, इसलिए नामांकन प्रभारी ने बिना प्रमाणपत्र के नामांकन लेने से स्पष्ट इनकार कर दिया।
प्रतिक्रिया स्वरूप विधायक अरूप चटर्जी ने गुस्से में आकर संस्थान के गेट पर ताला लगवा दिया और चेतावनी दी कि जब तक उस विद्यार्थी का नामांकन नहीं होता, ताला नहीं खोला जाएगा। विधायक इस बात पर अड़े रहे कि जब तक नामांकन प्रभारी उनसे माफी नहीं मांगेंगे, नामांकन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। इस घटनाक्रम के कारण लगभग 25 छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया।
नामांकन प्रभारी डॉ. एस.पी. यादव ने बताया कि उन्होंने किसी से कोई गलत बात नहीं कही, केवल इतना कहा कि स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट के बिना नामांकन लेना संभव नहीं है। इसी बात से नाराज़ होकर विधायक ने संस्थान में ताला लगवा दिया, जिससे नामांकन प्रक्रिया ठप हो गई।
इस मामले में विधायक अरूप चटर्जी ने कहा कि हर हाल में नामांकन प्रभारी को उनसे माफी मांगनी होगी, तभी ताला खोला जाएगा। अंततः शाम करीब 7:30 बजे संस्थान का ताला खोला गया। छात्रों का दस्तावेज सत्यापन हो चुका था, केवल शुल्क भुगतान बाकी था।
प्रिंसिपल गणेश प्रसाद के अनुसार, जब संस्थान का ताला खोला गया, तब तक कार्यालय बंद हो चुका था। ऐसे में छात्रों का नामांकन नहीं हो पाया। इस मामले की जानकारी विभाग को दी गई है और आग्रह किया गया है कि संस्थान में 25 नामांकन बाधित हो गए हैं, इसे ध्यान में रखते हुए छात्रहित में अतिरिक्त समय दिया जाए। साथ ही यह भी अनुरोध किया गया है कि छात्रों को सूचना देने हेतु विज्ञापन प्रकाशित किया जाए।
इस मामले में छात्र नेता रोहित पाठक शर्मा ने गुरुवार को उपायुक्त आदित्य रंजन से मुलाकात की और बताया कि 11 अगस्त को संस्थान में हुई तालाबंदी के कारण करीब 25 छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। उपायुक्त ने आश्वासन दिया कि वे जल्द ही इस मामले में कार्रवाई करेंगे और छात्रों का नामांकन सुनिश्चित कराएंगे।
गौरतलब है कि डिप्लोमा हो या अभियंत्रण संस्थान, उनमें चयनित अभ्यर्थियों का नामांकन परीक्षा बोर्ड की निर्धारित तिथि के अनुसार होता है, और तिथि में किसी भी प्रकार का बदलाव केवल परीक्षा बोर्ड के निर्णय से ही संभव होता है। तात्पर्य यह है कि नामांकन की तिथि में बदलाव बोर्ड के आदेश के बिना संभव नहीं है।
