द फॉलोअप डेस्क
झारखंड के राज्य के 34 निकाय परिषद के निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल आज से 30 अप्रैल तक समाप्त हो जाएगा।। निकाय चुनाव को लेकर द फॉलोअप की टीम ने कांग्रेस मंत्री आलमगीर आलम से बातचीत की। आलमगीर आलम ने कहा कि ओबीसी के ट्रिपल टेस्ट कराने के बाद चुनाव करवाया जाएगा। इसी कारण अब तक चुनाव नहीं हो पाया। हम लोग चुनाव से भाग नहीं रहे हैं। जल्द ही चुनाव होगा। ट्रिपल टेस्ट नहीं कराने को लेकर उन्होंने कहा कि उसके इसके पीछे बहुत सारे कारण है। लेकिन अब हम करवा रहे हैं। सरकार की मनसा चुनाव को लेकर बिल्कुल साफ है। जितनी जल्दी हो सके हम निकाय चुनाव करवाएंगे। चुनाव ओबीसी ट्रिपल टेस्ट के बाद ही होगी। समय को लेकर सवाल किए जाने पर उन्होंने कहा कि राजनीति में समय तय नहीं होता है,लेकिन लोकसभा चुनाव 2024 से पहले निकाय चुनाव करवा दिए जाएंगे।

सभी शक्तियां आज से प्रशासक को सौंपी गई
बता दें कि निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद सभी शक्तियां आज से प्रशासक को सौंप दी जाएंगी। अब निकायों में पदस्थापित कार्यालय प्रधान (यानी नगर आयुक्त, अपर नगर आयुक्त या कार्यपालक पदाधिकारी) अगले निर्वाचन तक प्रशासक के रूप में काम करेंगे। जानकारी हो कि नए नियमों के आधार पर अब नगर निकायों में मेयर या अध्यक्ष पद के लिए एससी, एसटी, ओबीसी आरक्षण राज्य सरकार संबंधित वर्ग की जनसंख्या के आधार पर तय करेगी। पहले रोटेशनल आधार पर आरक्षण लागू करने का नियम था। नगर विकास विभाग के सचिव विनय चौबे ने कहा है कि सरकार के निर्देश पर आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।

34 निकायों में ये हैं शामिल
बता दें कि 34 निकायों का कार्यकाल भी 28 से लेकर 30 अप्रैल को खत्म हो रहा है। इन निकायों में रांची, हजारीबाग, गिरिडीह, मेदिनीनगर और आदित्यपुर नगर निगम शामिल हैं। इनके अलावा गढ़वा, चतरा, मधुपुर, गोड्डा, साहिबगंज, पाकुड़, मिहिजाम, चिरकुंडा, फुसरो, गुमला, लोहरदगा, सिमडेगा, रामगढ़, चाईबासा और कपाली नगर परिषद तथा नगर उंटारी, हुसैनाबाद, छतरपुर, लातेहार, डोमचांच, राजमहल, बडहरवा, बासुकीनाथ, जामताड़ा, खूंटी, बुंडू और सरायकेला-खरसावां शामिल है। गौरतलब है कि नगर विकास विभाग ने वर्ष 2023 में बिना ओबीसी आरक्षण के राज्य के 48 नगर निकायों में चुनाव कराने का प्रस्ताव तैयार किया था। नगरपालिका अधिनियम 2011 में संशोधन करने के बाद आरक्षण रोस्टर में भी बदलाव किया गया था। इसके बाद यह मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा।
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