रांची
10 अगस्त 2025 की देर रात गोड्डा जिले के बोआरीजोर थाना क्षेत्र अंतर्गत कामलडोरी (राहबड़िया) पहाड़ के पास हुई संदिग्ध पुलिस मुठभेड़ में आदिवासी नेता सूर्य नारायण हांसदा की मौत के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने झारखंड सरकार से इस पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की अनुशंसा की है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य ने इस बात की जानकारी दी है। आयोग ने कहा है कि गोड्डा जिले के डीसी, एसपी और झारखंड के डीजीपी की रिपोर्ट और आयोग की जांच में कई बिंदुओं पर तथ्यात्मक भिन्नता सामने आई है। इसलिए इस मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। आयोग की सिफारिश में कहा गया है कि गोड्डा जिले के डीसी, एसपी और मुठभेड़ में शामिल पुलिस पदाधिकारी जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग करें, ताकि दोषियों पर कानून के तहत कार्रवाई हो सके।

इधर, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद दीपक प्रकाश ने सूर्या हांसदा एनकाउंटर को पूरी तरह फर्जी करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कोई मुठभेड़ नहीं बल्कि पत्थर माफिया और बिचौलियों के इशारे पर की गई सुनियोजित हत्या है। दीपक प्रकाश ने कहा कि आयोग की रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि सूर्या हांसदा को जानबूझकर मारा गया।
उन्होंने बताया कि 16 अगस्त को उन्होंने आयोग में लिखित आवेदन दिया था, जिसके आधार पर जांच हुई। इस जांच में आयोग के सदस्य निरुपम चकमा, आशा लकड़ा समेत छह अधिकारी शामिल हुए। 12 सितंबर को आयोग ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर सीबीआई जांच की अनुशंसा की और इसकी प्रतिलिपि भी उन्हें भेजी।
दीपक प्रकाश ने सवाल उठाया कि जांच टीम के सामने आरोपी पुलिस पदाधिकारियों का उपस्थित न होना, जिस जगह मुठभेड़ बताया गया वहां जंगल का न होना, मीडिया को स्थल से दूर रखना, सूर्या हांसदा को बिना वारंट 24 घंटे से अधिक पुलिस कस्टडी में रखना और न्यायिक अधिकारी के समक्ष पेश न करना — ये सभी तथ्य मुठभेड़ की कहानी को संदिग्ध बनाते हैं।

उन्होंने मीडिया को वह तस्वीरें भी दिखाईं जिनमें गोली लगने की जगह पर काले धब्बे और जलने के निशान नजर आ रहे थे। दीपक प्रकाश के अनुसार, ये साक्ष्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि पूरी मुठभेड़ की कहानी मनगढ़ंत थी। सांसद ने कहा कि सूर्या हांसदा एक राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता थे, जो संथाल परगना में सक्रिय पत्थर माफिया और दलालों का विरोध कर रहे थे। इसी वजह से वे लंबे समय से ऐसे समूहों के निशाने पर थे।
