द फॉलोअप, रांची
फर्जी वेतन विपत्र के माध्यम से हुए करोड़ों की निकासी को देखते हुए मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने एहतियाती कदम उठाया है। राज्य के सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव और उपायुक्तों को एकाउंट्स से जुड़े वैसे अधिकारियों को 30 मई तक स्थानांतरित करने का आदेश दिया है जो तीन साल से एक ही जगह पर जमें हैं। इनमें वरीय लेखा सहायक, लेखा सहायक, लेखा अधीक्षक, लेखापाल और विपत्र लिपिक शामिल हैं। मुख्य सचिव ने संविदा, आउट सोर्स और मानदेय पर कार्यरत कर्मियों को लेखा और वित्तीय कार्यों से दूर रखने का निर्देश दिया है।

हालांकि सरकारी कार्यालयों के जानकारों का कहना है कि आउट सोर्स या एकमुश्त मानदेय पर कार्यरत कर्मियों की सेवा के मामले में ठोस निर्णय लिए जाने तक निष्पक्ष ढंग से तीन साल से जमें कर्मियों को स्थानांतरित करना बहुत आसान नहीं हैं। क्योंकि राज्य सरकार के अधिकतर कार्यालयों में नियमित अधिकारी और कर्मचारी, आउट सोर्स या संविदा पर नियुक्त कंप्यूटर ऑपरेटरों पर पूरी तरह निर्भर हो चुके हैं। क्योंकि राज्य सरकार के कार्यालयों में पूर्व में सृजित टाइपिस्ट के पद पर हाल के वर्षों में कोई नियुक्ति ही नहीं हुई है। इस कारण आउट सोर्स, संविदा और एकमुश्त मानदेय पर कार्यरत कर्मियों को हर महत्वपूर्ण संचिका और प्रस्ताव की जानकारी स्वाभाविक रूप से होती रहती है। खास कर कंप्यूटर ऑपरेटर सचिवालय और अन्य क्षेत्रीय कार्यालयों में प्रभावी भूमिका में हैं। राज्य सरकार के अधिकारी और कर्मचारी लगभग पूरी तरह इन पर निर्भर हो गए हैं।
