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रांची : राज्यसभा सांसद ने PM से देव कुमार के शब्दकोश की चर्चा ‘मन की बात’ में करने का किया आग्रह

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रांची:
झारखंड के BJP के राज्यसभा सदस्य आदित्य प्रसाद (Aditya Prasad) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendre Modi) के पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने राज्य की विलुप्त होती आदिम जनजाति बिरहोर की भाषा संस्कृति को अक्षुण्ण रखने के लिए देव कुमार (Dev Kumar) द्वारा किये जा रहे कार्य को मन की बात कार्यक्रम में उल्लेख करने का अनुरोध किया है। 


21वीं शताब्दी का अनोखा प्रकाशन
उल्लेखनीय है कि रांची जिला के ओरमांझी थाना के दडदाग गांव निवासी देव कुमार ने बिरहोर-हिंदी-अंग्रेजी शब्दकोश की रचना की है। लेखक देव कुमार ने विलुप्त प्राय बिरहोर जनजाति का शब्दकोश तैयार कर अपना नाम एवं अपने संस्था JSLPS (Rural Development Department, Government of Jharkhand) का नाम देश-विदेश में रौशन किया था। यह शब्दकोश का विमोचन पद्मश्री बुलु इमाम द्वारा किया गया था। उन्होंने इस शब्दकोश को 21वीं शताब्दी का अनोखा प्रकाशन बताया था। बता दें कि अभी के समय में वह करम फाउंडेशन, रांची के संस्थापक सचिव हैं। शिक्षा व शोध कार्यों को बढावा दे रहे हैं।
संस्कृति को संरक्षित करने का बड़ा प्रयास
इस बारे में देव कुमार ने कहा कि अपनी दुर्लभ शब्दकोश के माध्यम से बिरहोर जनजाति की भाषा एवं संस्कृति को संरक्षित करने का बड़ा प्रयास किया है। जिसमें सामान्य बोलचाल की भाषा का समावेश करते हुए हिन्दी एवं अंग्रेजी रूपांतरण के साथ रंग-बिरंगे सुंदर चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।


 वैश्विक स्तर पर हो रही सराहना
बता दें कि कुमार द्वारा रचित बिरहोर-हिन्दी-अंग्रेजी शब्दकोश पुस्तक की सराहना वैश्विक स्तर पर हो रही है। जर्मनी के कील विश्वविद्यालय के शोध विद्वान डॉ.नेत्रा पी. पौडयाल एवं यूरोपियन यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट एंड ईस्ट नीदरलैंड के कुलपति प्रो. मोहन के. गौतम ने पुस्तक की समीक्षा  करते हुए बेहद उपयोगी बताते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के अनुरूप मातृभाषा को प्रोत्साहित करने वाला शब्दकोश बताया है l
जनजाति की जनसंख्या मात्र 10,742
जानकारी हो कि साल 2011 में हुए जनगणना के अनुसार, झारखंड राज्य में विलुप्त प्राय आदिम बिरहोर जनजाति की जनसंख्या मात्र 10,742 है। य़ह राज्य के रांची, रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, बोकारो, गिरिडीह इत्यादि जिलों में निवास करती है। यूनेस्को द्वारा बिरहोरी भाषा को गंभीर खतरे की भाषा में शामिल किया गया है।