नंदलाल तुरी
पाकुड़ जिले में पत्थर कारोबारी ओनर एसोसिएशन के बैनर तले पाकुड़ के पत्थर व्यवसायियों ने शुक्रवार को रेलवे में पत्थर की लोडिंग पूरी तरह ठप कर दी। एसोसिएशन का कहना है कि रेलवे को करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाले पाकुड़ जिले की लगातार हो रही अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। झामुमो के केंद्रीय सचिव पंकज मिश्रा ने हाल ही में पाकुड़ के पत्थर व्यवसायियों के साथ बैठक कर स्पष्ट किया था कि यदि पाकुड़ के यात्रियों को पर्याप्त ट्रेन सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो पत्थर की लोडिंग बाधित की जाएगी। शुक्रवार को यह चेतावनी प्रभावी हो गई। व्यवसायियों की मांग है कि कोविड-19 महामारी के दौरान बंद की गई ट्रेनों का परिचालन फिर से शुरू किया जाए। साथ ही पाकुड़ मार्ग से गुजरने वाली एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित किया जाए। पटना और दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन सेवा शुरू करने के अलावा यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने की भी मांग की गई है।
पत्थर व्यवसायियों द्वारा रेलवे लोडिंग बंद किए जाने से रेलवे को प्रतिदिन लगभग दो करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान है, जबकि राज्य सरकार को भी प्रतिदिन करीब 40 लाख रुपये का नुकसान हो सकता है। इसके अलावा इस आंदोलन से हजारों मजदूरों के प्रभावित होने की आशंका है। शुक्रवार को पाकुड़ जिले के अपर साइडिंग, लोअर साइडिंग, बहीरग्राम और तिलभिट्टा रेलवे साइडिंग में कई रेलवे रैक खाली खड़े देखे गए। पत्थर व्यवसायी गोपी बत्रा ने बताया कि वे रेलवे को हर साल करोड़ों रुपये का राजस्व देते हैं, लेकिन सुविधाओं के नाम पर उन्हें कुछ भी नहीं मिलता। पटना और दिल्ली के लिए कोई सीधी ट्रेन नहीं है और कई लोकल व एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन भी बंद कर दिया गया है।
गोपी बत्रा ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक रेलवे रैक में पत्थर की लोडिंग नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि पाकुड़ से प्रतिदिन लगभग छह रेलवे रैक पत्थर लादकर भेजे जाते हैं, लेकिन अब पाकुड़ को ट्रेन सुविधा देना तो दूर, जो ट्रेनें पहले चलती थीं, उन्हें भी बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा, “हम प्लेटफॉर्म पर खड़े रह जाते हैं और हमारे सामने से सीटी बजाकर ट्रेनें गुजर जाती हैं।” व्यवसायियों ने चेतावनी दी कि जब तक हावड़ा डिवीजन के अधिकारियों तक उनकी आवाज नहीं पहुंचेगी, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। झामुमो के केंद्रीय सचिव पंकज मिश्रा ने कहा कि पाकुड़ और साहिबगंज के साथ सौतेला व्यवहार अब नहीं चलेगा। यदि जल्द ही ट्रेन सुविधाएं बहाल नहीं की गईं, तो आने वाले दिनों में कोयले की ढुलाई भी बंद कर दी जाएगी।
